Sunday, 23 March 2014

दूसरे दौर में सानिया-कारा की जोड़ी

वाशिंगटन : सानिया मिर्जा और जिम्बा
ब्वे की कारा ब्लैक की पांचवीं वरीयता प्राप्त जोड़ी ‘सोनी ओपन महिला युगल’ के दूसरे दौर में पहुंच गई  हैं जबकि लिएंडर पेस और राडेक स्टीपानेक पहले ही दौर में हारकर बाहर हो गए. पेस और स्टीपानेक इस साल पांच टूर्नामेंटों में तीसरी बार पहले दौर में बाहर हुए हैं.
सानिया और कारा ने ताइपै की गैरवरीय हाओ चिंग चान और युआन जान चान ने 6 . 3, 6 . 7, 10 . 8 से हराया. अब उनका सामना जार्जिया की ओकसाना के और रूस की एलिसा क्लेबानोवा से होगा. पुरूष वर्ग में पेस और चेक गणराज्य के स्टीपानेक की चौथी वरीय जोडी को अमेरिका के एरिक बुटोराक और रावेन क्लासेन ने पहले दौर में 6 . 3, 7 . 6 से हराया.
इससे पहले पेस और स्टीपानेक चेन्नई ओपन और सिडनी इंटरनेशनल में भी पहले दौर में बाहर हो गए थे. वे ऑस्ट्रेलियाई ओपन और इंडियन वेल्स मास्टर्स में क्वॉर्टर फाइनल तक पहुंचे. युगल में भारतीय चुनौती अभी रोहन बोपन्ना और महेश भूपति के रूप में शेष है.
बोपन्ना और पाकिस्तान के ऐसाम उल हक कुरैशी इटली के सिमोन बोलेली और फेबियो फोग्निनी से खेलेंगे. वहीं भूपति और दक्षिण अफ्रीका के केविन एंडरसन का सामना दूसरी वरीयता प्राप्त आस्ट्रिया के अलेक्जेंडर पेया और ब्राजील के ब्रूनो सोरेज से होगा.

प्यार मेरी किस्मत में नहीं:अलीशा

मुंबई (एसएनएन): कुछ दिन पहले अपना 49वां बर्थडे सेलिब्रेट कर चुकीं जानी मानी सिंगर अलीशा चिनॉय ने अपना जन्मदिन अलीबाग स्थित अपने घर पर अपने पिता के साथ मनाया. हालांकि वो अकेली हैं लेकिन फिर भी अकेलेपन में खुश हैं और मन की मल्लिका हैं.
अलीशा ने कहा कि काफी सालों से मैं अपने दम पर जिंदगी जी रही हूं. मैंने हमेशा ऐसे जिया है, जैसे मुझे किसी के साथ की जरूरत नहीं है लेकिन किसी के साथ के बगैर जीना मुझ पर बेहद भारी गुजरा है.
उन्होंने कहा कि लेकिन प्रेम मेरी किस्मत और फितरत में नहीं. बेहतर है कि मैं किसी की तलाश करने की बजाए इस सच को स्वीकार लूं कि जब किस्मत में प्रेम नहीं है, तो बार-बार उसे पाने की कोशिश करके खुद को तकलीफ पहुंचाने से कोई फायदा नहीं.
गौरतलब है कि अलीशा ने 1980 में राजेश झवेरी से शादी की थी, लेकिन अलीशा का करियर परवान चढ़ने के साथ ही उनके वैवाहिक जीवन का अंत हो गया. 2003 में वो कनाडाई संगीतकार और व्यवसायी रोमेल काजोआ के प्रेम में पड़ीं, लेकिन ये कहानी भी मंजिल पर पहुंचने से पहले खत्म हो गई.
संगीत जगत को कई सुपर हिट गाने दे चुकीं अलीशा कहती हैं कि वो हमेशा अपने रिश्तों में पूरी तरह समर्पित रहती हैं, लेकिन आखिर में उनका समर्पण व्यर्थ ही जाता है.
उन्होंने कहा कि मैं रिश्ते को बनाए रखने के लिए जितना हो सके कोशिश करती हूं. लेकिन किस्मत कुछ और ही चाहती है. अगर मैं कहूं तो मुझे प्रेम की कमी महसूस नहीं होती तो ये झूठ होगा. हां मुझे प्रेम की कमी महसूस होती है. सच हमेशा कड़वा होता है और मुझे ये स्वीकारना पड़ेगा कि मैं अकेले ही ठीक हूं. प्रेम बस गीतों में ही अच्छा लगता है. मैं अपने महल की रानी बनकर ही खुश हूं.

सेंसेक्स की टॉप 6 कंपनियों को 25501 करोड़ रु. का घाटा

sensexमुंबई सेंसेक्स की 6 टॉप कंपनियों का बाजार पूंजीकरण बीते सप्ताह 25501 करोड़ रुपये घट गया। बीते सप्ताह बंबई शेयर बाजार के सेंसेक्स में 54 अंक की गिरावट आई। इस दौरान सबसे ज्यादा घाटे में ओएनजीसी, इन्फोसिस व टीसीएस रहीं। ओएनजीसी का बाजार पूंजीकरण 12576 करोड़ रुपये घटकर 263509 करोड़ रुपये रह गया। 

टॉप 10 कंपनियों में ओएनजीसी सबसे अधिक नुकसान में रही। इन्फोसिस की बाजार हैसियत 5481 करोड़ रुपये घटकर 189153 करोड़ रुपये व टीसीएस की 3056 करोड़ रुपये घटकर 416337 करोड़ रुपये रह गई। एचडीएफसी के बाजार पूंजीकरण में 2291 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 131364 करोड़ रुपये पर आ गया। आईसीआईसीआई बैंक का बाजार मूल्यांकन 1813 करोड़ रुपये घटकर 138328 करोड़ रुपये रह गया। कोल इंडिया का बाजार पूंजीकरण 284 करोड़ रुपये के नुकसान से 166373 करोड़ रुपये रह गया। 

वहीं दूसरी ओर आईटीसी ने पिछले सप्ताह के दौरान 7708 करोड़ रुपये जोड़े और उसका बाजार पूंजीकरण बढ़कर 283432 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का एमकैप 711 करोड़ रुपये बढ़कर 287089 करोड़ रुपये रहा, जबकि एचडीएफसी बैंक की बाजार हैसियत 48 करोड़ रुपये बढ़कर 175460 करोड़ रुपये रही।

पार्टियों के विज्ञापनों से डिजिटल प्लेटफॉर्म की आय बढ़ेगी: एसोचैम

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राजनीति बदल रही है या नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि राजनीतिक दलों द्वारा प्रचार-प्रसार का तरीका बदल रहा है। लगभग हर राजनीतिक दल युवा पीढ़ी को ध्यान में रख कर गूगल, फेसबुक जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चुनावी विज्ञापन दे रहे हैं। इस कारण विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

उद्योग मंडल एसोचैम के एक अध्ययन में यह बात कही गई है। विज्ञापन और प्रचार-प्रसार पर होने वाले करीब 4000 से 5000 करोड़ रुपये के व्यय में से इंटरनेट पहुंच करीब 30 प्रतिशत मतदाताओं तक सीमित होने के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म कम-से-कम 400 से 500 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं।

रिपोर्ट में यह कहा गया है कि राजनीतिक दलों के डिजिटल मीडिया पर 2009 में हुए आम चुनावों के मुकाबले ज्यादा खर्च को देखते हुए गूगल जैसी कंपनियां और फेसबुक तथा ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स इस साल भारत में आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद कर सकती हैं।
एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत ने कहा, 'केवल कांग्रेस, बीजेपी जैसी राष्ट्रीय दल ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दल भी इस साल डिजिटल मंच पर विज्ञापन बजट बढ़ा रहे हैं।' गौरतलब है कि चुनाव आयोग के नए नियमों के अनुसार सोशल मीडिया पर राजनीतिक विज्ञापन देने से पहले उसकी मंजूरी जरूरी है।

'नेतागिरी' को पूरा भरोसा, चुनाव में देगी आशीर्वाद 'बाबागिरी'

'नेतागिरी' को पूरा भरोसा, चुनाव में देगी आशीर्वाद 'बाबागिरी'भोपाल। बीते दो दशक में धर्म, राजनीति के करीब आया है। पहले नेता मंदिर, मठ, अखाड़ों के महंत और आध्यात्मिक संतों से आशीर्वाद लेने पहुंचते थे, लेकिन अब वही संत किसी न किसी नेता का प्रचार करते दिखते हैं। धार्मिक प्रवचन के मंच से बाकायदा राजनीतिक संवाद हो रहा है। सीधे शब्दों में कहें, धर्म का राजनीति में और राजनीति की धर्म में अच्छी पैठ बन गई है। 90 के दशक में चारों पीठों के शंकराचार्य किसी न किसी एक राजनीतिक दल से सीधा संपर्क रखते थे। 
 
संतों की बात करें, तो योगगुरू बाबा रामदेव जी खुलकर बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को समर्थन दे रहे हैं। मोदी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए उन्होंने देश भर के हिंदी राज्यों की यात्रा भी कर ली है। योग शिविर के साथ-साथ वे केंद्र सरकार की कमियां गिनाते हैं और विकल्प के रूप में मोदी को ज्यादा से ज्यादा वोट देने की अपील भी करते हैं। वहीं मुस्लिम धर्मगुरू भी एक वर्ग विशेष को किसी के पक्ष या विरुद्ध में वोट देने का फरमान सुनाते हैं। बिहार, यूपी का उदाहरण सामने है। 
 
एक ही सिक्के के दो पहलू - 
 
नेताओं का भी इनसे सीधा फायदा जुड़ा है। कोई नामी संत अगर 'आशीर्वाद' स्वरूप अपने हजारों-लाखों भक्तों और अनुयायियों को फरमान सुना दें कि इसे नहीं, इन्हें वोट देना है, तो नेताओं के वारे-न्यारे हो जाते हैं। यह कितना प्रभावी है, सब जानते हैं। कह सकते हैं कि मौजूदा समय में धर्म और राजनीति एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए हैं। ऐसे कई संत हैं, जिनसे नेताओं की और नेताओं की इनसे आस्था बंधी हुई हैं। जानिए, वह संतों में वे नाम कौन से हैं, जो राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करते हैं और अपनी 'बाबागिरी' से 'नेतागिरी' को फायदा पहुंचा सकते हैं-

चुनावी समर की तस्वीर बदल पायेंगे फिल्मी कलाकार ?

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यी दिल्ली : लोकसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के केंद्र में सत्ता हासिल करने की जद्दोजहद के बीच शत्रुघ्न सिन्हा, राज बब्बर, हेमा मालिनी के साथ अभिनय से राजनीति में कदम रखने वाली किरण खेर, गुल पनाग, मुनमुन सेन, पवन कल्याण जैसे नये कलाकार सत्ता की दौड में ग्लैमर का तडका लगा रहे हैं.
फिल्मी कलाकारों का राजनीति में कदम रखना कोई नई बात नहीं है लेकिन दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत में यह चलन सफल नहीं रहा है. तमिलनाडु और
 आंध्रप्रदेश के लोगों में फिल्मी कलाकारों के प्रति जबर्दस्त आकर्षण देखा गया है और इन प्रदेशों के लोगों ने एन टी रामाराव और एम जी रामचंद्रन जैसे फिल्मी दुनिया के शीर्ष कलाकारों को सत्ता की कुंजी सौंपी भी लेकिन अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, धर्मेन्द्र और गोविंदा पूरे गाजेबाजे के साथ राजनीति में आए लेकिन बीच में ही इसे छोड गए. इस चुनाव में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सितारों की जबर्दस्त संख्या क्या अपना जलवा दिखा पाती है और राजनीति में प्रभाव छोड पाती है?

लापता विमानः ‘सब ठीक है, शुभरात्रि’ खोलेगा रहस्य ?

लंदन : मलेशिया एयरलाइंस के लापता हुए विमान के पायलटों और नियंत्रण टॉवर के बीच अंतिम 54 मिनट की बातचीत का खुलासा ब्रिटेन के एक अखबार ने किया है. ब्रिटेन के एक मुख्य अखबार द टेलीग्राफ के अनुसार ‘लापता मलेशियाई विमान एमएच 370 के को-पायलट फारिक अब्दुल हामिद और नियंत्रण टावर के बीच 8 मार्च को बातचीत रात 12:15 बजे शुरू हुई. रात 1:19 बजे हामिद ने अंतिम संदेश में कहा था  'सब ठीक है, शुभरात्रि.’
इस बातचीत को लेकर जांचकर्ताओं का दावा है कि बातचीत की शुरुआत तब हुई जब विमान में छेड़छाड़ हो चुकी थी. अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत पूरी तरह रोजमर्रा की जैसी प्रतीत होती है, लेकिन फिर भी दो असामान्य बातें निकल कर आती हैं. विश्लेषकों की दृष्टि में पहली असामान्य बात यह है कि रात 1:07 बजे संदेश में कहा गया कि विमान 35,000 फुट की ऊंचाई पर है. यही संदेश छह मिनट के अंतराल पर दोहराया गया.
एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशन एड्रेसिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम (एसीएआरएस) भी अंतिम संदेश भेजे जाने के 30 मिनट बाद संभवत: जानबूझकर निष्क्रिय कर दिया गया. जांचकर्ताओं का मानना है कि एसीएआरएस को हामिद के 1:19 बजे अंतिम संदेश देने के पहले बंद कर दिया गया था. एक अलग ट्रांसपोंडर को 1:21 बजे बंद कर दिया गया था.
दूसरी असामान्य बात जांचकर्ताओं की नजर में यह है कि विमान की गुमशुदगी दुर्घटना नहीं है. संपर्क टूट जाने के बाद विमान को पश्चिम की दिशा में उस बिंदु पर मोड़ दिया गया, जब कुआलालंपुर के वायु यातायात नियंत्रक उसका नियंत्रण हो-ची-मिन्ह सिटी के हवाले करते हैं.
बोइंग 777 उड़ा चुके ब्रिटिश एयरवेज के एक पूर्व पायलट स्टीफन बजडेगन ने कहा  'यदि मुझे विमान को चुराना होता तो मैं उसी बिंदु पर ऐसा करता. विमान यातायात नियंत्रकों के बीच कुछ दूरी डेड स्पेस होती है. यही वह वक्त होता है जिस दौरान विमान को जमीन से नहीं देखा जा सकता.'
वहीं इस नए खुलासे से इस अनुमान को बल मिलने वाला है कि क्या लापता एमएच 370 किसी दुर्घटना का या अपहरण का शिकार हुआ. यदि पायलटों का गुमशुदगी में हाथ होता है तो वे अपनी मंशा छिपाने में अत्यंत सतर्क रहते.