Monday, 30 September 2013

ऑस्टेलिया के खिलाफ वनडे टीम का ऐलान, युवराज सिंह की वापसी

क्रिकेटर युवराज सिंह
क्रिकेटर युवराज सिंह

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम इंडिया का ऐलान कर दिया गया है. वेस्टइंडीज ए के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करने वाले युवराज सिंह की टीम में वापसी हुई है. आज चेन्नई में बीसीसीआई चयनकर्ताओं की बैठक हुई. इस दौरान एकमात्र टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के अलावा पहले तीन वनडे मैचों के लिये टीम का चयन किया गया.
चैंपियंस ट्रॉफी और वेस्टइंडीज सीरीज में शानदार जीत हासिल करने वाली टीम इंडिया में ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है. सिर्फ युवराज सिंह की टीम में वापसी हुई पर जहीर खान, वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर जैसे सीनियर खिलाड़ी एक बार फिर चयनकर्ताओं पर छाप छोड़ने में नाकाम रहे.
चुनी हुई टीम इस प्रकार हैः महेंद्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली, युवराज सिंह, सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा, आर अश्विन, अमित मिश्रा, इशांत शर्मा, भुवनेश्वर कुमार, आर विनय कुमार, जयदेव उनादकट, शमी अहमद और अंबाती रायडू.

चारा घोटाला मामला: पूरी कहानी, अब जानिए तारीखों की जुबानी

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्र को आज बहुचर्चित चारा घोटाले से जुड़े सबसे बड़े मामले में दोषी करार दिया गया। 
    
यादव के खिलाफ चारा घोटाले में पांच मामले केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने दर्ज कराये थे। इनमें से यह पहला मामला आर.सी.20 ए 96 है, जिसमें यादव को दोषी करार दिया गया है। यादव के विरुद्ध चारा घोटाले में चार अन्य मामले आर.सी.38 ए 96, आर.सी.42 ए 96, आर.सी.47 ए 96 और आर.सी.64 ए 96 अदालत में लंबित है।
चारा घोटाले से ही जुड़े आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में भी सीबीआई ने यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को आरोपी बनाया था, लेकिन इस मामले में निचली अदालत ने उन्हें आरोप मुक्त कर दिया है।   सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को आज जेल ले जाया गया। लालू (65) को यहां की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल ले जाया गया।
  
मामले में आठ लोगों को आज ही तीन-तीन साल कैद की सजा सुना दी गई, जबकि लालू, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र तथा अन्य को अदालत 3 अक्टूबर को सजा सुनाएगी।
  
अदालत से बाहर आते हुए लालू शांत नजर आ रहे थे। उन्होंने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया और अपनी कार से रांची के बाहरी इलाके में तथा राष्ट्रीय खेलगांव के नजदीक स्थित जेल चले गए।
  
प्रवास कुमार सिंह की अदालत ने लालू के अतिरिक्त मिश्र, छह राजनीतिज्ञों और चार आईएएस अधिकारियों सहित 44 अन्य को चाईबासा कोषागार से फर्जी तरीके से 37.7 करोड़ रुपये निकालने के मामले में दोषी ठहराया।
  
आज जिन आठ लोगों को सजा सुनाई गई, उनमें आईएएस अधिकारी क़े अरमुगम, पूर्व पशु पालन विभाग और श्रम मंत्री विद्या सागर निषाद तथा पूर्व विधायक ध्रुव भगत और पांच चारा आपूर्तिकर्ता शामिल हैं।
  
इसके पूर्व सफेद एंबेसडर कार से अदालत पहुंचे लालू सहज नजर आए और पार्टी समर्थकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। जब न्यायाधीश ने उनके खिलाफ फैसला पढ़ना शुरू किया, तो लालू अदालत कक्ष में दूसरी पंक्ति में बैठे थे।

      
...चारा घोटाले की पूरी कहानी, तारीखों की जुबानी
     
27 जनवरी 1996: चाइबासा के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे ने पहली बार इसका रहस्योद्घाटन किया।
    
11 मार्च: पटना उच्च न्यायालय ने सीबीआई को चार माह के अन्दर पशुपालन घोटाले की जांच करने का निर्देश दिया। 
    
19 मार्च: उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ को सीबीआई द्वारा घोटाले की जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया। सीबीआई की जांच शुरू हुई। 
   
छह जनवरी 1997: सीबीआई ने मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से पहली बार साढ़े छह घंटे तक पूछताछ की।
   
27 अप्रैल: सीबीआई के निदेशक जोगिन्दर सिंह ने लालू प्रसाद यादव समेत 56 लोगों के खिलाफ अभियोग पत्र दाखिल करने की घोषणा की।
   
10 मई: सीबीआई ने राज्यपाल ए आर किदवई से मुख्यमंत्री समेत 56 लोगों के खिलाफ अभियोग पत्र दाखिल करने की अनुमति मांगी।
  
17 जून: राज्यपाल ए आर किदवई ने सीबीआई को नियमित कांड संख्या 20 ए 96 में मुख्यमंत्री समेत 54 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति दी।  23 जून: सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव समेत 56 लोगों के खिलाफ विशेष न्यायालय मे अभियोग पत्र दाखिल किया। 
   
24 जुलाई: पटना उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी। सीबीआई की विशेष  अदालत ने लालू प्रसाद यादव समेत 56 लोगों के विरुद्ध लगाये गये आरोपों को संज्ञेय मान लिया।
   
25 जुलाई: विशेष न्यायाधीश एस के लाल ने लालू प्रसाद यादव तथा अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी  किया। यादव ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी पत्नी राबडी देवी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लालू प्रसाद यादव ने पटना उच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की। उच्चतम  न्यायालय ने 29 जुलाई तक उन्हें गिरफ्तार नही करने का अंतरिम आदेश दिया।
   
29 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।
   
30 जुलाई: लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया।
 
30 अगस्त: केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने राज्यपाल से लालू प्रसाद यादव समेत 34 लोगों के खिलाफ 64 ए 96 में आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति मांगी।
   
28 अक्टूबर: सीबीआई ने 64 ए 96 में राज्यपाल की अनुमति के बगैर 34 लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। 
  
29 अक्टूबर: विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव को 90 दिनों के अंदर आरोप पत्र दाखिल नहीं किये जाने के आधार पर 38 ए 96 और 42 ए 96 में जमानत दे दी।
  
28 नवम्बर: पटना उच्च न्यायालय ने यादव को 64 ए 96 में हिरासत में रखे जाने को अवैध ठहराया। 
  
11 दिसम्बर: राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के नियमित मामले 20 ए 96 में 134 दिनों तक जेल मे रहने के बाद रिहा हुये।
  
12 मई 1998: राज्यपाल एसएस भंडारी ने चारा घोटाले के षडयंत्र पक्ष से जुड़े नियमित मामले 64 ए 96 में लालू प्रसाद यादव समेत 34 लोगों के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी।
   
दो जुलाई: सीबीआई की विशेष अदालत ने आर सी 64 ए 96 में 34 लोगों के विरुद्ध लगाये गये आरोपों को संज्ञेय माना और लालू प्रसाद यादव को 27 जुलाई से पूर्व आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।
    
24 जुलाई: पटना उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव समेत अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को बहाल रखा, लेकिन आत्मसमर्पण की अवधि को बढ़ाया।
   
19 अगस्त: सीबीआई ने यादव पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में 5 ए 98 प्राथमिकी दर्ज करायी।
  
21 अगस्त: सीबीआई ने मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास समेत उनके रिश्तेदारों के विभिन्न ठिकानों पर छापा मारा।
  
21 अक्टूबर: सीबीआई ने यादव से अपने कार्यालय में 5 ए 98 के सिलसिले में पूछताछ की। 28 अक्टूबर: लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र समेत छह अभियुक्तों ने विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।    30 अक्टूबर: विशेष न्यायालय ने 64 ए 96 में लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका खारिज की।   10 नवम्बर: पटना उच्च न्यायालय ने 64 ए 96 में लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका खारिज की।   आठ जनवरी 1999: लालू प्रसाद यादव 73 दिनों के बाद जेल से रिहा हुये।   20 और 27 मई: बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से उनके पति और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के खिलाफ दायर आय से अधिक संपत्ति रखने के नियमित मामले 5 ए/98 में केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने उनके सरकारी आवास में पूछताछ की।
  
आठ अक्तूबर: केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने चारा घोटाले के नियमित मामले 38 ए 96 में राज्यपाल सूरज भान से अनुमति मांगी। तीन नवम्बर: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र तथा राज्य के तीन पूर्व मंत्रियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ 38 ए/96 में राज्यपाल सूरज भान ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी। 
    
आठ मार्च 2000: केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने राज्यपाल विनोद चन्द्र पाण्डेय से 5 ए 98 में यादव के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी।
  
11 मार्च: राज्यपाल ने ब्यूरो को यादव के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति दी। 
   
चार अप्रैल: सीबीआई ने 5 ए 98 में यादव और मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। विशेष अदालत ने आरोपों पर संज्ञान लेते हुए दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया।
     
पांच अप्रैल: यादव और राबड़ी देवी ने 5 ए 98 में सीबीआई की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया। न्यायाधीश ने यादव को जेल भेजा, जबकि राबड़ी देवी को जमानत पर रिहा किया।
     
11 मई: यादव को तीन माह के औपबंधिक जमानत पर केन्द्रीय आदर्श कारा बेउर से रिहा किया गया।
      
28 नवम्बर: आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के नियमित मामले 5 ए 98 में जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद ब्यूरो की विशेष अदालत ने न्यायिक हिरासत में केन्द्रीय आदर्श कारा बेऊर भेज दिया।
     
29 नवम्बर: यादव को जमानत पर रिहा किया गया।
     
28 मार्च 2001: पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र समेत 179 लोगों के खिलाफ चारा घोटाले के नियमित मामले 47 ए 96 में मुकदमा चलाने के लिए राज्यपाल ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को अनुमति दी।
     
आठ मई: केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने 47 ए 96 में ब्यूरो की विशेष अदालत में यादव समेत 110 अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया। इसी दिन न्यायाधीश ने इस आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए अभियुक्तों के विरुद्ध वारंट भी जारी कर दिया। 
     
12 मई: उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव और जनन्नाथ मिश्र समेत 70 अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए रांची की एक विशेष अदालत द्वारा जारी वारंट पर रोक लगायी।
      
पांच नवम्बर: उच्चतम न्यायालय ने यादव को रांची की विशेष अदालत में 26 नवम्बर तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। 26 नवम्बर: यादव ने रांची की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया। चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गये।
      
23 जनवरी 2002: यादव 59 दिनों के बाद जेल से रिहा हुए।
       
18 दिसम्बर 2006: आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले 5 ए 98 में सीबीआई की विशेष अदालत ने यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को आरोप मुक्त किया।
       
16 फरवरी: सीबीआई ने इस मामले में विशेष अदालत केफैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर नही की, तब बिहार सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में अपील दायर की।
       
20 मार्च 2008: पटना उच्च न्यायालय ने बिहार सरकार की अर्जी स्वीकार की और सुनवाई के योग्य बताया। इस फैसले के खिलाफ लालू प्रसाद यादव ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दायर की।
      
एक अप्रैल 2010: उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि बिहार सरकार को अपील दायर करने का अधिकार नही है। सीबीआई ने इस मामले में विशेष अदालत के फैसले को उपरी अदालत में चुनौती नही दी।
     
एक मार्च 2012: लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र समेत 31 लोगों के खिलाफ आर सी 63 ए 96 में सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोप गठित किया।  
     
13 अगस्त 2013: उच्चतम न्यायालय ने आर सी 20 ए 96 में सीबीआई के न्यायाधीश को बदलने की लालू प्रसाद यादव की अर्जी को नामंजूर किया।

Sunday, 29 September 2013

लालू के भाग्य का फैसला सोमवार को होगा

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चारा घोटाले के एक मामले में यहां की एक अदालत सोमवार को अपना फैसला सुना एगी। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद आरोपी हैं। संयुक्त बिहार में पशुपालन विभाग में हुए करोड़ों रुपये के चारा घोटाला मामले में आरोपी लालू प्रसाद, जगन्नाथ मिश्रा बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इन दोनों के अलावा इस विभाग के मंत्री, दो आईएएस अधिकारी और अन्य कई लोग शामिल हैं। सभी पर झारखंड के चाइबासा जिले के कोषागार से 37.70 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी करने का आरोप है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश पीके सिंह घोटाले से संबंधित मामला संख्या आरसी 20 ए/96 में अपना फैसला सुनाएंगे। लालू प्रसाद के वकील ने 17 सितंबर को अपनी दलील पूरी की। यह फैसला लालू प्रसाद के लिए अहम है क्योंकि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के कारण मामले में दोषी ठहराए जाने पर उनकी संसद सदस्यता खतरे में पड़ जाएगी। सरकार ने ऐसे जनप्रतिनिधियों को अपील में जाने तक मिल रहे संरक्षण को शीर्ष अदालत द्वारा अवैध करार दिए जाने को निष्प्रभावी करने के लिए अध्यादेश लाया था, लेकिन इस पर विवाद मचने के बाद उसका अस्तित्व में आना संदिग्ध हो गया है। मामले में 56 लोग आरोपी बनाए गए थे। सुनवाई के दौरान सात आरोपियों की मौत हो गई, दो वायदा माफ गवाह बन गए और एक ने आरोप स्वीकार कर लिया और एक को आरोप मुक्त करार दिया गया। न्यायाधीश पीके सिंह ने फैसला सुनाने के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की थी और मामले में बचे खुचे 45 आरोपियों को अदालत में हाजिर रहने के लिए कहा था। इस घोटाले में आरोपी बनने के बाद लालू प्रसाद को 1997 में मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। यह घोटाला 1996 में सामने आया था। घोटाले से संबंधित 61 में से 54 मामले वर्ष 2000 में पृथक राज्य के रूप में गठित होने के बाद झारखंड स्थानांतरित कर दिए गए। सीबीआई की विभिन्न अदालतें 43 मामलों में अपना फैसला सुना चुकी हैं। लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र पांच मामलों में आरोपी हैं।

प्रेम वत्स बुरे वक्त में करते हैं रणनीतिक निवेश

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ब्लैकबेरी को खरीदने के लिए 4.7 अरब डॉलर की बोली लगाने के बाद सुर्खियों में आए भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक प्रेम वत्स की यह निवेश रणनीति है कि वह किसी उद्यम में तब निवेश कर ते हैं, जब उसका सितारा गर्दिश में चल रहा होता है।
हैदराबाद में जन्मे और कनाडा के वारेन बफेट कहलाने वाले 61 वर्षीय प्रेम वत्स की बीमा कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल ने ब्लैक बेरी को खरीदने के लिए प्रति शेयर लगभग नौ डॉलर की बोली लगाई है। सोमवार 23 सितंबर (अमेरिकी समय) को इस बोली की घोषणा होने के बाद कंपनी के शेयर कारोबारी सत्र समाप्त होते वक्त अमेरिकी शेयर बाजार नैसडैक में 1.09 फीसदी तेजी के साथ 8.82 डॉलर पर पहुंच गए थे। इससे पहले शुक्रवार को कंपनी के शेयरों में 17.06 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी और घोषणा के बाद मंगलवार से भी कंपनी के शेयरों में निरंतर गिरावट जारी है। मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ब्लैकबेरी में क्रमश: 3.29 फीसदी, 6.15 फीसदी और 0.69 फीसदी गिरावट देखी गई। गुरुवार को कंपनी के शेयर 7.95 डॉलर पर बंद हुए। 20 जुलाई 2007 को ब्लैकबेरी के शेयर 230.52 डॉलर पर कारोबार कर रहे थे। उसके बाद से इसके शेयरों में निरंतर गिरावट जारी है। ब्लैकबेरी अपनी समकक्ष कंपनियों से प्रतियोगिता में काफी पिछड़ चुकी है। शेयरों की चाल से ऐसा लगता है कि कंपनी को खरीदने के लिए प्रेम वत्स की प्रतियोगिता में कोई सामने नहीं आया है और इससे यह समझा जा सकता है कि ब्लैकबेरी निवेशकों के लिए कोई आकर्षक सौदा नहीं है, लेकिन हैदराबाद में जन्मे और कनाडा के धनकुबेर बन बैठे प्रेम वत्स की यही निवेश रणनीति है। वह हमेशा किसी उद्यम में ऐसे वक्त में निवेश करते हैं, जब उसका सबसे बुरा वक्त चल रहा होता है। टोरंटो की कंपनी फेयरफैक्स के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वत्स ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से 1971 में केमिकल इंजीनियरिंग में प्रशिक्षण पूरा किया था और एमबीए की डिग्री लेने 1972 में कनाडा चले आए थे। उन्होंने वेस्टर्न ओंटारियो विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री ली। उन्होंने कनफेडरेशन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में 1974 से 1983 तक कनफेडरेशन लाइफ इनवेस्टमेंट काउंसेल के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया। उन्होंने 1984 में हैंबलिन वत्स इनवेस्टमेंट काउंसेल लिमिटेड की स्थापना की, जो अब फेयरफैस की अधिनस्थ कंपनी है। वत्स ने 1987 में मार्केल फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया और इसे फेयरफैक्स का नया नाम दिया। प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी वेबसाइट 'वर्ज' के मुताबिक, 'वत्स का हालांकि बुरे दौर में निवेश करने का इतिहास है, फिर भी उन्होंने कभी इस स्तर का सौदा नहीं किया है और कभी ऐसा सौदा नहीं किया है, जिसके बाद उनकी कंपनी इतनी बड़ी संचालन भूमिका में आ जाएगी। वत्स हालांकि पहले से ब्लैकबेरी में करीब 10 फीसदी के हिस्सेदार थे और 2012 के शुरू में वह ब्लैकबेरी के बोर्ड में भी शामिल थे, लेकिन कंपनी को खरीदने का विचार आने पर हितों के टकराव के आरोप से बचने के लिए उन्होंने अगस्त के मध्य में बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। वर्ज के मुताबिक ब्लैकबेरी को बुरे दौर से बाहर लाने के लिए वत्स को बड़े कदम उठाने होंगे। संभवत: कंपनी का एक बड़ा हिस्सा बेचना पड़े और शायद उपभोक्ता फोन कारोबार को पूरी तरह से बंद करना पड़े।

MOVIE REVIEW : फटा पोस्टर निकला हीरो

फटा पोस्टर निकला हीरो कहानी है विश्वास (शाहिद कपूर) की। विश्वास छोटे शहर में बड़ा हुआ है और उसके सपने बड़े हैं। विश्वास हीरो बनना चाहता है, लेकिन उसकी मां सावित्री (पद्मिनी कोल्हापुरे) चाहती है कि उसका बेटा पुलिस ऑफिसर बने। विश्वास को पुलिस फोर्स में भर्ती होने के लिए मुंबई जाना पड़ता है। वह खुश हो जाता है कि इंटरव्यू की आड़ में वह हीरो बनने का सपना भी पूरा कर लेगा। फिल्मों के लिए कहानी लिखने वाले एक स्ट्रगलर जोगी (संजय मिश्र) की मदद से विश्वास को एक फिल्म में छोटा-सा रोल भी मिल जाता है।

इसके पहले कि विश्वास का सपना पूरा हो, काजल (इलियाना डी’क्रूज) उसकी जिंदगी में आ जाती है। काजल के कारण विश्वास का सपना तो पूरा नहीं हो पाता, लेकिन वह अपने आपको ऐसे गैंगस्टर के गैंग में पाता है, जो मुंबई को बरबाद कर देना चाहता है। अनचाहे ही विश्वास राव  को लोग पुलिस इंस्पेक्टर समझना शुरू कर देते हैं। विश्वास किसी भी तरह से हीरो बनना चाहता है और इसके लिए उसे मजबूरी में कई झूठ भी बोलने पड़ते हैं। और इसी के चलते फिल्म कॉमेडी से सीरियस मोड में चली जाती है। कई हिस्सों में फिल्म में बेवजह ज्यादा नाटकीयता भरी गयी है। फिल्म में कई ऐसे सीन हैं, जो अस्सी के दशक की फिल्मों में अकसर देखने को मिलते थे, जैसे कि बच्चाे के बचपन में ही बाप का गुम हो जाना और अचानक उसकी जवानी में बहुत बड़ा डॉन बनकर वापस आ जाना।

‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ फिल्म को लेकर शाहिद को अपने करियर में सहारा मिलने की आस है, जिसके लिए उन्होंने जी-तोड़ मेहनत भी की है और उनकी एक्टिंग और कॉमेडी ही है, जो फिल्म के इंटरवल से पहले आपको हंसाएगी। शाहिद ने अपने रोल के साथ पूरी मेहनत की है, जो पर्दे पर यकीनन आपको दिखायी देगी। मां के नाम पर बदतमीजी से  कॉमेडी से अचानक सीरियस रोल में घुसना आपको तालियां बजाने पर मजबूर कर सकता है।

वहीं ‘बर्फी’ के बाद दूसरी फिल्म कर रहीं इलियाना डी’क्रूज एक्टिंग  के स्तर पर कोई खास प्रभाव नहीं डाल पायी हैं। अगर आपने ‘बर्फी’ देखी है तो इलियाना से कुछ उम्मीदें भी हो सकती हैं, लेकिन कॉमेडी रोल में इलियाना इस फिल्म में कहीं से भी फिट नहीं बैठी हैं। वैसे  तो उनके लिए फिल्म में कुछ करने को नहीं था, लेकिन जहां चांस मिला भी, वहां वह ओवर एक्टिंग करती दिखायी दे रही हैं। फिल्म के एकाध गानों में इलियाना को बतौर ग्लैमर गर्ल देखकर हो सकता है उनके दीवानों को थोड़ा अच्छा लगे। वैसे फिल्म में आइटम नंबर करने वाली नरगिस फाखरी का डांस आपके लिए रिफ्रेशमेंट का काम करेगा, तो वहीं फिल्म में गेस्ट भूमिका में सलमान खान का आना भी रोचक है।

काफी वक्त बाद बड़े पर्दे पर नजर आ रहीं पद्मिनी कोल्हापुरे मां का किरदार निभाने में कड़ी मशक्कत करती नजर आती हैं। फिर भी कहीं-कहीं फिल्म के कॉमेडी सीन में उनकी डायलॉग डिलीवरी हंसाती है। गीत-संगीत के मामले में भी फिल्म का  एक गाना ‘तू मेरे अगल-बगल है..’ आपको हॉल से निकलने के बाद भी याद रहेगा। इस गाने में शाहिद ने‘डांस इंडिया डांस’ के कई बेहतरीन डांसरों को भी पीछे छोड़ दिया है। फिल्म से शाहिद को उम्मीदें है, तो यह फिल्म उनके चाहने वालों को भी निराश नहीं करेगी, लेकिन अगर फुल टाइम एंज्वाय करने का मन है तो ये फिल्म आपको निराश कर सकती है।

निर्देशक राजकुमार संतोषी जो ‘अंदाज अपना-अपना’ और ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ जैसी बेहतरीन कॉमेडी फिल्में दर्शकों के सामने ला चुके हैं, वो इस फिल्म के इंटरवल के बाद शायद भूल गए कि वो कॉमेडी फिल्म बना रहे हैं और रह-रहकर अनायास बीच-बीच में कॉमेडी का तड़का लगाने की असफल कोशिश की है। महज राजकुमार संतोषी के नाम पर फिल्म देखने वालों को ये उनके औसत से कम दर्जे
की लगेगी।

यूं तो फिल्म के आखिर में शाहिद यह कह कर  कि ‘मैंने इस फिल्म में सब कुछ कर लिया, सच्च बेटा बन गया, बाप से फाइटिंग कर ली, रोमांस कर लिया, गैंग को पकड़वा दिया, तो अब मैं पोस्टर हीरो नहीं बनना चाहता, क्योंकि अब मैं रीयल लाइफ हीरो बन गया हूं’ फिल्म को बैलेंस बताने कि कोशिश करते नजर आते हैं। कॉमेडी जगत के मशहूर सितारे संजय मिश्र ने छोटे रोल में भी अच्छी कॉमेडी और एक्टिंग की है।
अगर आप टाइम पास मूवी देखना चाहते हैं तो ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ देखने जा सकते हैं, नहीं तो बाहर आकर यही कहेंगे कि खोदा पहाड़ और निकली..


सितारे : शाहिद कपूर, इलियाना डी’क्रूज, पद्मिनी कोल्हापुरे, दर्शन जरीवाला, नरगिस फाखरी (आइटम नंबर), निर्देशक : राजकुमार संतोषी, निर्माता : रमेश एस. तौरानी, संगीत : प्रीतम चक्रवर्ती

MOVIE REVIEW : दी लंचबॉक्स

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कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिन्हें बस देखते रहो। बार-बार देखो। कहीं से भी, किसी भी हिस्से से देख लो, अच्छी ही लगती हैं। निर्देशक रितेश बत्र की फिल्म ‘दि लंचबॉक्स’ भी उन्हीं में से एक है। दिल करता है कि ये फिल्म कभी खत्म ही न हो। फिल्म के दो मुख्य पात्र साजन फर्नाडीस (इरफान खान) और इला (निमरत कौर) के बीच अनदेखा-अनजाना सा रोमांस बस यूं ही चलता रहे। इला, फर्नाडीस को गलती से यूं ही लजीज खाना बना-बनाकर भेजती रहे और फर्नाडीस उस लजीज खाने को पसंद करते हुए भी अपनी रूखी-सूखी प्रतिक्रियाएं देता रहे।

साजन और इला का एक लाइन वाले कागज के पन्नों पर चिट्ठियों की शक्ल में पनपा ये रोमांस किसी लजीज पकवान की तरह बेहद धीमी आंच पर पका लगता है। इस रोमांस में गिले-शिकवे और रूठने-मनाने के मसाले तो हैं, लेकिन ऐसे नहीं जो जुबान पर हमला करें। न तीखे मसालों जैसे संवाद हैं और न ही आंखों में पानी ला देने वाला धुंआ छोड़ता तेज तड़का। फिर भी ये रोमांस महज पौने दो घंटे की फिल्म में बांधे रखता है। डर लगता है कि अगर आप कहीं उठकर गये तो कोई आपकी मनपसंद डिश पर झपट्टा न मारे ले।

यह कहानी है एक बच्चे की मां इला और रिटायर हो रहे एक विधुर साजन फर्नाडीस की। इला अच्छी-खासी दिखती है। घर के कामकाज में उलझी रहती है, तो बनने-संवरने का समय नहीं मिलता। शाम को पति जब घर आता है तो वो बन संवर जाती है। फिर भी पति महाशय की नजर उस पर नहीं पड़ती। एक दिन इला के पति का लंचबॉक्स गलती से फर्नाडीस के पास पहुंच जाता है। रेडियो से नई-नई  रेसिपी बनाकर अपने पति का मूड बदलने की कोशिश कर रही इला की जिंदगी बस यहीं से यू-टर्न ले लेती है।
वैसे इन रेसिपीज में उसकी एक आंटी के अनुभव का छौंक न लगे तब तक मजा नहीं आता। ये एक दिलचस्प संयोग है कि एक दूसरे छोर से आंटी की केवल आवाज आती है, वो कभी दिखाई नहीं देती। खैर, उधर गलती से पहुंचे लंचबॉक्स से मिस्टर फर्नाडीस की पौने बारह हो गयी है। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उन्हें इतना स्वादिष्ट खाना भी नसीब हो सकता है। अब किसकी गलती से किसके पास ये लंचबॉक्स पहुंचा, ये परदे पर देखने वाली चीज है। लेकिन जल्द ही इस बात का खुलासा भी हो जाता है कि ये सब इला और फर्नाडीस की मर्जी से हो रहा है। लंचबॉक्स के जरिये इला फर्नाडीस को मिलने वाली चिट्ठियों पर ब्रेक लगाती है और एक दिन फर्नाडीस से मिलने का प्रोग्राम बनाती है। फर्नाडीस साहब भी शेव वगैरह करके पूरी तैयारी के साथ ऑफिस जाते हैं, लेकिन  इससे आगे कुछ भी कहना इस फिल्म के साथ बेमानी होगी। बाकी आप परदे पर देखें। हां, इला और फर्नाडीस के इस रोमांस के बीच शेख (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) नामक सलाद भी है, जो कभी-कभी  लंचबॉक्स के साथ आता-जाता रहता है।

खान-पान के पारखी लिखते रहे हैं कि किसी भी स्वादिष्ट व्यंजन का पहला काम है अपनी लुक से खाने वाले का दिल जीतना। वो काम इस फिल्म में बखूबी दिखता है। जी हां, पर्दे पर जो भी खाना लंचबॉक्स में पैक किया गया है, उसे देख मुंह में पानी आ जाता है और ये कमाल है उस फूड स्टाइलिस्ट का, जिसने पूरी फिल्म में लंचबॉक्स को स्वादिष्ट व्यंजनों से सजाया है। रितेश बत्र का निर्देशन बेहद सधा हुआ है और इरफान एवं नवाजुद्दीन जैसे अनुभवी कलाकारों संग निमरत कौर जैसी नई तारिका के साथ उन्होंने परंपरागत ढांचे से निकल रोमांस का जो खाका बुना है, वो काबिलेतारीफ है। ऐसी कहानियां लोग कम पचा पाते हैं, जिसमें दो मुख्य पात्रों के बीच रोमांस तो है, लेकिन वो कभी एक दूजे से मिल नहीं पाए। जिन लोगों ने बहुत दिनों से कोई नई डिश नहीं चखी है, वो इस लंचबॉक्स का लुत्फ जरूर उठाएं। सितारे : इरफान खान, निमरत कौर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, लिलिट दुबे
निर्देशक, लेखक-पटकथा : रितेश बत्र
निर्माता : गुनीत मोंगा, अनुराग कश्यप, अरुण रंगाचारी
बैनर : यूटीवी मोशन पिक्चर्स, धर्मा प्रोडक्शंस़, डार मोश पिक्चर्स, सिख्या एंटरटेनमेंट

FILM REVIEW : वॉर्निंग

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एक अच्छी कोशिश दर्शकों के लिए कुछ नया बनाने की, लेकिन परिणाम में असफल। जी हां, अगर आप इस हफ्ते रिलीज हुई फिल्म वॉर्निंग देखने जा रहे हैं तो उसका लब्बो-लुआब यही निकलेगा। फिल्म का निर्माण थ्रिलर श्रेणी में हुआ है। आपको इसके पोस्टर से भी कुछ ऐसा ही एहसास होगा । लेकिन थ्रिलर फिल्म का टारगेट करके फिल्म देखने जा रहे हैं तो सिनेमाहॉल में मायूसी हाथ लग सकती है। यूं तो इस फिल्म की महत्ता भारतीय सिने जगत के लिए अहमियत रखती है। दरअसल फिल्म बॉलीवुड के लिए इस मायने में खास है क्योंकि यह भारत की पहली अंडर वॉटर थ्री डी फिल्म है।

फिल्म की शुरूआत पांच दोस्तों के स्कूल पूरा करने के बाद की पार्टी से होती है। जिसमें सभी आपसी रजामंदी से पांच साल बाद मिलने की बात तय करते हैं। सभी इन पांच सालों में अपने अलग-अलग करियर को चुन लेते हैं। और जब पांच साल बाद वो सभी एक वॉटर एडवेंचर टूर के लिए फिजी में मिलते हैं तभी से शुरू होती है फिल्म की असली कहानी। पांचों दोस्तों में से एक तरन (संतोष बारमोला) ने सबको अपने साथ एक याट पर चलने के लिए राजी कर लिया। इस टूर में साबरी (मंजरी फड़नीस) अपने पति और छोटी बच्ची के साथ याट पर सवार होती है तो वहीं तरन अपनी विदेशी गर्लफ्रेंड के साथ। तरन और साबरी स्कूल टाइम में एक-दूसरे को चाहते थे लेकिन किन्हीं कारणों से साबरी ने शादी कर ली। जिसको लेकर तरन खुश नहीं दिखता। याट को बीच समुद्र में रोककर सभी एक-एककर पानी में स्विमिंग के लिए उतरते हैं लेकिन अनचाहे ही तरन नीचे उतरते हुए याट की सीढ़ी वाली बटन पर हाथ रख देता है जिससे कि पानी से याट पर जाने के रास्ते बंद हो जाते हैं।

जब उन सबको एहसास होता है कि वो अचानक ही एक कभी न खत्म होने वाली मुसीबत में फंस गए हैं तो उन सबमें आपस में ही झगड़ा शुरू हो जाता है। इन्हीं सब के बीच पानी में एक हलचल से सब हिल जाते हैं। तरन की गर्लफ्रेंड (सुजाना) को लगता है कि उसे कुछ छूकर पानी के अंदर गया है। तरन पानी के अंदर जाकर देखता है तो पता चलता है कि एक शॉर्क मछली है जो उन लोगों के इर्द-गिर्द मंडरा रही है। लेकिन वो पानी से बाहर आकर किसी को इस बात की जानकारी नहीं देता कि यहां शॉर्क मछली है। साबरी और दीपक (जितिन गुलाटी)  की छोटी बच्ची याट पर ही है जिसके रोने कि आवाज उन लोगों को परेशान कर देती है और किसी अनहोनी कि आशंका सबके चेहरों पर साफ झलकती है। याट पर चढ़ने में बार-बार मिल रही असफलता उन सबके बीच में छोटी-छोटी बात पर लड़ाई की वजह बनती है। इसी बीच सुजाना कि अचानक ही पानी में मौत हो जाती है। इसी सबके बीच एक आशा कि किरण बन कर आयी दूसरी याट भी उन सबको पार करके निकल जाती है। और इस संघर्ष में ग्रुप के सबसे कॉमेडी मैन को भी हिम्मत हार कर जान गंवानी पड़ी।

तरन की कोशिश से साबरी और उसका पति याट पर चढ़ने में कामयाब हो जाते हैं लेकिन तरन को शॉर्क अपना शिकार बना लेती है। फिल्म में लगभग सभी किरदार नए हैं और इन सभी का चयन ऑडिशन के जरिए किया गया है। लेकिन सिर्फ मंजरी फड़नीस हैं जिनकी एक्टिंग इस थ्रिलिंग मूवी के हिसाब से थोड़ी ठीक-ठाक लगती है। लेकिन हाल ही में आयी सुपरहिट फिल्म ग्रैंड मस्ती कि सफलता के बाद इस फिल्म से उनकी उम्मीद हवा हो सकती है। बाकी के सभी युवा कलाकारों कि एक्टिंग फिल्म से पहले अपनी तैयारी में कमी साफ झलकती है। डायरेक्टर गुरमीत सिंह अभी ऐसी कहानी पर फिल्म बनाने में कमजोर नजर आते हैं जिसमें टेक्नोलॉजी कि महत्ता बाकी चीजों के मुकाबले ज्यादा हो। शार्क मछली का आना और कलाकारों का घबराना कहीं से भी थ्रिलर मूवी का अहसास नहीं कराता न ही घनघोर बारिश में फंसे याट और उसके लोगों का डरना। वहीं जो बात फिल्म से निकलने के बाद लोगों को एक बार सोचने के लिए बाध्य करेगी वह यह कि याट पर चढ़ने में असफल होने तैर कर समुद्र पार करने के लिए गए सुमित सूरी और मधुरिमा तुली का क्या हुआ?

वास्तव और रा.वन जैसी फिल्मों के निर्माता अनुभव सिन्हा का इस फिल्म का आइडिया कहीं से भी सफल होता नहीं लग रहा। जिसकी सबसे बड़ी कमजोरी है थ्रिलर फिल्म के फिल्मांकन से थ्रिलिंग का अहसास। संगीत के नाम पर जेम्स और अदिति पॉल ने बेबसी गाने को शाहिद के साथ बहुत ही बेहतरीन अंदाज में गाया है। जो फिल्म की थीम को बहुत ही स्पस्ट रूप से दर्शकों के सामने रखने में कारगर है। मीका और सोनू निगम के गाए गाने और उनके बोल भी आपके कानों को सुकून पहुंचाएंगे। तो इस वीकेंड अगर आप कुछ नहीं कर रहे हैं और फिल्म बनाने कि एक अच्छी कोशिश देखने कि इच्छा हिलोरें मार रही हो तो ‘वार्निंग’ फिल्म बेशक देखने जा सकते हैं।

सितारे: संतोष बरमोला, सुजाना रॉड्रिग्स, मंजरी फड़नीस, वरुण शर्मा, जितिन गुलाटी, सुमित सूरी, मधुरिमा तुली,
निर्देशक: गुरमीत सिंह, निर्माता: अनुभव सिन्हा, पराग सांघवी, कहानी/लेखक: गुरमीत सिंह, तेजपाल सिंह रावत