Saturday, 28 December 2013

गैर परंपरागत राजनीति के प्रतीक हैं आम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

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राजनीति के वैकल्पिक ब्रांड के प्रतीक के रूप में उभरे और इंजीनियर से लोकसेव क बने अरविंद केजरीवाल ने आप को सत्ता में लाकर राजनीतिक सोच बदल दी है। आम आदमी पार्टी की इस जीत से कार्यकर्ताओं की उस पार्टी ने उस व्यंग्य का एक मीठा सा बदला ले लिया है, जिसमें उसे कभी बेहद कमजोर बताया गया था।
     
आम आदमी पार्टी के 45 वर्षीय नेता ने सामने से मोर्चा संभालकर गैर परंपरागत तरीके से अपनी मुहिम शुरू की और उनकी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर कांग्रेस के 15 साल के शासन को समाप्त कर दिया। आप के एजेंडे में आम आदमी के हितों को केंद्र में रखते हुए केजरीवाल ने तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित को हरा दिया।
देश के राजनैतिक क्षितिज पर नए सितारे की तरह उभरकर पहली बार में चुनावी मैदान में सफलता हासिल कर लेने वाले केजरीवाल की पार्टी आप को अपना सबसे यादगार उपनाम उस समय मिला था, जब कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने इस साल की शुरुआत में आप को मैंगो पीपुल इन बनाना रिपब्लिक यानि राजनैतिक रूप से बेहद कमजोर देश के लोग कहा था।
    
चेहरे मोहरे से वास्तविक आम आदमी की छवि को साकार करने वाले केजरीवाल को देखकर कहीं यह महसूस नहीं होता कि विनम्र वाणी और सादा हावभाव वाला यह शख्स दिल्ली की सियासत का चेहरा बदलने की कुव्वत रखता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ बरसों पहले शुरू की गई अपनी मुहिम को आईआईटी के इस पूर्व छात्र ने धीरे-धीरे एक जन आंदोलन में बदल दिया और राजनीति के दिग्गजों को जब तक उनका खेल समझ में आता, वह सत्ता के गलियारों तक अपनी पहुंच बना चुके थे।
   
परिवर्तन का सपना लेकर राजनीति में उतरे केजरीवाल अपनी विनम्र वाणी और सहज व्यक्तित्व से राजधानी के लोगों को एक बेहतर कल का सपना दिखाने और नयेपन की उम्मीद जगाने में कामयाब रहे और महंगाई, भ्रष्टाचार, लाल फीताशाही और नौकरशाही से आजिज मतदाताओं ने 4 दिसंबर को केजरीवाल को अपना नया नेता चुन डाला।
   
लंबे समय से समाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहे जिस केजरीवाल को राजनीति का नौसीखिया कहकर खारिज किया जा रहा था, उसी केजरीवाल ने एक शानदार राजनैतिक शुरुआत करते हुए महज एक साल की आम आदमी पार्टी के जरिए वर्षों से स्थापित राजनैतिक तंत्र को चुनौती देकर राजनीति में अपनी मजबूत जगह बना ली।
   
केजरीवाल ने भारतीय राजनीति के खेल के पुराने नियम-कायदों को हटाते हुए इस खेल के नए मापदंड तय किए। भ्रष्टाचार विरोधी पार्टी के रूप में शुरू हुए इस सामाजिक आंदोलन ने पूरे भारत में मौजूद छात्रों, किसानों, नागरिक अधिकार समूहों, गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला समूहों और शहरी युवाओं की असीमित उर्जा अपने साथ ले ली।

स्वस्थ रहने के लिए लें 10 संकल्प

Image Loadingखुद को स्वस्थ रखने के लिए हम बहुत कुछ करना चाहते हैं, लेकिन कर नहीं पाते। इस साल हम अपनी सेहत के लिए 10 प्रण क्यों न लें, जिसका पालन पूरी ईमानदारी से करें।
नया साल आते ही हम मन ही मन कुछ संकल्प लेने लगते हैं कि आने वाले साल में अपना वजन कम करेंगे, अपनी फिटनेस पर ध्यान देंगे, धूम्रपान या शराब छोड़ेंगे या अधिक पोषक भोजन का सेवन करेंगे आदि। एक अनुमान के अनुसार  विश्व की कुल जनसंख्या के 70 प्रतिशत लोग साल के शुरू होने पर कोई न कोई संकल्प लेते हैं। इनमें स्वास्थ्य संबंधी संकल्प ही सबसे अधिक होते हैं, लेकिन बहुत ही कम लोग अपने संकल्पों को पूरा कर पाते हैं। कोशिश करें कि इस साल आप जो भी संकल्प लें, उन्हें जरूर पूरा करें। तनाव भगाएं
करियर और परिवार की जिम्मेदारियां, काम का बोझ, वक्त की कमी, रिश्तों के बीच बढ़ती दूरियां, अकेलापन और महत्वाकांक्षाएं, आज इन स्थितियों का सामना अधिकतर  लोग कर रहे हैं। इससे उनके जीवन में तनाव का स्तर काफी बढ़ गया है। इसका नकारात्मक प्रभाव उनके शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य तथा जीवन की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इसलिए जरूरी है कि नया साल इस संकल्प के साथ शुरू करें कि छोटी-छोटी बातों पर तनाव नहीं पालेंगे। तनाव के नकारात्मक प्रभाव
तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोनों का स्तर बढ़ जाता है, जिनमें एड्रीनलीन और कार्टिसोल प्रमुख हैं। इनकी वजह से दिल का तेजी से धड़कना, पाचन क्रिया का मंद पड़ जाना, रक्त का प्रवाह प्रभावित होना, नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाना और इम्यून सिस्टम कमजोर होने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। जानलेवा मोटापे से बचें
मोटापे का अर्थ है शरीर में आवश्यकता से अधिक चर्बी बढ़ने से शरीर का बेडौल हो जाना। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मोटापे को स्वास्थ्य के लिए सर्वाधिक 10 खतरों में शामिल किया है। आंकड़ों के अनुसार 10 प्रतिशत आबादी मोटापे की शिकार है। मोटापे के नुकसान
मोटापा अपने आपमें कोई रोग नहीं, लेकिन यह कई रोगों को न्योता देने का कारण अवश्य है। इनमें प्रमुख हैं डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हार्ट फेलियर, अत्यधिक पसीना आना, जोड़ों में दर्द और बांझपन। इससे बचे रहकर स्वस्थ व युवा नजर आएंगे। नियमित दिनचर्या अपनाएं
अपने सोने-जागने का एक नियमित चक्र बनाएं। अगर हर दिन एक निश्चित समय पर सोएंगे और जागेंगे, आप अधिक ऊर्जावान और  तरोताजा अनुभव करेंगे। अगर आप अपने स्लीप पैटर्न को बदलना चाहते हैं तो धीरे-धीरे 15 मिनट का बदलाव करके बदलें। इसी तरह से खाने का भी एक नियत समय बना लें, जिससे आपका शरीर उस समय तक ऊर्जा का स्तर बनाए रखने का आदी हो जाएगा। एक्सरसाइज की आदत डालें
आज की तेज रफ्तार जिंदगी से तालमेल बैठाने के लिए स्वस्थ और ऊर्जा से भरपूर होना जरूरी है। इसके लिए एक्सरसाइज से बेहतर क्या हो सकता है। इससे न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में सहायता मिलती है, बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। ‘लैनसेट’ में प्रकाशित एक खबर के अनुसार हर दिन केवल 15 मिनट की एक्सरसाइज भी आपके जीवनकाल को 3 साल बढ़ा सकती है। भोजन रखे निरोग
एक पुरानी कहावत है कि भोजन को ही दवा बना लें। अगर आप नियमित रूप से संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करेंगे तो न केवल बीमारियों से बचेंगे, बल्कि स्वस्थ और ऊर्जावान भी बने रहेंगे। अपने भोजन में फल, सब्जियों, साबुत अनाज और तरल पदार्थो को उचित मात्र में शामिल करें। दिन में तीन बार मेगा मील खाने की बजाए छह बार मिनी मील खाएं। नींद कितनी जरूरी
विशेषज्ञ कहते हैं कि हमें कम से कम छह से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। हर व्यक्ति के शरीर में नींद की बायोलॉजिकल क्लॉक होती है। जब यह क्लॉक असंतुलित होती है तो परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे तनाव, कोई शारीरिक या मानसिक समस्या। रिश्तों को दें नई ताजगी
अच्छे खुशहाल रिश्ते हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं। हाल ही में किए एक शोध में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों का सामाजिक जीवन जितना सक्रिय होता है, वो उतने ही खुशहाल होते हैं। सामाजिक रूप से सक्रिय रहना अवसाद और तनाव से दूर रखता है। अपने बच्चों के साथ बैठें और उनसे दिन के बारे में चर्चा करें। परिवार के साथ डिनर या पिकनिक पर जाएं। नाश्ता करने की आदत डालें
आपको अपने दिन की शुरुआत करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ब्रेकफास्ट आपके शरीर को सुचारु रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक ऊर्जा उपलब्ध कराता है। ब्रेकफास्ट को हमारे दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है। सुबह ब्रेकफास्ट के लिए समय नहीं मिलता तो ट्रेन, बस या अपनी गाड़ी में रास्ते में खा सकते हैं। ध्यान लगाएं
ध्यान को मस्तिष्क की खुराक कहा जाता है। ध्यान एक साधारण, लेकिन शक्तिशाली तकनीक है, जो आपके मस्तिष्क को शांत और स्थिर रखती है। आपको सिर्फ यह करना है कि आप अपनी आंखें बंद करके बैठ जाएं और गहरा आराम अनुभव करें। शुरुआत में थोड़ी दिक्कत होगी, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति से आप मन को काबू में कर लेंगे। ध्यान से लाभ
कई अध्ययनों में यह बात भी सामने आई है कि ध्यान एलर्जी, उत्तेजना, अस्थमा, कैंसर, थकान, हृदय संबंधी बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर, अनिद्रा में आराम मिलता है। हमारी कई बीमारियां मनोवैज्ञानिक होती हैं। इनसे भी बचाव करने में ध्यान हमारी काफी सहायता करता है। वार्षिक हेल्थ चेकअप कराएं
हमारे देश में लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का इतना अभाव है कि अधिकतर लोग स्वस्थ्य दिखने पर तो क्या बीमारी के लक्षण नजर आने पर भी चैकअप के लिए नहीं जाते, जब तक कि हालात नियंत्रण से बाहर न हो जाएं। मेडिकल टैस्ट जरूरी हैं, ताकि लक्षण नजर आने से पहले उनकी पहचान हो सके। हेल्थ चेकअप के लाभ
अधिकतर लोग सोचते हैं कि वो पूरी तरह फिट और स्वस्थ हैं। उनके साथ कुछ गड़बड़ नहीं है। उनके लिए हेल्थ चेक-अप समय और पैसे की बर्बादी से ज्यादा कुछ नहीं है। कई गंभीर बीमारियों के लक्षण प्रथम चरण में नजर नहीं आते। मेडिकल टैस्ट जरूरी हैं, ताकि बीमारियों की पहचान समय रहते कर ली जाए या कई बीमारियों की आशंका को जीवन शैली में बदलाव, खानपान पर नियंत्रण और हल्की एक्सरसाइज द्वारा ही खत्म किया जा सके। इसलिए रूटीन चेकअप अवश्य कराएं। कैसे करें संकल्प पूरा
-एक साथ पांच-छह संकल्प मत लीजिए। केवल एक संकल्प लें और उसे पूरा करने का प्रयास करें।
-पहले से ही अपना संकल्प तैयार कर लें, ताकि आपको अपने लक्ष्य के बारे में सोचने और उसे प्राप्त करने का समय मिल जाए।
-पिछले वर्ष का ही संकल्प मत दोहराएं। अगर आप उसे ही चुनते हैं तो कम-से-कम उसे प्राप्त करने की अलग तकनीक चुनें।
-संकल्प और उसे पूरा करने के तरीके को अपनी डायरी में लिख लें।
-संकल्प पूरा करने पर आप अपने लिए कोई पुरस्कार निर्धारित कर लें। यह आपको चीजों पर अधिक फोकस करने के लिए प्रेरणा देगा।
-संकल्प को अवास्तविक तरीके से पूरा करने का न सोचें। 3 साल उम्र बढ़ाए 15 मिनट व्यायाम
-70 प्रतिशत लोग साल के शुरू होने पर कोई न कोई संकल्प लेते हैं, जिनमें स्वास्थ्य संबंधी संकल्प ही सबसे अधिक होते हैं।
-10 प्रतिशत आबादी मोटापे की शिकार है, दुनियाभर में विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार।
-6 से 8 घंटे का समय जरूर निकालें सोने के लिए और इसके लिए संकल्प करें।
-2008 में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि ध्यान तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है।

Friday, 27 December 2013

एस. जयशंकर पर कूटनीतिक विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी

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अमेरिका में भारत के नए राजदूत एस. जयशंकर ने भारतीय राजनयिक की गिरफ्तारी और उनकी गहन तलाशी से अमेरिका-भारत के बीच उपजे कूटनीतिक विवाद को समाप्त कर ने की राह तलाशी शुरू कर दी है।
अमेरिकी विदेश विभाग में अपने दस्तावेजों की प्रति सौंपते हुए उन्होंने दो शीर्ष अधिकारियों -राजनीतिक मामलों की उप उपमंत्री वेंडी शेरमन और प्रबंधन उपमंत्री पैट्रिक एफ.केनेडी- से मुलाकात की। चीन में चार साल तक राजदूत रह चुके जयशंकर हालांकि सबसे पहले अपने दस्तावेज आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति को सौंपेंगे, जो नए साल की छुट्टी पर हवाई गए हुए हैं, और उनसे अब नए साल में ही मुलाकात हो पाएगी। लेकिन विदेश विभाग में दस्तावेजों की एक प्रति सौंपने के बाद अब वह अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत शुरू कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि न्यूयार्क स्थित भारतीय उपमहावाणिज्यदूत देवयानी खोबरागड़े की गिरफ्तारी के बाद उपजे संकट के समाधान के लिए राजनयिक भारत और अमेरिका में सक्रिय हैं। भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता एवं अन्य मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके जयशंकर अमेरिकी नौकरशाही के बीच जाना-पहचाना चेहरा हैं। जयशंकर दक्षिण और मध्य एशिया की उप विदेश मंत्री निशा देसाई बिस्वाल और अन्य अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक में प्रगति की उम्मीद कर रहे हैं। जयशंकर ने अमेरिका में भारतीय राजदूत के रूप में निरूपमा राव का स्थान लिया है। इसके पहले वह विदेश मंत्रालय में अमेरिकी मामलों एवं नीत निर्माण के अधीनस्थ सचिव रह चुके हैं। उसके बाद 1985 से 1988 के बीच उन्होंने अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास में राजनीतिक मामलों के प्रथम सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दी और उसके बाद दो साल तक वह श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) के प्रथम सचिव और राजनीतिक सलाहकार रह चुके हैं। जयशंकर ने 2004 से 2005 के बीच विदेश मंत्रालय में अमेरिकी डिविजन का नेतृत्व किया है। जयशंकर का तीन दशक से अधिक समय का कूटनीतिक अनुभव रहा है। उन्होंने विश्वभर के देशों के सामने भारतीय हितों को पेश किया है और कामकाज के दोस्ताना रवैये को प्रोत्साहित किया है। जयशंकर ने अंतर्राष्ट्रीय संबंध में पीएचडी और एमफिल तथा राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है। जयशंकर ने क्योको जयशंकर से शादी की है और उनके दो बेटे और एक बेटी है।

आपकी शादी को खास बनाती हैं ये सामग्री

Image Loadingभारतीय शादी से जुड़े रीति-रिवाजों की तुलना किसी अन्य देश के रीति-रिवाजों से नहीं की जा सकती। हर दिन इस्तेमाल में आने वाली आम चीजें, शादी की रीति-रिवाजों में खास हो जाती हैं। पान, सुपारी और हल्दी जैसी चीजें कैसे बनाती हैं आपकी शादी को खास।
खूबसूरत त्वचा के लिए हल्दी
शादी से जुड़ी सबसे आम रस्म है हल्दी लगाना। शादी से एक दिन पहले दूल्हा और दुल्हन को शादीशुदा महिलाएं हल्दी लगाती हैं। पारंपरिक रूप से हल्दी की इस विधि में दुल्हन पीले रंग का कपड़ा पहनती है। हल्दी के कार्यक्रम के बाद दूल्हा और दुल्हन को एक-दूसरे से मिलने की इजाजत नहीं होती है। हल्दी, बेसन और तेल को मिलाकर इस दिन के लिए उबटन बनाया जाता है। हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण होता है, वहीं बेसन त्वचा को साफ करके उसमें चमक लाता है और तेल त्वचा को जरूरी नमी प्रदान करके उसकी खूबसूरती बढ़ाता है। कई बार इस उबटन में चंदन और केसर भी मिलाया जाता है ताकि त्वचा की खूाबसूरती और बढ़ सके। समृद्धि का प्रतीक है चावल
भारतीय खानपान में चावल का प्रमुखता से इस्तेमाल होता है और चावल के इसी गुण के कारण उसे शुद्ध और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शुद्धता के इस प्रतीक का इस्तेमाल हमारे यहां के समारोह और रीति-रिवाजों में बहुलता से किया जाता है। हिंदू विवाह के दौरान नए जोड़े को आशीर्वाद देने के लिए उनके ऊपर चावल छिड़का जाता है। ऐसी मान्यता है कि चावल नकारात्मक चीजों को दूर भगाता है, इसलिए विवाह के दौरान प्रज्वलित अग्नि में दूल्हे के द्वारा चावल भी डाला जाता है। घर की देवी को भी चावल अर्पित किया जाता है। शादी के बाद विदाई के वक्त दुल्हन अपने हाथों में चावल भरकर उसे अपने सिर के पीछे की ओर फेंकती है, वहीं अपने ससुराल पहुंचकर वह चावल से भरे बरतन को अपने पैरों से गिराकर घर में प्रवेश करती है। इन दोनों रिवाजों के माध्यम से दुल्हन यह प्रार्थना करती है कि उसके मायके और साथ ही साथ उसके ससुराल में समृद्धि हमेशा बनी रहे। पान-सुपारी भी हैं खास
हर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ शादी से जुड़े विभिन्न विधि-विधानों का अहम हिस्सा है पान और सुपारी। कई धार्मिक रीति-रिवाजों में तो सुपारी को देवी का प्रतीक भी माना जाता है। वहीं, पान का पत्ता ताजगी और समृद्धि का प्रतीक है। कई हिंदू विवाह में पान के पत्ते को दूल्हा और दुल्हन के सिर पर लगाया जाता है। दूल्हे के परिवार का स्वागत भी पान के पत्ते से किया जाता है और अमूमन शादी की हर विधि में पान के पत्ते का इस्तेमाल होता है। वहीं, पान का पत्ता और नारियल सभी मेहमानों को धन्यवाद के प्रतीक के रूप में भी दिया जाता है। शुद्ध नदियों का प्रतीक पानी
शादी के विभिन्न रीति-रिवाजों में पानी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। पानी शुद्ध नदियों का प्रतीक है। इसे जिंदगी और जीवन चक्र का आधार माना जाता है। सभी धर्म और समुदाय में सफाई करने के लिए, सेहत को बेहतर बनाने के लिए, अच्छे भविष्य और समृद्धि के लिए शादी के रीति-रिवाजों में पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इनका भी होता है इस्तेमाल
-आम, केला, नीम और तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल भी शादी के विभिन्न रीति-रिवाजों में किया जाता है। ये सभी पत्ते शुद्धता के प्रतीक हैं।
-जब दुल्हन गृह-प्रवेश करती है, उस समय गुड़ खिलाकर उसका स्वागत किया जाता है। शादी के बाद के विभिन्न रिवाजों में दही का इस्तेमाल भी होता है।
-घी को पवित्र माना जाता है और शादी के अमूमन सभी रिवाजों में घी का इस्तेमाल दीप जलाने के लिए किया जाता है।
-कई समुदायों में दुल्हन के पैर धोने के लिए दूध और नारियल पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

पर्मानेंट मेकअप से बचाएं अपना अनमोल समय

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हनीमून कभी न भुलाई जाने वाली एक अनमोल घड़ी है। इस घड़ी में नई-नवेली दुल्हन खूबसूरत भी दिखना चाहती है और हर पल साथ भी रहना चाहती है। लेकिन बार-बार मेकअप करने से ये अनमोल घड़ियां यूं ही बीत सकती हैं। नई दुल्हन मेकअप से समय बचाकर ज्यादा से ज्यादा समय अपने पति के साथ बिता सके, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए मेकअप की एक नई शैली विकसित की गई है, जिसका नाम है पर्मानेंट मेकअप। क्या है इस मेकअप में खास, आइये जानते हैं-
पर्मानेंट आईब्रोज : आईब्रोज का कलर लाइट होने पर हम आईब्रो पेंसिल के इस्तेमाल से उस कमी को सुधार लेते हैं। लेकिन ये पेंसिल कुछ ही देर तक आपके सौंदर्य को बरकरार रख पाती है। इस कलर को हर पल बरकरार रखने और हनीमून पर अपना बहुमूल्य समय बचाने के लिए पर्मानेंट मेकअप एक उचित समाधान है। इसके अलावा आईब्रोज पतली होने पर या फिर बचपन की किसी चोट के चलते आईब्रो में कट हो जाने पर भी पर्मानेंट आईब्रोज का ऑप्शन बेस्ट है। इसके अंतर्गत मशीन द्वारा एक बार आईब्रो को खूबसूरत शेप व मनचाहे रंग से बना दिया जाता है, जो पसीने या नहाने से खराब नहीं होती और लगभग 15 साल तक टिकती है। पर्मानेंट आईलाइनर और काजल : नई-नवेली दुल्हन अपने मुख से कम और आंखों से ज्यादा बात करती हैं। इन आंखों में कशिश लाने के लिए ही काजल और लाइनर का इस्तेमाल किया जाता है। मगर बार-बार इसे लगाना जहां आप दोनों को एक-दूसरे से दूर करेगा, तो वहीं लेंस व चश्मे का इस्तेमाल करने वालों के लिए ये दिक्कत का विषय भी हो जाता है। पर्मानेंट आईलाइनर व काजल से आपकी हर एक समस्या सुलझ सकती है। पर्मानेंट ब्यूटी स्पॉट : सेक्सी लुक की चाहत भला किसे नहीं होती। अपने लुक में भी सेक्सी अंदाज जगाने के लिए आप पर्मानेंट ब्यूटी स्पॉट बनवा सकती हैं। पर्मानेंट लिप लाइनर : बार-बार लिपलाइनर से अपने लिप्स को शेप देने की बजाय आप पर्मानेंट लिपलाइनर लगवा सकती हैं। इससे लिप्स की शेप 10 से 15 वर्षों तक हर पल सुन्दर बनी रहेगा और इस खूबसूरत शेप को आईने में देखकर आप हर पल मुस्करा उठेंगी। पर्मानेंट लिपस्टिक : दिन हो या रात, अपने होठों को हर पल गुलाबी व खूबसूरत बनाए रखने के लिए पर्मानेंट लिपस्टिक लगवा सकती हैं। इससे होठ तकरीबन 2 साल तक गुलाबी व सुंदर दिखेंगे, साथ ही आपको बार-बार लिपस्टिक लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। पर्मानेंट कलरिंग : यदि आप सफेद दाग या ल्यूकोडर्मा पैचेस की शिकार हैं तो पर्मानेंट कलरिंग की तकनीक आपके लिए किसी रामबाण से कम नहीं। इसके अंतर्गत स्किन से मैच करते कलर को त्वचा की डर्मिस लेयर तक पहुंचाया जाता है, जिससे दाग छुप जाते हैं। पर्मानेंट कलरिंग का असर 2 साल से लेकर 15 साल तक बना रह सकता है।

मां-बेटी का रिश्ता है यह सबसे खास

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मां, बेटी की हर जरूरत को समझती है। उसकी परेशानियां, खुशियां, इच्छाओं को भला मां से बे हतर कौन जानेगा? पर ऐसा नहीं है कि बेटी इस मामले में कहीं पीछे हैं। वे भी मां की परछाई ही होती हैं। मां का सबसे ज्यादा ख्याल बेटी ही रखती है। दरअसल ये एक ऐसा बंधन है, जो प्यार की कभी न टूटने वाली डोर से बंधा है। हालांकि कभी-कभी कुछ बातें इस रिश्ते में दूरियां ला सकती हैं, पर ये दूरियां ज्यादा दिनों की नहीं होतीं। बस जरूरत है दोनों को कुछ बातों का ध्यान रखने की-
माएं ये ध्यान रखें 1. आप पढ़ाई में अव्वल रही होंगी, पर बेटी को अपना उदाहरण देकर उसके मन में असंतोष को जन्म न दें। उसकी कक्षा की कुछ लड़कियां भी उससे पढ़ाई में आगे हो सकती हैं, उनसे तुलना न करें। हर बच्चा अपने में असाधारण हैं। तुलना उसके मन में नाराजगी और कुंठा को जन्म दे सकती है। 2. सिर्फ पढ़ाई पर जोर नहीं होना चाहिये। उसके व्यक्तित्व के बहुआयामों को समझने के लिये उसे हर विधा आजमाने का मौका जरूर दें। नृत्य, संगीत, कला, खेल। आप तो उसके अंदर छुपे कलाकार से चमत्कृत हो ही जाएंगी, आप उसे भी अनगिनत खुशियां दे पाएंगी। 3. उसकी भी समस्याएं हैं, पर समस्याओं को समस्या कहकर न पूछें। ‘आज क्या-क्या हुआ’ पूछ कर आप पूरे दिन की जानकारी रुचिपूर्वक सुनें। इतना थोड़ा सा समय देकर आप शायद उसकी सबसे अच्छी मित्र बन जाती हैं। साथ ही मित्रों से, टीचर्स के साथ आप उसके रिश्तों को भी पहचान पाती हैं, जो आज बहुत जरूरी है। यदि बच्चों की पूरी दिनचर्या को मां एकाग्रचित्त हो कर सुनें तो कई बार उनके बाल जीवन की परेशानियों और संभावित दुर्घटनाओं को रोक सकती हैं। 4. बेटी से नाराज होकर कभी भी सार्वजनिक स्थल पर या घर के अंदर भी अतिथियों के सामने उस पर अपना रोष व्यक्त न करें। आप उसे अपनी नाराजगी का अहसास फिर कभी करवा सकती हैं, जैसे बातचीत सीमित करके या स्पष्ट रूप से, पर शांतिपूर्वक अपनी बात कहकर। 5. आपका दिमाग कभी-कभी बड़ा अशांत हो उठता है, घर या बाहर की परिस्थितियों से। अपनी परिस्थितियों में घुटिये नहीं, बल्कि बिटिया को साझी बनाइये। परिस्थितियां बदल तो नहीं जाएंगी, पर उसका साथ आपमें एक नई हिम्मत और ऊर्जा देगा। बेटी के लिये मां से ऊंचा कोई दूसरा आदर्श नहीं होता, इसलिए मां को कभी भी स्थितियों से हार नहीं माननी चाहिये, क्योंकि वही संदेश आपकी बेटी ग्रहण करेगी। आपका दृष्टिकोण ही उसका जिन्दगी के प्रति नजरिया तय करेगा। बेटी का फर्ज है ये.. 1. मां, घर में रहें या बाहर, वह दिन भर काम ही करती हैं। ऐसे में यदि बिटिया अपने हाथों से मां को चाय की प्याली या जूस का गिलास पकड़ाए, तो मां का मन खुश हो उठता है। 2. आपको स्कूल में या कॉलेज में एक वातावरण मिलता है, उसका अपना असर होता है, जबकि घर में मां कुछ दूसरी बात कहती नजर आती है, ऐसे में सामंजस्य मुश्किल हो जाता है। पर ध्यान रहे कि मां के ऊपर आप अपना गुस्सा न निकालें। मां को समझाइये कि क्यों आप मां का चाहा या सोचा नहीं कर पा रहीं। ज्यादा उम्मीद है कि मां आपकी बात समझ जाये और अपनी इच्छा न मनवाये। 3. कभी-कभी मां को ऑरगेनाइज होने में मदद करिए। यदि मां की छोटी-छोटी चीजें उनके डॉक्युमेन्ट्स आप संभाल कर फोल्डर में रख दें और मां को उनकी याद दिला दें, तो मां को बहुत तसल्ली और सुकून मिलेगा। 4. अपनी समस्यायें, उलझनें मां से कभी न छुपायें। मां भी तो उम्र के इस दौर से गुजर चुकी हैं, जिससे आप गुजर रही हैं। जिंदगी से तब वो कैसे रूबरू हुई थीं, आप उनके अनुभवों से सीख सकती हैं। मां को यदि आपने सब बातों से वाकिफ रखा, तो कोई समस्या या व्यक्ति आपको परेशानी में नहीं डाल सकता। 5. मां को उनके बीते दिनों की याद ताजा करवायें। उनके पुराने मित्रों के फोन नम्बर खोज कर मां को दें। गुजरे हुये दिन शायद मां के सबसे अच्छे दिन रहे हों। मां को भी अहसास होगा कि उसकी बिटिया उससे अलग नहीं, बल्कि उसकी प्रतिमूर्ति है, मन ही मन वह आपकी कृतज्ञ रहेगी और आपका यह कदम आप दोनों को और भी जोड़ेगा।

खुशियों की बौछार आप पर हो इस साल

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कैसा होगा अगला साल? पिछले से बेहतर या फिर ये साल भी यों ही गुजरेगा! जो कुछ भी हो, हम तो बेहतर के लिए ही कदम उठाएंगे। पर सिर्फ किसी एक मुद्दे पर नहीं, बल्कि हर उस काम को बेहतर तरीके से करेंगे, जो जिंदगी से सीधे तौर पर जुड़ा है। नए साल में हेल्थ, ब्यूटी, नौकरी, रिश्ते और फाइनेंस जैसे जिंदगी के अहम ¨बदुओं में कैसे सुधार लाएं, बता रही हैं चयनिका निगम
आपसे खूबसूरत कौन भला?
दिन में दो बार जरूर देखें खुद को
घर से निकलते वक्त आपने भले ही बहुत सही तरीके से मेकअप किया हो, अच्छी भी लग रही हों, पर दिन भर में दो बार मेकअप में सुधार जरूर कीजिए। इससे आप हमेशा परफेक्ट दिखेंगी। घरेलू नुस्खे रखिए याद
अंडे के सफेद भाग से चेहरे पर मसाज करें और कुछ देर बाद गरम पानी से धो दें। टमाटर काटिए और चेहरे पर रगड़िए। इस तरह के फायदेमंद घरेलू नुस्खों को अपनाएं और आगे के लिए याद रखें। जानिए आप सुंदर हैं
दूसरा आप से कहे, इससे पहले आप समझिए कि आप बहुत सुंदर हैं। आप खुद को सुंदर मानेंगी तो जरा और सुंदर लगेंगी। फिर दूसरा कहे बिना कैसे रह पाएगा। दिल्ली स्थित खूबसूरत की ब्यूटी एक्सपर्ट पूजा गोयल बताती हैं कि हमेशा अच्छे दिखने के लिए कुछ बातें हमेशा ध्यान रखें। सबसे पहले कपड़ों को बॉडी के हिसाब से चुनें। बालों का स्टाइल अपने चेहरे के आकार के मुताबिक तय करें। इसके अलावा न्यूड मेकअप करें, जिसमें लिपग्लॉस, आईलाइनर का इस्तेमाल जरूर करें। इसके बाद मैचिंग एक्सेसरीज का साथ आपके लुक को परफेक्ट बना देगा। मेकअप का हो सही तरीका
सबसे पहले तो मेकअप इतना न हो कि जिस दिन मेकअप न करें, उस दिन लोग आपको पहचान ही न पाएं। हल्के शेड की लिपस्टिक और नेलपॉलिश  लगाएं। करियर की राह बनाएं आसान सपने तो देखिए
करियर में सफलता तब तक नहीं मिलेगी, जब तक आप सपने देखना शुरू नहीं करेंगी। सोचना पड़ेगा मैं इस ओहदे पर आ जाऊं तो? ऐसा करने के लिए जरूरी है कि आप बार-बार अपने सपनों के बारे में सोचें, सपनों को लिख कर रखिए और ऐसी जगह रखिए जहां दिन भर में कई बार आपकी नजर जाए। मेंटर का मिले साथ
काम के दौरान किसी को अपना मेंटर बनाया है तो अच्छी बात है। आपको मार्गदर्शन तो मिलेगा ही प्रमोशन और इंक्रीमेंट के समय भी यह मेंटर आपकी पूरी मदद करेगा। उसके अनुभवों से आप जिंदगी भर कुछ न कुछ जरूर सीखती रहेंगी। सेल्फ प्रमोशन है जरूरी
खुद की पब्लिसिटी और सेल्फ प्रमोशन सफलता के लिए बहुत जरूरी है। लोगों को आपकी प्रतिभा का पता चलेगा तभी तो वो आपको मौके देंगे। इसलिए अपनी खासियतों को दूसरों से जरूर साझा करें। सीखना है जरूरी
सफलता के लिए लगातार सीखने की चाहत बरकरार रखनी होगी। ट्रेनिंग लीजिए, किताबें पढ़िए, ब्लॉग देखिए पर सीखिए जरूर। सफल लोगों की खासियतों से भी सीख सकती हैं। नेटवर्क बढ़ाइए
जितने ज्यादा लोगों को जानेंगी, नौकरी के मौके उतने ही ज्यादा मिलेंगे। दरअसल आपका नेटवर्क बड़ा होगा तो काम के मौकों के बारे में ज्यादा पता चलेगा। पैसा न बने सिरदर्द मुश्किल समय के लिए हो ज्यादा निवेश
हम कमा रहे हैं, खूब मेहनत कर रहे हैं पर मुश्किल समय में इस मेहनत का फायदा न हो तो सब कुछ बेकार है। इसलिए जरूरी है कि आप हर महीने पैसा जमा करें और हां, इसे उस एकाउंट में बिलकुल न रखें, जिसका इस्तेमाल आप आमतौर पर करती हैं। 10 प्रतिशत हो रिटायरमेंट का
जी हां, अपनी आमदनी का 10 प्रतिशत रिटायरमेंट के समय के लिए हर महीने जरूर जोड़ें। फिर चाहे आप कितना भी कम क्यों न कमाती हों। आप जितनी जल्दी ऐसा करना शुरू करेंगी, उतनी जल्दी और ज्यादा धन जोड़ पाएंगी। लोन हों पूरे
आपके ऊपर जितने भी ऋण हैं कोशिश करें वो जल्द पूरे हो जाएं। नए साल में यह दिमाग में बैठा लीजिए, क्योंकि किसी भी तरह की ऐसी जिम्मेदारियां रिटायरमेंट के पहले पूरी हो जानी चाहिए। खर्चों पर हो नजर
कब, कितना और कहां खर्च कर रही हैं, इस पर एक नजर जरूर रखें। हर रोज के खर्चो को लिखकर इसकी पूरी तस्वीर देखी-समङी जा सकती है। इससे आपको यह भी पता चलेगा कि आखिर अतिरिक्त पैसा कहां खर्च हो रहा है। सेहत की फिक्र न रहे कोई पानी पिएं भरपूर
आपके शरीर को करीब-करीब हर काम के लिए पानी की जरूरत होती है। तरह-तरह के दर्द से लेकर दूसरी शारीरिक परेशानियों को पानी की कमी न होने देकर कम किया जा सकता है। इसलिए हर दिन भरपूर मात्र में पानी पिएं। 30 मिनट की हो ब्रिस्क वॉक
आपका शरीर चलने और मूवमेंट करने के लिए बना है। दिल तक को सही से काम करने के लिए इसकी जरूरत होती है। ऐसे में ब्रिस्क वॉक करते रहना आपको स्वस्थ्य जरूर रखेगा। पर कोशिश करें कि ऐसा हरियाली के बीच हो। पेड़-पौधे आपके शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलते हैं। कम से कम 30 मिनट तो वॉक करें ही। फल-सलाद जरूर है खाना
पूरी कोशिश करें कि दिन भर में 2 से 3 सर्विग फल जरूर खाएं। रंगीन फलों में बीमारियों से लड़ने वाले फाइटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं। फलों से साथ सलाद को भी अपना दोस्त बना लीजिए। इनमें विटामिन, मिनरल, क्लोरोफिल, एंजाइम्स जैसे फायदेमंद तत्व होते हैं। 15 मिनट हों खुद के
दिनभर में 15 मिनट खुद के लिए जरूर निकालें। जो पसंद हो वो करें। किताबें पढ़ना, डांस करना, गाने सुनना या फिर शांति से बैठना, कुछ भी करें पर कम से कम 15 मिनट आपके अपने होने चाहिए। इस दौरान आप गहरी सांस लेना या मेडिटेशन भी कर सकती हैं। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज की डायटीशियन निरूपमा सिंह कहती हैं कि बहुत सारी दूसरी बातों से ज्यादा यह जरूरी होगा कि हंसने का कोई भी मौका न छोड़ें। इसके अलावा समय पर खाना खाएं। खाने में मिल्क प्रोडक्ट जरूर शामिल होने चाहिए। रिश्ते पर ध्यान सबसे ज्यादा उनकी प्रशंसा करें
अपने पार्टनर से रिश्ते सुधारने का इरादा है तो इस साल उनकी अच्छी आदतों की प्रशंसा जरूर करें। उनके काम, उनके सपोर्ट किसी की भी, पर तारीफ जरूर करें। बात बढ़ाएं न
झगड़ा हो गया है, अब तक बात भी नहीं हुई तो जरा ठहरिए और सोचिए कि इस झगड़े से क्या होगा? बात कीजिए और आगे बढ़िए। सोच लीजिए कि इस साल झगड़े को बढ़ाएंगी नहीं। गुस्से को समझों
किसी बात पर गुस्सा आना बहुत वाजिब है। ऐसे में सामने वाले को गुस्सा क्यों आया, यह तो आपको समझना ही होगा। इसके लिए बैठ कर बात करेंगी तो गुस्से का कारण और निवारण दोनों समझ आ जाएगा।