Sunday, 29 September 2013

देखी है ऐसी दिलेरीः बाघों के साथ रहता है पूरा परिवार...


दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो दूसरों के लिए मिसाल बन जाते हैं. कुछ ऐसा कर जाते हैं जिसे देखकर दुनिया हैरान रह जाती है. कुछ ऐसा जिसे करने का तो छोड़िए हम शायद सपने में भी वो नहीं सोच सकते. ब्राजील का एक ऐसा ही परिवार है, जिसका कारनामा सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. इस परिवार ने ऐसे जानवर को पाल रखा है, जिसे देखकर ही लोगों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है.
इस घर का पालतू जानवर है बाघ. घर में बाघ इस तरह घूमते हैं, जैसे कोई पालतू कुत्ता घूम रहा हो. इस परिवार के बारे में जो भी सुनता है, वो हैरान हो जाता है. लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं होता है, लेकिन इस घर में एक-दो नहीं बल्कि सात-सात खतरनाक जानवर बच्चों की तरह रहते हैं.
वो जानवर जिनके एक पंजे से इंसान की जान जा सकती है, वो घर के अंदर खुलेआम घूमते रहते हैं. इस घर के पास से गुजरने वाले भी सहम जाते होंगे, लेकिन इस घर में कोई भी ऐसा नहीं है जो इन बाघों से डरता हो, उल्टा बाघ जरूर इनसे डरते हैं.

इसीलिए फिलहाल लोग इस परिवार को टाइगर वाली फैमिली के नाम से जानते हैं. ब्राजील के साओपालो शहर से कुछ दूर मारिंगा में ये परिवार रहता है और वहीं रहते हैं सात-सात बाघ.
इस परिवार के मालिक हैं एरी बोर्ग्स, 43 साल के ऐरी को बाघों से बहुत प्यार है. सोचिए कितना भी ताकतवर इंसान क्यों न हो, बाघ जैसे खतरनाक जानवर के सामने आने से ही उसकी सांस अटक जाएगी, लेकिन ऐरी के सामने बाघ की गुर्राहट का भी कोई जोर नहीं.

ये सैकड़ों किलो वजनी बाघ ऐरी के लिए बिल्कुल बच्चों की तरह है, ठीक वैसे ही जैसे उनके अपने बच्चे हैं. इस घर में ऐरी की सबसे बड़ी बेटी 24 साल की ह्यूनीरा, उससे छोटी 23 साल की उयारा, तीसरी सबसे छोटी बीस साल की नयारा और नयारा की 2 साल की बेटी रयारा रहती है.
इस पूरे परिवार के लिए बाघ भी बच्चे की तरह हैं तो बच्चे भी इस परिवार के बच्चों के साथ बच्चों की तरह की रहते हैं. लेकिन ऐरी की तीनों बेटियों में अगर कोई सबसे ज्यादा इन बाघों पर जान छिड़कती है तो वो नयारा है.
नयारा बाघों के बिना रहने के बारे में सोच भी नहीं सकती है. उसकी सुबह हो या फिर शाम बाघों के साथ मस्ती करके ही गुजरती है. खास बात ये है कि बाघों को भी नयारा उतनी ही पसंद है.
टॉम नाम का बाघ नयारा के साथ ही स्वीमिंग पूल में नहाता है. नयारा भी उसके साथ पानी में जमकर मस्ती करती है. सोचिए बाघ की पीठ चढ़ जाती है, लेकिन इससे टॉम को कोई शिकायत नहीं है.
इसके पीछे भी नयारा की एक कोशिश है, टॉम का वजन लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में इस तरह की एक्सरसाइज करवा कर वो टॉम का वजन कम करने की कोशिश करती है. इस परिवार में नयारा के अलावा टॉम को कोई भी नहला नहीं सकता.
नयारा की ये 2 साल की बेटी भी बिल्कुल अपनी मां की तरह इन बाघों पर जान छिड़कती है. रयारा जब तक बाघ की पीठ पर सैर न कर ले इनके साथ खेल न ले तब तक सोने को तैयार नहीं होती.
और तो और खाने की टेबल पर भी ये बाघ साथ ही में रहते हैं. ऐरी के परिवार के हाथों में ये मांस ऐसे खाते हैं मानों कोई बच्चा रोटी का टुकड़ा खा रहा हो. इतना ही नहीं इनका पूरा पोषण करने के लिए इन्हें बोतल से दूध तक पिलाया जाता है.
लेकिन इस परिवार में एक शख्स है, जिसे बाघों के साथ ज्यादा मेलजोल पसंद नहीं है. वो हैं नराया के पति मिस्टर रफेल. रफेल बाघों के बीच रहने वाली इस फैमिली को लेकर बहुत परेशान रहते हैं. उन्हें हर वक्त डर बना रहता है कि कहीं बाघों के करीबी परिवार में कोई अनहोनी न कर दे. खासकर वो अपनी बच्ची और बीवी को लेकर बहुत परेशान रहते हैं.
खैर रफेल की चिंता अपनी जगह सही है, लेकिन फिलहाल इस परिवार में किसी को रफेल की बातों से कोई लेना देना नहीं है.

भारत पाकिस्तान मुद्दे से हर कोई तंग आ चुका हैः सोहा अली खान


सोहा अली खान
मुंबई मेरी जान के बाद एक बार फिर सोहा अली खान फराज हैदर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘वॉर छोड ना यार’ के साथ जर्नलिस्ट के रूप में आ रही हैं. हालांकि अपने इस किरदार के लिए सोहा काफी एक्साइटेड हैं फिर भी इन दोनों फिल्मों में वह कितना फर्क पाती हैं? इस सवाल पर सोहा ने कहा, ‘’मुंबई मेरी जान में मैं एक टीवी जर्नलिस्ट बनी थी जिसके जरिये दिखाया गया था कि टीवी जर्नलिस्ट बहुत असंवेदनशील होते हैं. कुछ हादसा होने के बाद वह बिना कुछ समझे बूझे पूछते हैं कि आपको कैसा लग रहा है? हालांकि इन दोनों फिल्म के बीच 5 या 6 साल का अंतर है. और इस दौरान मैंने काफी मीडिया से बातें की हैं और उन्हें करीब से जाना है. मुझे लगता है बीते एक दो साल में मीडिया ने बहुत बडी जिम्मेदारी निभाई है.
जैसा हमने रंग दे बसंती में दिखाया था वही बात वॉर छोड ना यार में भी दिखा रहे हैं. भारत पाकिस्तान मुद्दे से हर कोई तंग आ चुका है. हर कोई चाहता है कि अब यह मुद्दा बंद हो जाना चाहिए. हमें लगता है कि जो सीमा पर सैनिक हैं उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पडता लेकिन ऐसा नहीं है. वह भी सोचते हैं कि उनके देश समाज में यह क्या चल रहा है और क्यों चल रहा है.’’
शरमन जोशी, जावेद जाफरी, मनोज पाहवा और संजय मिश्रा के साथ इकलौती सोहा अली खान की इस फिल्म के निर्देशक हैं फराज़ हैदर. वॉर छोड ना यार 11 अक्तूबर को रिलीज हो रही है. तो फिर तैयार रहिए कॉमेडी भरी जंग के लिए.

‘आइटम सॉन्ग’ शब्द से नफरत है: अदिति

Image Loadingअभिनेत्री अदिति राव हैदरी ‘आइटम सॉन्ग’ शब्द के पूरी तरह खिलाफ हैं। वह कहती हैं कि उन्हें ‘डांस नंबर’ का हिस्सा बनने में कोई एतराज नहीं हैं, लेकिन यह शिष्ट होना चाहिए।
अदिति ने यहां कहा कि मुझे आइटम सॉन्ग शब्द से नफरत है। मेरे लिए, आइटम गाना वह होता है, जिसमें लड़की छोटे कपड़े पहनती है और सेक्सी दिखती हो। मैं घटिया नहीं दिखना चाहती हूं। मेरे लिए, शिष्टता महत्वपूर्ण है। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि मैं आइटम गाना करूंगी। लेकिन हां, अगर यह एक नृत्य गीत हुआ तो मैं इसे करना पसंद करूंगी। इन दिनों अदिति अपनी आगामी फिल्म ‘बॉस’ के प्रचार में व्यस्त है। इसमें उन्होंने बिकिनी भी पहनी है। अक्षय कुमार की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में अपने बोल्ड रूप पर मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया से अदिति खुश हैं। पूर्व में ‘रॉकस्टार’, ‘लंदन’, ‘पेरिस’ और ‘न्यूयॉर्क’ फिल्मों में अभिनय कर चुकीं अदिति ने कहा कि मुझे फिल्म के लिए वजन न घटाने के लिए कहा गया था। लेकिन मैंने अपने शरीर में कसाव के लिए कड़ी मेहनत की। मैं, एक स्वाभाविक महिला शरीर चाह रही थी। मैंने कड़ा शारीरिक परिश्रम किया, जिसके लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। एंथनी डिसूजा निर्देशित ‘बॉस’ 16 अक्टूबर को प्रदर्शित होनी है।

बात का घाव

Image Loadingबहुत पुरानी बात है। एक लकड़हारे और शेर में दोस्ती थी। दोनों का मन एक दूसरे के बिना नहीं लगता था। शेर जंगल में रहता था और लकड़हारा गांव में। लकड़हारा लकडिया काटकर और उन्हें बेचकर अपना घर चला रहा था। सारे दिन वह जंगल में लकडिम्यां काटता था और शेर उसके पास बैठकर उससे बातें किया करता था।
एक दिन लकड़हारे ने सोचा कि वह अपने दोस्त शेर को दावत पर बुलाए। अगले दिन उसने शेर के सामने दावत का प्रस्ताव रखा। शेर ने दावत का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। लकडियां काटने के बाद शाम को लकड़हारा शेर को अपने घर ले गया। शेर को लकड़हारे के साथ देखकर लकड़हारे की पत्नी और बच्चे डर गए। उन्हें डरा हुआ देखकर लकड़हारे ने उनका डर दूर करते हुए बताया कि शेर उसका दोस्त है और आज हमारा मेहमान है। लकड़हारे ने शेर की खूब आवभगत की। रात को सोने का वक्त होने पर लकड़हारे ने शेर को अपने साथ घर में सुलाना चाहा, पर उसकी पत्नी ने शेर को घर में सुलाने का विरोध करते हुए कहा कि वह शेर को किसी कीमत पर घर में नहीं सोने देगी, क्योंकि शेर जैसे खूंखार जीव का कोई भरोसा नहीं होता। ऐसा जीव कभी भी नुकसान पहुंचा सकता है। पत्नी के विरोध करने पर लकड़हारे ने पत्नी को समझाया, ‘यह शेर और शेरों की तरह नहीं है। यह साथ सोने पर किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाएगा।’ लेकिन उसकी पत्नी शेर को घर में सुलाने को तैयार नहीं हुई। आखिर थककर लकड़हारे को अपनी पत्नी की बात माननी पड़ी। लक ड़हारे की पत्नी ने लकड़हारे से शेर के गले में रस्सी बांधकर घर के बाहर खड़े पेड़ से बांधने को कहा। पत्नी की बात मानकर लकड़हारे ने ऐसा ही किया।
उस रात मौसम बहुत खराब हो गया, लकड़हारा अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घर में आराम से सोता रहा, किंतु शेर बेचारा सारी रात पेड़ के नीचे बंधा बारिश और तेज हवा के थपेड़े सहता रहा। सुबह को लकड़हारा सोकर उठा तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ कि उसकी वजह से उसका मित्र सारी रात बारिश में भीगता रहा। यह सोचकर लकड़हारे को बहुत दुख हुआ, उसने शेर से माफी मांगी। शेर ने मुस्कराते हुए कहा, ‘इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है दोस्त, यह खराब मौसम की मेहरबानी है।’ शेर की बात सुनकर लकड़हारे को खुशी हुई कि उसका मित्र उससे नाराज नहीं है। लकड़हारा लकडिया काटने जंगल गया तो शेर को अपने घर पर रोकना चाहता था, पर शेर नहीं रुका। कई दिन गुजर गए। एक दिन लकड़हारा लकडियां काटने के बाद घर जाने की तैयारी में था तो शेर उसके पास आया और बोला, ‘दोस्त, अपनी कुल्हाड़ी मेरी पीठ पर मारो।’ शेर की बात सुनकर लकड़हारा चौंक गया। उसने सोचा, शायद शेर उससे मजाक कर रहा है। शेर ने दोबारा कुल्हाड़ी मारने को कहा तो लकड़हारा हैरानी से बोला, ‘तुम क्या कह रहे हो? मैं भला तुम्हें कुल्हाड़ी कैसे मार सकता हूं?’ लकड़हारे के इनकार करने पर शेर ने दहाड़ते हुए कहा, ‘अगर तुमने मेरा कहा नहीं माना तो मैं तुम्हें खा जाऊंगा।’ शेर का बदला रूप देखकर लकड़हारा डर गया। उसकी समझ में नहीं आया कि उसका मित्र उससे कुल्हाड़ी मारने को क्यों कह रहा है। उसने इस बारे में शेर से पूछा, लेकिन शेर ने कुछ नहीं बताया। शेर ने तीसरी बार चेतावनी देते हुए कुल्हाड़ी मारने के लिए कहा। मरता क्या न करता, लकड़हारे ने अपनी जान बचाने के लिए शेर की पीठ पर कुल्हाड़ी दे मारी। कुल्हाड़ी लगते ही शेर की पीठ पर गहरा जख्म हो गया, जिससे खून बहने लगा। शेर अपनी गुफा की ओर बढ़ गया। अगले दिन लकड़हारा डरते-डरते जंगल में लकडियां काटने गया कि पता नहीं आज उसके प्रति शेर का कैसा व्यवहार होगा। शेर ने लकड़हारे के साथ और दिन की तरह व्यवहार किया तो लकड़हारे के दिल को तसल्ली हुई। शेर की पीठ का जख्म वक्त के साथ-साथ भरता गया। एक दिन शेर ने लकड़हारे से अपने जख्म के बारे में पूछा तो लकड़हारे ने खुश होकर बताया, ‘मित्र, तुम्हारा जख्म अब पूरी तरह भर गया है।’ लकड़हारे के बताने पर शेर गंभीर होते हुए बोला, ‘जानना चाहते हो मित्र, मैंने तुमसे अपनी पीठ पर कुल्हाड़ी क्यों लगवाई थी?’ शेर के कहने पर लकड़हारे ने हामी भर दी। वह भी यह बात जानने को उत्सुक था। शेर उसे बताने लगा, ‘घर आया मेहमान भगवान के समान होता है दोस्त और मेहमान का आदर बड़े प्रेम से किया जाता है। मैं भी तुम्हारा मेहमान था, लेकिन तुमने मुझे घर से बाहर पेड़ से बांध दिया, जहां मैं सारी रात बारिश में भीगता रहा। उस दिन की बात का जख्म मेरे दिल पर आज भी ताजा है। मैंने तुमसे अपनी पीठ पर कुल्हाड़ी इसीलिए लगवाई थी ताकि मैं तुम्हें दिखा सकूं कि चोट का जख्म तो भर जाता है, किंतु बात का जख्म कभी नहीं भरता। एक बात कान खोलकर सुन लो, तुम्हारी और मेरी मित्रता केवल आज तक थी। आज के बाद न मैं तुम्हारा मित्र हूं और न ही तुम मेरे मित्र हो और अगर आज के बाद तुम मुझे इस जंगल में दिखाई दे गए तो मैं तुम्हें अपना भोजन बना लूंगा।’ शेर अपनी बात पूरी करने के बाद चला गया। लकड़हारा शेर को जाते हुए देखता रहा। अपनी पत्नी के गलत व्यवहार की वजह से आज उसने अपना पुराना मित्र खो दिया था। उसे बहुत पछतावा हुआ, किंतु अब पछताने से क्या फायदा था। लकड़हारा दुखी मन से गांव की तरफ चल दिया। क्या सीख सकते हो: किसी को भी बुरा मत बोलो। दोस्त को मजाक में भी अपशब्द न कहो। अगर तुम्हे किसी की कोई बात बुरी भी लगती है तो उसे बता दो कि तुम्हें इस तरह से बात करना पसंद नहीं है। हमेशा घर आए मेहमान का खूब आदर-सम्मान करो।
(मनभावन कहानियां से साभार, लेखक: गंगा प्रसाद शर्मा)

'रील' लाइफ में फिलहाल साथ नजर नहीं आएंगे अभिषेक-ऐश्वर्या


अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन
अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन रीयल लाइफ में भले ही सात जनम के बंधन में बंध गए हैं, लेकिन लंबे समय से ये दोनों रील लाइफ में साथ नहीं दिखे हैं. जूनियर बच्चन ने शुक्रवार को खुलासा किया कि फिलहाल वो ऐश के साथ कोई फिल्म नहीं कर रहे हैं. फिल्म 'हैप्पी एनिवर्सिरी' में दोनों के साथ करने की खबरे हैं, लेकिन अभिषेक ने कहा इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है. हमारे सहयोगी चैनल हेडलाइंस टुडे से खास बातचीत में अभिषेक बच्चन ने कहा, 'ऐश्वर्या के साथ काम करने का अभी कोई प्लान नहीं है. हम ऐसी स्क्रिप्ट का इंतजार कर रहे हैं, जो दोनों को ही पसंद आए.'
'हैप्पी न्यू ईयर' फिल्म के पहले शेड्यूल की शूटिंग पूरी कर चुके अभिषेक अब डायरेक्टर उमेशा शुक्ला के साथ काम करेंगे. उन्होंने कहा, 'मैं उमेशा शुक्ला के साथ अपनी अगली फिल्म पर काम शुरू कर रहा हूं. इस फिल्म में आसिन और ऋषि कपूर भी होंगे.'
ऋषि कपूर के साथ अभिषेक पहले भी काम कर चुके हैं. उन्होंने कहा, 'मैं दिल्ली-6 में ऋषि कपूर के साथ काम कर चुका हूं और फिर से उनके साथ करने को लेकर बहुत एक्साइटेड हूं. फिल्म में हम बाप-बेटे की भूमिका में नजर आएंगे. उमेश की पिछली फिल्म 'ओह माय गॉड' मुझे बहुत पसंद आई थी.'
अभिषेक 'धूम-3' में भी नजर आएंगे. एक बार फिर अभिषेक सुपरकॉप जय दीक्षित की भूमिका में नजर आएंगे जबकि उदय चोपड़ा का किरदार अली का ही होगा.

एक और एक ग्यारह

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बनगिरी के घने जंगल में एक हाथी ने उत्पात मचा रखा था। वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नहीं समझता था। बनगिरी में ही एक पेड़ पर टिक्कू चिडिया का छोटा-सा सुखी संसार था। टिक्कू अंडों पर बैठी नन्हे-नन्हे प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती रहती।
एक दिन उस पेड़ के नीचे से क्रूर हाथी गरजता, चिंघाड़ता पेड़ों को तोड़ता-मरोड़ता उसी ओर आया। देखते ही देखते उसने चिडिया के घोंसले वाला पेड़ भी तोड़ डाला। घोंसला नीचे आ गिरा। अंडे टूट गए और ऊपर से हाथी का पैर उस पर पड़ा। टिक्कू चीखने के सिवा और कुछ नहीं कर सकती थी। जब टिक्कू तेज-तेज रो रही थी, तभी वहां उसकी दोस्त पिंकी आई। पिंकी ने उसके रोने का कारण पूछा तो टिक्कू ने अपनी सारी कहानी कह डाली। पिंकी चिडिया बोली, ‘इस तरह गम में डूबे रहने से कुछ नहीं होगा। उस हाथी को सबक सिखाने के लिए हमें कुछ करना होगा’। टिक्कू ने कहा, ‘हम उस बलशाली हाथी से कैसे टक्कर ले सकते हैं’?
पिंकी ने समझाया, ‘एक और एक मिलकर ग्यारह बनते हैं। हम अपनी शक्तियां जोडेंगे’।
‘कैसे’? टिक्कू ने पूछा। पिंकी बोली, ‘मेरा एक दोस्त है भंवरा। हमें उससे सलाह लेनी चाहिए’।
यह सुनकर टिक्कू, पिंकी संग भंवरे के पास पहुंची। सारी बात सुनकर भंवरे ने कहा, ‘बहुत बुरा हुआ। मेरा एक मेंढ़क मित्र है। आओ, उससे सहायता मांगे’। अब तीनों उस सरोवर के किनारे पहुंचे, जहां वह मेढ़क रहता था। भंवरे ने सारी समस्या बताई। मेंढ़क बोला, ‘आप लोग धैर्य से मेरी प्रतीक्षा करें। मैं गहरे पाने में बैठकर सोचता हूं’। ऐसा कहकर मेंढ़क जल में कूद गया। आधे घंटे बाद वह पानी से बाहर आया तो उसकी आंखें चमक रही थीं। वह बोला, ‘दोस्तो! उस हत्यारे हाथी को नष्ट करने की मेरे दिमाग में एक बड़ी अच्छी योजना आई है। उसमें सभी का योगदान होगा’। मेंढ़क ने जैसे ही अपनी योजना बताई, सब खुशी से उछल पड़े। योजना सचमुच ही अद्भुत थी। मेंढक ने दोबारा बारी-बारी सबको अपना-अपना रोल समझाया। कुछ ही दूर वह हाथी तोड़फोड़ मचाकर व पेट भरकर कोंपलों वाली शाखाएं खाकर मस्ती में खड़ा झूम रहा था। पहला काम भंवरे का था। वह हाथी के कानों के पास जाकर मधुर राग गुंजाने लगा। राग सुनकर हाथी मस्त होकर आंखें बंद करके झूमने लगा। तभी पिंकी (जो कठफोड़वा थी) ने अपना काम कर दिखाया। वो आई और अपनी सुई जैसी नुकीली चोंच से उसने तेजी से हाथी की दोनों आंखें बींध डालीं। हाथी की आंखें फूट गईं। वह तड़पता हुआ अंधा होकर इधर-उधर भागने लगा। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था, हाथी का क्रोध बढ़ता जा रहा था। आंखों से नजर न आने के कारण ठोकरों और टक्करों से शरीर जख्मी होता जा रहा था। जख्म उसे और चिल्लाने पर मजबूर कर रहे थे। पिंकी यह सब देखकर मेंढ़क से बोली, ‘मैं आजीवन तुम्हारी आभारी रहूंगी। तुमने मेरी इतनी सहायता कर दी।’ मेंढ़क ने कहा, ‘आभार मानने की जरूरत नहीं। मित्र ही मित्रों के काम आते हैं।’
एक तो आंखों में जलन और ऊ पर से चिल्लाते-चिंघाड़ते हाथी का गला सूख गया। उसे तेज प्यास लगने लगी। अब उसे एक ही चीज की तलाश थी, पानी। मेंढ़क ने अपने बहुत से बंधु-बांधवों को इकट्ठा किया और उन्हें दूर ले जाकर बहुत बडे गड्ढे के किनारे बैठकर टर्राने के लिए कहा। सारे मेंढक टर्र-टर्र करने लगे। मेंढ़क की टर्राहट सुनकर हाथी के कान खडे़ हो गए। वह जानता था कि मेंढक जल स्त्रोत के निकट ही वास करते हैं। वह उसी दिशा में चल पड़ा। टर्राहट और तेज होती जा रही थी। प्यासा हाथी और तेज भागने लगा।
जैसे ही हाथी गड्ढे के निकट पहुंचा, मेंढ़कों ने पूरा जोर लगाकर टर्राना शुरू किया। हाथी आगे बढ़ा और विशाल पत्थर की तरह गड्ढे में गिर पड़ा, जहां से वह कभी नहीं निकल सकता था। तो इस तरह उसके अहंकार का अंत हुआ। फिर तो उस जंगल में शांति और खुशियां लौट आई थीं।

पहले मुर्गी या अंडा

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बादशाह अकबर के शाही दरबार की कार्यवाही स्थगित हो गई थी। सभी दरबारी और बादशाह जाने ही वाले थे कि तभी एक सुरक्षाकर्मी भागता हुआ आया और बोला, ‘महाराज, दक्षिण भारत से एक विद्वान पंडित अभी-अभी पधारे हैं। वह आपसे और बीरबल से तुरंत मिलने को उत्सुक हैं। वह इसी उद्देश्य से आगरा आए हैं।’ ‘इस प्रकार उन्हें प्रतीक्षा कराना उचित नहीं है। उन्हें तुरंत शाही दरबार में लाया जाये’, बाद
 
 बादशाह अकबर के शाही दरबार की कार्यवाही स्थगित हो गई थी। सभी दरबारी और बादशाह जाने ही वाले थे कि तभी एक सुरक्षाकर्मी भागता हुआ आया और बोला, ‘महाराज, दक्षिण भारत से एक विद्वान पंडित अभी-अभी पधारे हैं। वह आपसे और बीरबल से तुरंत मिलने को उत्सुक हैं। वह इसी उद्देश्य से आगरा आए हैं।’ ‘इस प्रकार उन्हें प्रतीक्षा कराना उचित नहीं है। उन्हें तुरंत शाही दरबार में लाया जाये’, बादशाह ने आदेश दिया। जैसे ही सुरक्षाकर्मी पंडित को लेने के लिए चला गया तो बादशाह बोले, ‘बीरबल, अब बहुत देर हो चुकी है और मैं बहुत थक गया हूं। तुम ही विद्वान पंडित से मिल लो और पता करो कि वह कहना क्या चाहते हैं?’ बीरबल ने सर हिलाकर हामी भर दी। पंडित के आने पर दोनों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। पंडित ने बीरबल से कहा, ‘बीरबल, मैंने तुम्हारी बुद्धिमानी के विषय में बहुत कुछ सुना है, इसलिए तुम्हारी परीक्षा लेना चाहता हूं।’ बीरबल यह सुनकर मन ही मन मुस्कराए और बोले, ‘जरूर लीजिए परीक्षा।’ यह सुनकर पंडित बोले, ‘मुझे पहले ये बताओ कि मैं तुमसे सरल प्रश्न पूछूं या फिर कठिन प्रश्न?’
बीरबल ने सोचा कि महाराज तो थक चुके हैं और विश्राम के लिए जा चुके हैं, सो प्रश्न का जवाब देने का यह सही समय नहीं है। बीरबल ने कहा, ‘पंडित जी, आप सिर्फ एक कठिन प्रश्न पूछिए।’ पंडित ने कहा, ‘बीरबल, बताओ पहले क्या आता है, मुर्गी या अंडा?’ बीरबल ने तुरंत जवाब दिया, ‘मुर्गी, पंडित जी।’ ‘तुम कैसे कह सकते हो बीरबल?’ जवाब सुनकर पंडित जी ने कहा। ‘ओह, और प्रश्न नहीं पंडित जी, आपने वादा किया था कि केवल एक प्रश्न ही पूछेंगे। जो आप पूछ चुके हैं’, बीरबल ने कहा। पंडित जी बीरबल की चालाकी समझ चुके थे और बिना कुछ कहे वहां से चले गए। इसी तरह एक दिन बादशाह ने बीरबल से कहा, ‘बीरबल, क्या तुम जानते हो कि एक मूर्ख और ज्ञानी व्यक्ति में क्या अंतर है?’ ‘जी महाराज, मैं जानता हूं।’ बीरबल ने कहा। ‘क्या तुम विस्तार से बता सकते हो?’ अकबर ने पूछा। ‘महाराज, वह व्यक्ति जो अपनी बुद्धि का प्रयोग मुश्किल, चुनौतीपूर्ण तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में अपना नियंत्रण खोए बिना करता है, वह ज्ञानी होता है। परन्तु वह व्यक्ति जो प्रतिकूल परिस्थितियों को इस प्रकार सुलझाता है कि वे और प्रतिकूल हो जाती हैं, मूर्ख कहलाता है।’ बादशाह अकबर ने सोचा कि बीरबल कहना चाहता है कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति ही ज्ञानी होता है, क्योंकि उसे पता होता है कि कब किस समस्या का समाधान कैसे करना है।’ बीरबल के चतुर जवाब से बादशाह के दिल में उसका स्थान और पक्का हो गया।शाह ने आदेश दिया। जैसे ही सुरक्षाकर्मी पंडित को लेने के लिए चला गया तो बादशाह बोले, ‘बीरबल, अब बहुत देर हो चुकी है और मैं बहुत थक गया हूं। तुम ही विद्वान पंडित से मिल लो और पता करो कि वह कहना क्या चाहते हैं?’ बीरबल ने सर हिलाकर हामी भर दी। पंडित के आने पर दोनों ने एक-दूसरे का अभिवादन किया। पंडित ने बीरबल से कहा, ‘बीरबल, मैंने तुम्हारी बुद्धिमानी के विषय में बहुत कुछ सुना है, इसलिए तुम्हारी परीक्षा लेना चाहता हूं।’ बीरबल यह सुनकर मन ही मन मुस्कराए और बोले, ‘जरूर लीजिए परीक्षा।’ यह सुनकर पंडित बोले, ‘मुझे पहले ये बताओ कि मैं तुमसे सरल प्रश्न पूछूं या फिर कठिन प्रश्न?’
बीरबल ने सोचा कि महाराज तो थक चुके हैं और विश्राम के लिए जा चुके हैं, सो प्रश्न का जवाब देने का यह सही समय नहीं है। बीरबल ने कहा, ‘पंडित जी, आप सिर्फ एक कठिन प्रश्न पूछिए।’ पंडित ने कहा, ‘बीरबल, बताओ पहले क्या आता है, मुर्गी या अंडा?’ बीरबल ने तुरंत जवाब दिया, ‘मुर्गी, पंडित जी।’ ‘तुम कैसे कह सकते हो बीरबल?’ जवाब सुनकर पंडित जी ने कहा। ‘ओह, और प्रश्न नहीं पंडित जी, आपने वादा किया था कि केवल एक प्रश्न ही पूछेंगे। जो आप पूछ चुके हैं’, बीरबल ने कहा। पंडित जी बीरबल की चालाकी समझ चुके थे और बिना कुछ कहे वहां से चले गए। इसी तरह एक दिन बादशाह ने बीरबल से कहा, ‘बीरबल, क्या तुम जानते हो कि एक मूर्ख और ज्ञानी व्यक्ति में क्या अंतर है?’ ‘जी महाराज, मैं जानता हूं।’ बीरबल ने कहा। ‘क्या तुम विस्तार से बता सकते हो?’ अकबर ने पूछा। ‘महाराज, वह व्यक्ति जो अपनी बुद्धि का प्रयोग मुश्किल, चुनौतीपूर्ण तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में अपना नियंत्रण खोए बिना करता है, वह ज्ञानी होता है। परन्तु वह व्यक्ति जो प्रतिकूल परिस्थितियों को इस प्रकार सुलझाता है कि वे और प्रतिकूल हो जाती हैं, मूर्ख कहलाता है।’ बादशाह अकबर ने सोचा कि बीरबल कहना चाहता है कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति ही ज्ञानी होता है, क्योंकि उसे पता होता है कि कब किस समस्या का समाधान कैसे करना है।’ बीरबल के चतुर जवाब से बादशाह के दिल में उसका स्थान और पक्का हो गया।