Friday, 27 December 2013

दिल्ली में सीएनजी हुई महंगी, केजरीवाल ने उठाए सवाल

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मुख्यमंत्री के रूप में मनोनीत अरविन्द केजरीवाल ने सीएनजी के दाम बढ़ाए जाने के केंद्र के कद म पर आज सवाल उठाया और कहा कि जब दिल्ली में नई सरकार कार्यभार संभालने वाली है, तो मूल्य बढ़ाए जाने की क्या जल्दबाजी थी। उन्होंने कहा कि सीएनजी के मूल्य में वृद्धि के चलते राष्ट्रीय राजधानी में ऑटो रिक्शा भाड़े पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
  
उन्होंने कहा कि वह मामले को देखेंगे और केंद्र से मूल्य बढ़ाए जाने की इस जल्दबाजी का कारण पूछेंगे। केजरीवाल ने कहा कि जब दिल्ली में नई सरकार सत्ता संभालने जा रही है, तो सीएनजी के दाम बढ़ाने की क्या जल्दबाजी थी। इससे उनके इरादों पर संदेह पैदा हो गया है। कल कार्यभार ग्रहण करने पर मैं फाइलों का अध्ययन करूंगा और देखूंगा कि क्या मूल्य वूद्धि को वापस लिया जा सकता है।
  
कल दिल्ली में सीएनजी के दाम 4.50 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए गए थे। अभी तीन महीने पहले भी सीएनजी की कीमत बढ़ाई गई थी।

सीएम की नसीहत...अपनी भाषा पर नियंत्रण रखें अधिकारी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर दंगा राहत शिविरों में किसी भी बच् चे की ठंड से मौत नहीं होने और ठंड से कभी किसी व्यक्ति की मौत नहीं होने सम्बन्धी गृह विभाग के प्रमुख सचिव के विवादास्पद बयान पर आज कहा कि टीवी चैनलों के जमाने में अधिकारियों को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिये।
मुख्यमंत्री ने राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में गृह विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार गुप्ता के बयान पर कहा सवाल-जवाब में कई बार भाषा बदल जाती है। मैं समझता हूं कि अधिकारियों को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिये। उन्होंने कहा आजकल टीवी कैमरा का जमाना है। सब कुछ रिकार्ड हो जाता है। तब हमारे हाथ में कुछ नहीं रहता, बल्कि आपके (मीडिया) के हाथ में होता है। आप उसे जैसे चाहें बार-बार रिवाइंड करके दिखाएं। जो कोई भी हो चाहे वह पार्टी के लोग हो या अधिकारी हो, वे ख्याल रखें कि जब भी प्रेस के सामने जाएं तो कहीं ना कहीं शब्दों का चयन ऐसा हो जिससे भावनाओं को दुख ना पहुंचे। गौरतलब है कि गृह विभाग के प्रमुख सचिव गुप्ता ने कल राहत शिविरों में बच्चों की मौत की जांच सम्बन्धी एक उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट की जानकारी देने के लिये बुलायी गयी प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि राहत शिविरों में ठंड से किसी की मौत नहीं हुई है। ठंड से कभी कोई नहीं मरता है, अगर ठंड से किसी की मौत होती तो दुनिया के सबसे ठंडे इलाके साइबेरिया में कोई जिंदा नहीं बचता। मुख्यमंत्री ने एक अन्य सवाल पर कहा कि सरकार की कोशिश है कि मुजफ्फरनगर का मसला खत्म हो और विस्थापित लोग अपने घर वापस जाएं।

अरविंद केजरीवाल मेट्रो ट्रेन से जाएंगे रामलीला मैदान

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मितव्ययिता का संदेश देने की कोशिश के तहत आप नेता अरविंद केजरीवाल कल दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने मेट्रो ट्रेन से राष्ट्रीय राजधानी स्थित रामलीला मैदान जाएंगे। केजरीवाल ने कौशांबी में आज एक जनता दरबार के बाद कहा कि मैं शपथ ग्रहण समारोह में मेट्रो से रामलीला मैदान जाऊंगा।
  
सूत्रों ने बताया कि केजरीवाल ही नहीं, बल्कि आप विधायक भी मेट्रो से ही शपथ ग्रहण समारोह स्थल पहुंचेंगे। जनता दरबार के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल ने कहा कि इससे पता चलता है कि उपर से लेकर नीचे तक व्यवस्था चरमरा चुकी है और इसे सुधारे जाने की जरूरत है। इसीलिए लोग अपनी समस्याएं लेकर मुख्यमंत्री के पास आ रहे हैं।
  
उन्होंने कहा कि यह एक दुखद स्थिति है, लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। हमें कठिन परिश्रम करना होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत समस्याएं स्थानीय हैं और इनका समाधान नियमित तौर पर मुहल्ला सभाओं के जरिए किया जा सकता है।
  
केजरीवाल ने कहा कि तब लोग अन्य समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री के पास आएंगे, न कि अपनी समस्याएं लेकर।

Thursday, 26 December 2013

'बॉस' बाजी मार गया माइकल जैक्सन से, न्यूजवीक हुआ न्यूजबीस्ट

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अभिनेता अक्षय कुमार का 58.87 मीटर चौड़ा, 54.94 मीटर ऊंचा बॉस फिल्म का पोस्टर, न्यूजवीक का नाम बदलना, समूचे विश्व की अगुवाई के लिए प्रयासरत अमेरिका के राष्ट्रपति का पिता की याद करना, रेसिंग दिग्गज जुआन फैंजियो की कार का लगभग एक अरब 77 करोड़ रूपये में नीलाम होना और बेटे के अवशेषों को हीरों में तब्दील कर हमेशा अपने पास रखने की खबरें बड़ी तो नहीं हैं, लेकिन पाठकों को आकर्षित करने वाली जरूर हैं।
   
पेश है इस बीतते वर्ष की ऐसी ही कुछ रोचक खबरों की झलक।
   
माइकल जैकसन के सबसे बड़े पोस्टर 'दिस इज़ इट' को पीछे छोड़ते हुए इस साल अक्टूबर में बॉलीवुड के अभिनेता अक्षय कुमार अभिनीत 'बॉस' के पोस्टर को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
   
46 वर्षीय सुपरस्टार के प्रशंसकों ने दुनिया का सबसे बड़ा पोस्टर सिर्फ 4 माह में बनाया। पोस्टर 58.87 मीटर चौड़ा और 54.94 मीटर ऊंचा है और इसका अनावरण ब्रिटेन के लिटल ग्रांसडेन एयरफील्ड में तीन अक्टूबर 2013 को किया गया। मैक्रो आटर्स (यूके) ने पोस्टर का निर्माण किया। इसी कम्पनी ने जैकसन का पोस्टर बनाया था।
   
पूर्व समाचार पत्रिका न्यूजवीक का प्रकाशन करने वाली कंपनी ने इस साल फरवरी में अपना नाम बदल लिया और आधिकारिक रूप से न्यूजबीस्ट कहलाने लगी। पत्रिका पिछले 80 सालों से प्रिंट प्रकाशन के बाद गत वर्ष ही पूर्णत: डिजिटल प्रकाशन के रूप में तब्दील हुई है।
   
इस अवसर पर इंस्टाग्राम पर जारी न्यूजवीक की संपादक टीना ब्राउन और यूनिट के कार्यकारी अध्यक्ष बाबा शेट्टी की एक तस्वीर के नीचे लिखा था- हमारा नया अध्याय- और कंपनी का नाम। इन दोनों की तस्वीर एक लोगो के साथ थी जिसके नीचे लिखा था न्यूज-बीस्ट।
सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के संदर्भ में ट्वीट शब्द को ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में शामिल कर लिया गया। ऐसा करते हुए इस प्रतिष्ठित शब्दकोश ने अपना यह नियम तोड़ दिया कि किसी भी नये शब्द को 10 वर्ष तक प्रचलन में रहने के बाद ही दुनिया के इस प्रतिष्ठित शब्द भंडार में शामिल किया जाएगा।
   
अप्रैल में द गाजिर्यन अखबार ने बताया कि उसके ट्विटर अकाउंट्स पर साइबर हमला हुआ और खुद को सीरियन इलेक्ट्रॉनिक आर्मी बताने वाले एक गुट ने इसके लिए जिम्मेदार होने का दावा किया है।
   
प्रतिष्ठित ब्रिटिश अखबार ने अपनी वेबसाइट पर यह भी कहा कि उसके कई ट्विटर पोस्ट से छेड़छाड़ की गई। अखबार के अनुसार, उसने जांच में पाया कि इस साइबर हमले के स्रोत प्रत्यक्ष तौर पर सीरिया के इंटरनेट प्रोटोकॉल पते थे।
   
इस साल 16 जून को फादर्स डे पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के संबोधन में पिता की दूरी का दर्द झलक गया। ओबामा ने खुद पर से बहुत पहले पिता का साया छिन जाने की पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि काश, उनके पिता उनकी जिंदगी का हिस्सा होते और देश में बच्चों के सहयोग से जुड़े कानून का समर्थन करते। राष्ट्रपति के माता-पिता में उसी समय तलाक हो गया था जब वह बच्चे थे। उनकी परवरिश नाना-नानी के यहां हुई। चीन के रक्षा वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे तेज गति से काम करने वाला सुपर कंप्यूटर बनाया जो प्रति सेकेंड 33.6 क्वैडट्रिलीयन गणना कर सकता है। क्वैडट्रिलीयन संख्या में एक के बाद 24 शून्य होते हैं। चीन के राष्ट्रीय रक्षा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने तियान्हे 2 सुपरकंप्यूटर बनाया है जिसकी कीमत 10 करोड़ डॉलर है। इसकी अधिकतम गति 54. 9 क्वैडट्रिलीयन प्रति सेकेंड है।

कैट, फिश और राशा का न्यू ईयर

Image Loadingपिंटी का चेहरा खिल गया। वहीं पास में राशा का पालतू बिल्ला चंगा बैठा था। बहुत दिनों से उसकी नजर इन मछलियों पर थी।

शा ने गिन कर देखा, उसके एक्वेरियम में पूरी दस रंगबिरंगी मछलियां थीं। उनमें से नीली और सिल्वर रंग की मछली तो उसकी लाडली थी। राशा ने अपने स्कूल की दोस्त पिंटी को अपने घर बुलाया था। पिंटी मछलियों को देखते ही चहकने लगी। कभी वो नीली मछली को अपनी उंगलियों से छूती, तो कभी सफेद मछली को हिलाती। बहुत देर तक पिंटी मछलियों से खेलती रही। अचानक उसके मुंह से निकला-काश मेरे पास भी मछलियां होतीं। राशा ने कहा, ‘पिंटी, मैं तुम्हें दूंगी मछलियां, मेरी तरफ से नए साल का गिफ्ट!’ पिंटी खुश हो गई। राशा अपनी मम्मी से मांग कर एक कांच की बोतल ले आई और उसने लंबी वाली जाली से दो मछलियां एक्वेरियम से निकाल कर बोतल में रख दीं। एक का रंग बैंगनी था, दूसरे का पीला। पिंटी का चेहरा खिल गया। वहीं पास में राशा का पालतू बिल्ला चंगा बैठा था। बहुत दिनों से उसकी नजर इन मछलियों पर थी। जब भी वह ड्राइंग रूम में एक्वेरियम के पास पड़े गलीचे पर धूप सेंकने लेटता, उसकी नजरें मछलियों पर ही जमी रहतीं। इतनी सुंदर मछलियां हैं, खाने में भी लजीज होंगी। उसे लगता, काश एकाध मछली एक्वेरियम से टपक कर जमीन पर आ गिरे तो कितना मजा आए। जब उसने देखा कि राशा ने दो मछलियां पिंटी को दे दी हैं, तो उसे बहुत गुस्सा आया। उसने ना दूध पिया ना रोटी खाई। बस राशा और मछलियों को घूरता रहा।

शाम को राशा अपने दोस्तों के साथ बाहर खेलने चली गई। लौट कर आई, तो उसने देखा के चंगा एक्वेरियम के आसपास उछल रहा है। राशा ने चंगा को खूब जोर से डांट कर वहां से भगाया। जब वह मछलियों को दाना देने आई, तो उसने देखा कि एक्वेरियम में सिर्फ छह मछलियां थीं। दो उसने पिंटी को दी थीं। तो फिर दो कहां गईं? उसके मन में चंगा का ख्याल आया। बहुत दिनों से दुष्ट की नजरें थी मछलियों पर। जरूर उसने ही दो मछलियां गड़प कर ली होंगी। राशा दुखी हो गई। उसने रात को चंगा को खाना ही नहीं दिया। अगले दिन सुबह जब वह स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगी, तो मम्मी ने जोर से आवाज दे कर कहा, ‘राशा, जरा मछलियों को खाना दे देना।’ राशा एक्वेरियम के पास पहुंची, तो सभी मछलियां उसे देख लपक-लपक कर तैरने लगीं। उसने गिनना शुरू किया। एक, दो, ओह, आठ, तो रात को इनमें से दो कहां चली गई थीं? शायद उसने ही गलत गिना हो। और सजा मिल गई बेचारे चंगा को। राशा ने देखा, चंगा सोफे के नीचे सो रहा था। उसने बुलाया, तो मुंह फेर कर लेट गया। राशा ने उसके पास जा कर उसे गोद में उठा लिया, ‘गुड कैट। आइ एम सॉरी बेबी, चलो, मैं तुम्हें ढेर सारा दूध देती हूं। आज से मैं कभी तुम पर गुस्सा नहीं करूंगी।’ राशा के हाथ से चंगा गटागट एक गिलास दूध पी गया। मछलियों को बाय बोल कर राशा स्कूल चली गई। लौट कर आई, तो मम्मी ने बताया कि कुछ देर पहले जब वे कमरे में आईं, तो उन्होंने एक्वेरियम की दो मछलियों को जमीन पर गिरा पाया। और चंगा था कि लगातार म्याऊं-म्याऊं करते हुए गुर्रा रहा था। मम्मी की आवाज सुन कर भी चंगा वहां से नहीं गया। किसी तरह मम्मी ने उन दोनों मछलियों को एक्वेरियम में डाला। मम्मी ने कहा, ‘चंगा बहुत बदमाश हो गया है। उसे तुम बिलकुल खाना मत देना। उसे आज ही मौसी के घर छोड़ आते हैं। वरना किसी दिन वह सारी मछलियां खा जाएगा।’ राशा को यकीं नहीं हुआ कि चंगा बदमाश हो सकता है। उसका सबसे अच्छा दोस्त है चंगा, और मछली खानी होती, तो कल ही ना खा लेता? पर मम्मी चंगा को शाम को अपने साथ ले गई और चंगा बेचारा राशा की तरफ देख कर शिकायतें करता रहा। चंगा के जाने के बाद राशा का घर में बिलकुल मन नहीं लगा। वह पिंटी के पास चली गई। पिंटी घर में रो रही थी और अपने छोटे भाई पिंकू को डांट रही थी, ‘तुम्हारी वजह से मेरी दोनों मछलियां मर गईं। तुमने उन्हें पानी से क्यों निकाला? तुमने कहा था कि तुम राशा के घर से मेरी फेवरेट ब्लू और सिल्वर मछलियां ले आओगे, कहां हैं?’ पिंटू ने धीरे से कहा, ‘दीदी, मैं रात को लाया तो था, पर तुम्हें वो दोनों पसंद ही नहीं आईं। इसलिए मुझे वापस जा कर उन्हें एक्वेरियम में डालना पड़ा। और पता है इसमें कितना रिस्क है, चंगा कैट ने तो उछल कर मुझे खरोंच लिया था। मछलियों के पास जाने ही नहीं दे रहा था। आज दोपहर को मैं उनके घर गया, दो मछलियों को पकड़ भी लिया, उनमें वो तुम्हारी फेवरेट ब्लूवाली भी थी, पर पता नहीं कहां से चंगा आ गया और मुझे पंजा मारने लगा। मुझे दौड़ कर वहां से भागना पड़ा।’ राशा को बहुत बुरा लगा। कल उसने घर में पिंकू को देखा था, पर उसने कहा था कि वह पिंटी की होम वर्क बुक लेने आया है। वह हमेशा आता था घर में, कभी चंगा से खेलने, तो कभी उसके घर के बाहर लगे झूले पर झूलने। तो उसकी कारस्तानी थी ये सब। राशा रोने लगी। पिंटी बाहर निकली। उसे पता चल गया कि राशा ने सब सुन लिया है। राशा ने रोते-रोते कहा—तुम मेरी बेस्ट फेंड्र हो कर मेरी फेवरेट फिश चुराने का प्लान कैसे बना सकती हो? पिंटी रोने लगी, ‘आगे से कभी नहीं करूंगी, राशा। सॉरी। कभी नहीं। मुझे बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या करूं?’ राशा ने आंसू पोंछ कर कहा, ‘अभी मौसी के घर जाओ और मेरे दोस्त चंगा को ले कर आओ। आज मैं सिर्फ उसे पार्टी दूंगी।’ राशा ने तय कर लिया कि आगे से कभी वह चंगा पर शक नहीं करेगी और पापा से कह कर उसे खूब सारी मछलियां मंगवा कर खिलाएंगी। अब उसे भी तो चंगा को कुछ न्यू ईयर गिफ्ट देना होगा।

नारायणमूर्ति की वापसी पर इंफोसिस का शेयर 50% चढ़ा

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इंफोसिस में उसके संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति की वापसी के बाद कंपनी का शेयर करीब 50 प्रति शत चढ़ा है। हालांकि इस साल जून से इंफोसिस के कई बड़े अधिकारियों ने कंपनी छोड़ दी है, उसके बावजदू शेयर का भाव चढ़ा है।
छह महीने पहले नारायणमूर्ति की वापसी के बाद कंपनी के आठ बड़े अधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। इंफोसिस के बीपीओ कारोबार के प्रमुख वी बालाकृष्णन ने इस महीने कंपनी से इस्तीफा दे दिया। वह कंपनी के निदेशक मंडल में भी शामिल थे। इंफोसिस का शेयर जून से अबतक 48.85 प्रतिशत चढ़ा है। हालांकि बालकृष्णन के इस्तीफे के बाद शेयर भाव 2 प्रतिशत से अधिक नीचे आया है। 20 दिसंबर को आईटी कंपनी का शेयर 52 सप्ताह के उच्च स्तर 3,569.90 रुपये प्रति इक्विटी पर था। नारायमूर्ति की वापसी के बाद कंपनी का बाजार पूंजीकरण 65,704 करोड़ रुपये बढ़ा है। एंजल ब्रोकिंग की शोध विश्लेषक :आईटी: अंकिता सोमानी ने कहा कि हमारा मानना है कि बालकष्णन के निकलने से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह कंपनी की आय के बड़े हिस्से का नेतृत्व नहीं कर रहे थे लेकिन जो कुछ हो रहा है वह बताता है कि कंपनी का प्रबंधन संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। बालकृष्णन के अलावा बासब प्रधान तथा अशोक वेमुरी ने भी इस्तीफा दिया है।

हफ्ते के 12 घंटे रूप पर खर्च करती हैं महिलाएं

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महिलाएं अपने रंग-रूप के प्रति कितनी सजग होती हैं यह बात सभी जा नते हैं। लेकिन कम लोगों को ही यह अंदाजा होगा कि महिलाएं हफ्ते के 12 घंटे इसी चिंता में बिता देती हैं। एक अध्ययन की मानें तो महिलाएं अपने लिए पहनावा चुनने में हर हफ्ते 50 मिनट खर्च कर देती हैं।
शोधकर्ताओं ने क्रिसमस और अन्य मौकों पर वजन, रंग-रूप और पहनावे को लेकर महिलाओं की चिंता का आकलन किया। उन्होंने देखा कि इसके लिए वे साल के 627 घंटे और 27 मिनट बर्बाद कर देती हैं। अध्ययन दर्शाता है कि पहनावा चुनने के लिए 50 मिनट खर्च करने के बाद वह अगले एक घंटे और 32 मिनट इस बात की चिंता में खर्च कर देती हैं कि पहना हुआ ठीक लग रहा है या नहीं। इसके अलावा वह एक घंटे और 46 मिनट अपने वजन के बारे में सोचते हुए बिताती हैं। लाइक्रा ब्यूटी नामक संस्था ने 2000 महिलाओं पर सर्वे कर ये निष्कर्ष निकाले हैं।