Friday, 11 October 2013

...जानिए क्रिकेट के भगवान की 10 सबसे यादगार पारियां

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भारत में धर्म बन चुके क्रिकेट के भगवान, साथी खिलाड़ियों के पाजी और विपक्षी टीम के लिए मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपनी 24 साल पुरानी क्रिकेट पारी को अलविदा कहने का दिन तय कर दिया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले अपने 200वें टेस्ट के बाद वह क्रिकेट से सं न्यास ले लेंगे।
लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर ने गुरुवार को टेस्ट क्रिकेट से भी संन्यास का ऐलान कर दिया है। उन्होंने बीसीसीआई को एक पत्र लिखकर बताया कि 14 नवंबर को वेस्टइंडीज के साथ अपना 200वां टेस्ट खेलने के बाद वह अपनी 24 साल की ‘टेस्ट पारी’ घोषित कर देंगे। बीसीसीआई सचिव संजय पटेल ने सचिन की ओर से एक बयान जारी किया, जिसमें इस बात का जिक्र है। बीसीसीआई को लिखे एक पत्र में सचिन ने बीसीसीआई को करियर के दौरान समर्थन और अपनी पसंद से सन्यास के लिए समर्थन देने का भी धन्यावाद दिया है। हालांकि लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझने के कारण सचिन तेंदुलकर पर टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का दबाव था। खासकर युवा खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन करके उनपर दबाव बना रहे थे। तेंदुलकर ने संभावना जताई है कि वह अपना अंतिम टेस्ट घरेलू मैदान मुंबई पर खेलेंगे। हालांकि कोलकाता का ईडन गार्डंस भी इस ऐतिहासिक मैच की मेजबानी का प्रबल दावेदार है। बीसीसीआई ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के दो टेस्ट स्थलों की घोषणा नहीं की है। बहरहाल, सचिन के इस फैसले के बाद जहां उनके प्रशंसकों ने अफसोस जताया है, वहीं पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों ने सही समय पर लिया गया निर्णय करार दिया है। क्रिकेट का भगवान...मास्टर ब्लास्टर...छोटा बाबू...नाम अनेक पर शख्स एक। जी, हम बात कर रहे हैं सचिन तेंदुलकर की। आइये आपको बताते हैं चालीस साल के सचिन की दस पारियां, जो क्रिकेट के इतिहास में हमेशा बेमिसाल रहेंगी। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर एक ऐसा मशहूर नाम है, जो आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। 24 अप्रैल, 1973 को मुंबई में जन्मा टीम इंडिया का यह सितारा इस उम्र में भी दनादन रन बरसाने के लिए बेचैन रहता है। क्रिकेट में ऐसा कोई भी बड़ा रिकॉर्ड नहीं है, जिसमें इस महान बल्लेबाज का नाम शामिल न हो। भारत को कई मैचों में जीत दिलाने वाले इस सितारे ने पिछले साल दिसंबर में अचानक ही वनडे क्रिकेट को अलविदा कह दिया, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में इनका जलवा अभी भी बरकरार है। 1. सिडनी टेस्ट
ऑस्ट्रेलिया के महान फिरकी गेंदबाज शेन वार्न के सपने में आकर डराने वाले तेंदुलकर ने उनके पहले ही टेस्ट मैच में भी यादगार पारी खेली। 1991-92 में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच (सिडन) में उन्होंने 148 रनों की नाबाद पारी खेली। इस टेस्ट में 206 रन बनाने वाले रवि शास्त्री के साथ उन्होंने 196 रनों की साझेदारी भी की, जिसके दम पर भारत लगातार दो मैच में मिल रही हार का सिलसिला तोड़ पाया। 2. फरवरी 1990
तेज गेंदबाजों के लिए स्वर्गगाह कहे जाने वाले न्यूजीलैंड में फरवरी, 1990 में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में खेली गई। सीरीज का दूसरा मैच नेपियर में खेला गया और यह मैच बारिश से खासा प्रभावित रहा, जिससे मैच ड्रा हो गया, लेकिन मास्टर ब्लास्टर ने इस मैदान पर 88 रनों की उम्दा पारी खेली। अब तक छह टेस्ट मैच खेल चुके सचिन की यह अर्धशतकीय पारी उस समय तक उनके करियर की सबसे बेहतरीन पारी थी। 3. 1992-93
इंग्लैंड की टीम भारत के दौरे पर आई और उसे सभी तीनों मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा। सीरीज का दूसरा मैच चेन्नई के चेपक मैदान पर खेला गया और इस मैच में सचिन ने पहली पारी में 296 गेंदों में 165 रनों की लाजवाब पारी खेली, जिसके दम पर भारत ने 560 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके बाद भारतीय फिरकी गेंदबाजों ने इंग्लिश बल्लेबाजों को इस कदर नचाया कि दोनों पारियों में वह भारत के बराबर स्कोर नहीं बना सके और मेहमान टीम को पारी और 22 रनों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। 4. 22 अप्रैल, 1998
शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन तेंदुलकर द्वारा बनाए गए 143 रनों को कैसे भुलाया जा सकता है। भारत के सामने उस मुकाबले को जीतने के लिए 285 रनों का लक्ष्य था, जबकि फाइनल में पहुंचने के लिए 254 रन बनाने जरूरी थी। उसी बीच धूल भरी आंधी के कारण खेल को करीब 25 मिनट रोकना पड़ा। उसके बाद लक्ष्य फिर से निर्धारित किया गया। इस बार 46 ओवरों में जीत के लिए 276 रनों का लक्ष्य दिया गया, जबकि फाइनल में पहुंचने के लिए 237 रन निर्धारित किए गए। भारत वह मैच तो नहीं जीत सका, लेकिन सचिन तेंदुलकर द्वारा 131 गेंदों में बनाए गए 143 रनों की बदौलत टीम इंडिया ने 46 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 250 रन बनाए और न्यूजीलैंड को पछाड़कर फाइनल में अपनी जगह पक्की की। 5. 24 अप्रैल, 1998
कोका कोला कप के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सचिन तेंदुलकर द्वारा बनाए 134 रनों का कोई जवाब नहीं। उस यादगार पारी की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 6 विकेट से हराया था। सचिन ने अपनी पारी में 12 चौके और 3 छक्के लगाए थे। ऑस्ट्रेलियाई खिलाडि़यों की नजर में भी यह पारी सचिन की सबसे यादगार पारियों में से एक है। 6. 1 मार्च, 2003
विश्व कप क्रिकेट के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ सचिन तेंदुलकर द्वारा 75 गेंदों में बनाए गए 98 रनों की याद आज भी ताजा है। उस मुकाबले में सचिन शतक से महज 2 रन दूर रह गए, लेकिन शोएब अख्तर की गेंद पर बैकवर्ड प्वाइंट क्षेत्र में लगाया गया शानदार छक्का आज भी क्रिकेट इतिहास के लंबे छक्कों में से एक है। भारत ने 26 गेंद शेष रहते वह मुकाबला 6 विकेट से अपने नाम किया था। 7. जनवरी, 2004
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मुकाबले में सिडनी में सचिन तेंदुलकर द्वारा बनाए गए नाबाद 241 रन उनकी बेहतरीन यादगार पारियों में से एक है। सचिन तेंदुलकर ने 613 मिनट तक 436 गेंदों का सामना कर 33 चौकों की मदद से नाबाद 241 रन बनाए थे। 8. 5 नवंबर, 2009
अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 141 गेंदों में बनाए गए 175 रन यादगार पारियों में से एक है। हालांकि उस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए 351 रनों के लक्ष्य को टीम इंडिया हासिल नहीं कर सकी और महज 3 रन से मैच हार गई, लेकिन सचिन तेंदुलकर की जबरदस्त पारी ने उन्हें मैन ऑफ द मैच का खिताब दिलवाया। सचिन ने उस मैच में 19 चौके और 4 छक्के लगाए थे। 9. 24 फरवरी, 2010
ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सचिन तेंदुलकर ने वो कारनामा किया, जिसका इंतजार विश्व क्रिकेट को जमाने से था। सचिन ने नाबाद 200 रनों की पारी खेली और वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर बने। सचिन ने सिर्फ 147 गेंदों में 25 चौके और 3 छक्कों की मदद से नाबाद 200 रन बनाए। 10. 30 मार्च, 2011
विश्व कप क्रिकेट के सेमीफाइनल मुकाबले में सचिन तेंदुलकर द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ बनाए गए शानदार 85 रनों को कैसे भुलाया जा सकता है। मोहाली में खेले गए उस हाई वोल्टेज मुकाबले में सचिन ने 115 गेंदों में 11 चौकों की मदद से 85 रन बनाए थे, जिसकी बदौलत टीम इंडिया निर्धारित 50 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर 260 रन बना सकी। भारत ने वह मुकाबला 29 रन से जीता और सचिन तेंदुलकर को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

Thursday, 10 October 2013

कोर्ट पर दिखेगा ज्वाला का जलवा, हाईकोर्ट ने दी राहत

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दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरूवार को देश की शीर्ष युगल खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा को बड़ी राहत देते हुए भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) को निर्देश जारी किए कि वह ज्वाला को टूर्नामेंटों में खेलने की अनुमति दे।
          
हालांकि हाईकोर्ट की इस राहत के बावजूद ज्वाला डेनमार्क ओपन में हिस्सा नहीं ले पाएंगी क्योंकि इस टूर्नामेंट से उनका नाम पहले ही वापस लिया जा चुका है। टूर्नामेंट की ड्रॉ लिस्ट में भी ज्वाला का नाम नहीं है। 
          
ज्वाला और उनकी जोड़ीदार अश्विनी पोनप्पा को टूर्नामेंट के पहले राउंड में टॉप सीड चीन की शियोली वांग और यांग यू के खिलाफ खेलना था। लेकिन बाद में चीनी जोड़ी को वॉकओवर दे दिया गया। बाई ने डेनमार्क और फ्रेंच ओपन के लिए भारतीय टीम की घोषणा की जिसमें ज्वाला और अश्विनी के नाम नहीं है।
  
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि ज्वाला को टूर्नामेंटों में खेलने की अनुमति दी जानी चाहिए। विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता ज्वाला ने अनुशासनात्मक समिति के निर्णय के खिलाफ अदालत में अपील की थी।
        
उल्लेखनीय है कि अनुशासनात्मक समिति ने शीर्ष खिलाड़ी पर इंडियन बैडमिंटन लीग (आईबीएल) के दौरान कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने के लिए आजीवन प्रतिबंध की सिफारिश दी है। इसके अलावा उन्हें अगले एक महीने तक किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं है।
        
आईबीएल में कथित तौर पर उनके अनुचित व्यवहार को लेकर बाई की तीन सदस्यीय समिति एक महीने के भीतर मामले पर अपना निर्णय सुनाएगी। समिति का अंतिम निर्णय आने तक ज्वाला को बाई ने किसी टूर्नामेंट के लिए चुनने से इंकार किया है।
        
30 वर्षीय ज्वाला ने अदालत में कहा कि बाई ने उन्हें किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से मना कर दिया है। ज्वाला ने अपनी अपील में बाई के स्वतंत्र तीन सदस्यी पैनल को भी रद्द करने की मांग की है जिसे ज्वाला पर आजीवन प्रतिबंध को लेकर की गई सिफारिश पर निर्णय लेना है।

Thursday, 3 October 2013

विवाहित पुरुषों की आत्महत्या के मामले बढ़े

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भारतीय दंड संहिता की धारा 498अ का विवाहित पुरुषों के खिलाफ दुरुपयोग किए जाने की वजह से भारत में हर नौंवे में मिनट में एक विवाहित पुरुष आत्महत्या करता है। इस संदर्भ में आई रिपोर्ट के अनुसार इन आत्महत्याओं के कारण मरने वालों की संख्या प्रति वर्ष 64 हजार पहुंच गई है।
   
हदय-नेस्ट ऑफ फैमिली हारमोनी नामक गैर सरकारी संगठन के अध्यक्ष डी एस राव संस्था द्वारा किए गए सर्वेक्षण के हवाले से कहते हैं, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े विवाहित महिलाओं की तुलना में विवाहित पुरुषों द्वारा आत्महत्या के ज्यादा मामले दर्शाते हैं। वर्ष 2012 में लगभग 64 हजार विवाहित पुरुषों ने आत्महत्या की थी और इस साल आत्महत्या करने वाली विवाहित महिलाओं की संख्या 32 हजार थी।
   
धारा 498अ के अनुसार यदि किसी महिला का पति या उसका कोई संबंधी उसके साथ निर्मम व्यववहार करता है तो उसे कम से कम तीन साल के लिए कैद की सजा दी जाएगी और उसपर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
   
राव ने कहा कि 498अ के दुरुपयोग की वजह से और पारिवार का सदस्य होने के नाते उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के कारण बूढ़े माता-पिता और पुरुष के अन्य संबंधियों को भी कष्ट झेलना पड़ता है।
  
एनजीओ के एक अधिकारी अमित गुप्ता ने दावा किया, कानून अपने उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पा रहा है और लोगों का एक वर्ग अपना गुस्सा निकालने और उगाही करने के लिए विवाहित पुरुषों व उनके परिवारों के खिलाफ इसका दुरुपयोग करता है।
  
सर्वेक्षण के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इस धारा के अंतर्गत आने वाले मामलों की संख्या पिछले दो साल में 11 प्रतिशत की दर से तेजी से बढ़ी है, लेकिन दोषसिद्धि की दर 6.3 प्रतिशत से गिरकर 4.4 प्रतिशत रह गई।
  
एनजीओ के एक अधिकारी इंद्रानील गुप्ता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ऐसे मामलों की संख्या 1.06 लाख है, जो कि इस धारा के तहत दर्ज कराए जाने वाले मामलों की कुल संख्या के 20 प्रतिशत से ज्यादा है। पिछले साल इन मामलों के तहत 80 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
  
यह एनजीओ विवाहित पुरुषों के अधिकारों के समर्थन में और उनके खिलाफ इस धारा के तहत झूठे मामले दर्ज कराए जाने पर उन्हें मानसिक सहयोग देने के लिए काम करता है। पुलिस का कहना है कि दर्ज कराए गए मामलों को क्षूठा साबित करना बेहद कठिन है।
  
पुलिस सह आयुक्त (अपराध) पल्लब कांती घोष ने बताया, अभी तक हम यह नहीं जान सके हैं कि इन मामलों को कैसे झूठा साबित किया जाए, क्योंकि ये मामले मानसिक प्रताड़ना के हैं। आप किस तरह साबित करेंगे कि किसी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है

साइंस हो जाएगी आसान

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साइंस एक ऐसा विषय है, जिसके बारे में सोचकर अच्छे-अच्छों को नींद आने लगती है। साइंस के फंडे और फॉर्मूले ऐसे होते हैं कि उन्हें रटे बिना काम ही नहीं बनता। शायद तुम्हारे टीचर भी गुस्से में बो लते होंगे कि अरे यार, तुम इतनी सी चीज याद नहीं कर सकते। अगर तुम्हारे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है तो चलो आज हम तुम्हारी फिर मदद करते हैं और कैमिस्ट्री को बनाते हैं आसान और मजेदार। बस, इसके लिए आज फिर पापा का एंड्रॉएड हैंडसेट थोड़ी देर के लिए उधार मांग लेना और अगर न मानें तो समझा देना कि कैमिस्ट्री में फुल मार्क्स चाहिए कि नहीं। कैमिस्ट्री एप्स को खोलने के लिए गूगल प्ले स्टोर पर जाओ और सर्चबॉक्स पर कैमिस्ट्री लिखो, उसके बाद इस विषय के कई एप्स खुलकर आ जाएंगे।
कैमिस्ट्री हेल्पर
कैमिस्ट्री को आसान बनाने के लिए यह एजूकेशन एप बहुत मजेदार है। यह फॉर्मूले, चेन्स, मॉलिक्यूल और कंपाउंड को बेहद आसान तरीके से तुम्हें समझा देगा। वैसे भी ये सब टॉपिक छठी क्लास से ही शुरू हो जाते हैं तो बेसिक्स क्लियर होना बहुत जरूरी हो जाता है। इसे तुम कैमिस्ट्री का विकिपीडिया मान सकते हो। यह एक मुफ्त एप है और तुम इसे इंस्टॉल कर सकते हो। इस एप पर क्लिक करो और हरे बॉक्स में लिखे इंस्टॉल पर क्लिक कर दो। यह एप चंद सेकेंड में डाउनलोड हो जाएगा। कैमिस्ट्री फॉर्मूला कैलसी
अगर तुम्हें फॉर्मूला कैलकुलेट करने में मुश्किल आ रही है तो इस एप की मदद ले सकते हो। यह एप कैलकुलेशन के अलावा कई कैटेगरी में खोला जा सकता है और इसमें गैस, लिक्विड और सॉल्यूशन की आसान टेबल भी दी गई है। इस एप को इंस्टॉल करने का तरीका बिल्कुल हेल्पर की तरह ही है। कैमिस्ट्री डिक्शनरी
कैमिस्ट्री एक ऐसा सब्जेक्ट है, जिसमें वोकैब बड़े कठिन होते हैं। कई शब्द तो ऐसे होते हैं, जिनके बारे में तुमने सुना भी नहीं होगा। बस इतनी सी बात, तुम डाउनलोड कर सकते हो कैमिस्ट्री डिक्शनरी। यह एक ऐसा एप है, जिसमें तुम पूरी दुनिया के कैमिस्ट्री के शब्द डाल दोगे, तब भी यह तुम्हें एक सेकेंड में उसका मतलब बेहद आसान शब्दों में समझा देगा। बेसिक कैमिस्ट्री
कैमिस्ट्री से प्यार करने के लिए उसके बेसिक्स समझना बहुत जरूरी है। तुम्हारे टीचर यह कहते होंगे कि तुम्हारे बेसिक्स क्लियर नहीं हैं। अगर ऐसा तुम्हें लग

हमेशा अच्छा नहीं होता आंखें मिलाना

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हाल के एक अध्ययन के मुताबिक अगर श्रोता पहले से आपसे असहमत हो, तो आंखे मिलाने पर संभवत: उलटी प्रतिक्रिया मिल सकती है। जबकि पूर्व में माना जाता था कि देर तक आंखें मिलाना किसी को अ पनी बात से सहमत करने या अनुनय का कारगार तरीका होता है।
एसोसिएशन फॉर साइकोलॉजिकल साइंस की पत्रिका, 'साइकोलॉजिकल साइंस' में हाल में प्रकाशित एक अध्ययन में ऐसा कहा गया है। यह अध्ययन कनाडा, जर्मनी और अमेरिका के  शोधकर्ताओं के सहयोग का नतीजा था। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के प्राध्यापक व अध्ययन के पहले लेखक फ्रांसेस चेन ने कहा, ''लोगों को प्रभावित करने के लिए आंखे मिलाने को शक्तिशाली समझने के बहुत से सांस्कृतिक विचार हैं।'' समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने चेन के हवाले से कहा, ''लेकिन हमारा निष्कर्ष दर्शाता है कि प्रत्यक्ष तौर पर आंखें मिलाना, संशयी श्रोताओं के विचारों को विरला ही बदल पाता है। इससे उतना प्रभाव नहीं होता है, जितना पूर्व में कहा जाता था।'' हाल में विकसित नेत्र गतिविधियों संबंधी प्रौद्योगिकी की मदद से शोधकर्ताओं ने परीक्षणों की एक श्रृंखला में आंखें मिलाने के प्रभावों की जांच की। उन्होंने पाया कि विविध विवादास्पद मुद्दों पर श्रोताओं ने वक्ता की आंखों में देखा जबकि वे वक्ता के तर्को से सहमत नहीं थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक वक्ता के बोलते वक्त श्रोताओं का उसकी आंखों में देखना उनके बीच केवल अधिक से अधिक ग्रहणशीलता दर्शाता है, जबकि वे उस मुद्दे पर पहले से ही वक्ता से सहमत थे। हार्वर्ड के केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट की अध्ययन की सह-लेखक जूलिया मिंसन ने कहा, ''ध्यान रखने वाली बात यह है कि चाहे आप एक राजनेता हों या एक अभिभावक, अगर आप अलग मान्यताएं रखने वाले व्यक्ति से आंखें मिलाने का प्रयास कर रहे हैं तो संभवत: उसकी उलट प्रतिक्रिया मिलेगी।''

चारा घोटाले में लालू-जगन्नाथ को जेल, अदालत ने लगाया जुर्माना

Image Loadingविशेष सीबीआई अदालत ने चाईबासा कोषागार से फर्जी तरीके से 37.70 करोड़ रुपये निकालने के चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में आज प्रमुख आरोपी राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव को पांच साल जेल की सजा सुनाई है।
लालू प्रसाद को पांच साल की कैद और 25 लाख रुपये के जुर्मा ने और पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को चार साल की कैद और 21 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्र और 32 अन्य अभियुक्तों की सजा पर आज सुबह ग्यारह बजे से बहस सुनी और लगभग पौने बारह बजे उन्होंने इन सभी अभियुक्तों की सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
  
इस मामले में फैसला सुनाये जाने की तिथि 30 सितंबर को अदालत में हाजिर नहीं हुए तीन अभियुक्त आज भी अदालत में हाजिर नहीं हुए, जिनके खिलाफ अदालत ने फिर से गिरफ्तारी वारंट जारी किया। सीबीआई के अधिवक्ता बीएमपी सिंह ने बताया कि इन तीनों के अदालत में पेश न होने के कारण उनके खिलाफ फिलहाल अदालत कोई फैसला नहीं सुनायेगी।
  
लालू यादव समेत तीस तारीख को इस मामले में दोषी करार दिये गये 34 अभियुक्त दोषी करार दिये जाने के बाद से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। चौंतीस बंदियों में से 33 यहां बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं, जबकि बीमार जगन्नाथ मिश्र रिम्स में भर्ती हैं।
   
प्रवास कुमार सिंह की विशेष सीबीआई अदालत ने सोमवार को इस मामले में कुल 45 लोगों को दोषी करार दिया था और तीन वर्ष की सजा पाने वाले राजनीतिज्ञों विद्यासागर निषाद, ध्रुव भगत, पूर्व आईएएस अधिकारी के मुएमुगम समेत आठ को अस्थाई जमानत देने के अलावा अन्य सभी को होतवार स्थित बिरसा मुंडा जेल भेज दिया था। बाद में तबियत खराब होने के कारण मिश्र को जेल से रिम्स अस्पताल भेज दिया गया था।
  
लालू प्रसाद यादव के वकील जबलपुर उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र सिंह ने अदालत से विनती की कि लालू प्रसाद यादव को मधुमेह और उच्च रक्तचाप समेत अनेक बीमारियां हैं और रेलमंत्री के रूप में उन्होंने देश की बड़ी सेवा की है। इस आधार पर अदालत उन्हें कम से कम सजा दे और हर हाल में दो या तीन वर्ष से कम सजा दे। सिंह ने तर्क दिया कि लालू पहले ही इस मामले की 17 वषो तक चली सुनवाई के कारण एक तरह से 17 वर्ष से सजा भुगत रहे हैं, लिहाजा अब उन्हें सिर्फ छह माह की कैद की सजा देकर मुक्त कर दिया जाये।
  
लालू और जगन्नाथ मिश्र के वकीलों ने तर्क दिया कि यदि उन्हें लंबी कैद की सजा दी गयी, तो यह उन्हें फांसी पर लटकाने जैसा ही होगा। दूसरी ओर इस मामले में सीबीआई के वकील बीएमपी सिंह ने कहा कि लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्र समेत सभी शेष अभियुक्तों को अधिकतम सजा दी जाये, क्योंकि इन सभी ने मिलकर साजिशन बिहार की जनता के राजस्व को लूटा।

Wednesday, 2 October 2013

बनना चाहता था फौजी, बन गया क्रिकेटरः एम एस धोनी

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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी
कैप्टन कूल एमएस धोनी ने टीम इंडिया को क्रिकेट के हर फॉरमेट में बुलंदियों तक पहुंचाया. लेकिन रांची का ये लड़का क्रिकेटर नहीं, कुछ और बनना चाहता था. धोनी ने बताया कि वह बचपन से ही फौजी बनना चाहते थे. वो रांची के कैंट एरिया में अक्सर घूमने चले जाते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था, वो फौज के अफसर नहीं बन पाए और क्रिकेटर बन गए. क्रिकेटर नहीं 'जवान' बनना चाहते थे धोनी
धोनी ने ये खुलासा सेना के जवानों के बीच किया. धोनी ने मिलिट्री के पैराशूट रेजीमेंट में जवानों के साथ एक दिन बिताया और इन खास पलों का साक्षी रहा सबसे तेज चैनल आजतक. धोनी क्रिकेटर तो हैं ही, साथ ही टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल भी हैं.
माही ने जवानों से बहुत कुछ सीखा
पैराशूट रेजीमेंट में पूरा दिन धोनी ने खूब मस्ती की. जवानों से बातें कीं, उनसे बहुत कुछ सीखा. मार्क ड्रिल देखा. आतंकी हमले के वक्त फौजी किस तरह मोर्चे पर डट जाते हैं, धोनी ने ये सब देखा और सीखा भी. निशानेबाजी के शौकीन धोनी शूटिंग रेंज में गए और जमकर निशाने लगाए. कैप्टन कूल ने यहां खूब हंसी मजाक भी किया.
'वर्दी में कुछ तो खास है'
आजतक के शो सॉलिड जवान, स्टार कप्तान में धोनी ने ये बताया कि उन्हें ऊंचाई से बहुत डर लगता है. इसके बावजूद धोनी ने फैन जंप किया. जब वो नीचे से ऊपर आए तो कहा, 'इस वर्दी में कुछ खास है. शायद इस वर्दी का कमाल है जो मुझे डर नहीं लगा.'
'मैं पल दो पल का शायर हूं...'
धोनी ने इसके बाद शाम को चाय के बाद जवानों के साथ शानदार महफिल जमाई. जवानों ने खूब गाने सुनाए और डांस भी किया. धोनी से जवानों ने डांस की फरमाइश की, लेकिन धोनी ने कहा कि जब वो अगली बार आएंगे तो जरूर नाचेंगे. फिर धोनी ने जवानों को गाना सुनाया, 'मैं पल दो पल का शायर हूं...'
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले फ्रिज में बैठ जाते हैं धोनी!
जवानों ने धोनी से खूब सवाल भी पूछे. एक जवान ने पूछा कि आप इतने कूल कैसे रहते हैं. इस पर धोनी ने जवाब दिया, 'जिस दिन मुझे प्रेस कान्फ्रेंस करनी होती है, उससे एक दिन पहले मैं फ्रिज में जाकर बैठ जाता हूं, इसीलिए कूल रहता हूं.'
देश की सेवा करना चाहते हैं माही...
धोनी जवानों से बड़ी गर्मजोशी से मिले. दिल खोलकर तारीफ भी की. एक सवाल के जवाब में धोनी ने कहा, 'बचपन से ही मैं सेना में जाना चाहता था. रांची में आर्मी एरिया में अक्सर चला जाता था. वहां जवानों को देखकर सोचता था कि एक दिन मैं भी ऐसा ही बनूंगा.' क्रिकेटर होने के बाद फिर आर्मी में आने को लेकर पूछे एक सवाल के जवाब में धोनी ने कहा, 'मैं देश की सेवा करना चाहता हूं. और इस तरह से मुझे देश की सेवा करने का मौका मिला तो मैंने मंजूर कर लिया.'
IPL में खेल सकते हैं सेना के जवान
एक जवान ने पूछा, 'आप क्रिकेटर होकर फौजी बन गए और हम फौजी होकर क्रिकेटर क्यों नहीं बन पाते, हम आईपीएल में क्यों नहीं खेल पाते?' इस पर धोनी बोले, 'क्रिकेट एक ऐसा खेल है, जिसे कोई भी खेल सकता है. कोई बंदिश नहीं है. आप भी आईपीएल खेल सकते हैं. अगर आपके अंदर बढ़िया क्रिकेट खेलने की खूबी है तो आपको भी खेलने का मौका मिल सकता है.'
... और धोनी हो गए इमोशनल
सेना के जवानों के साथ धोनी के कई अनदेखे, अनजाने पहलू सामने आए. धोनी जब सैनिकों की विधवाओं और बच्चों से मिले तो उनका एक अलग चेहरा देखने को मिला. धोनी इमोशनल हो गए. सैन्य विधवाओं के बच्चों के साथ वक्त बिताया, उनकी तमाम मांगें पूरी की. उन्हें ऑटोग्राफ दिया और तस्वीरें भी खिंचवाई.