Sunday, 29 September 2013

सॉरी मम्मी

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हमेशा शरारत और उछलकूद करने वाला चीनू बंदर आज स्कूल के बगीचे में गुमसुम बैठा था। इंटरवल का समय था। उसके सभी दोस्त, चिक्की खरगोश, पिंकी गिलहरी, टीपू डॉगी और मन्नू हाथी झूला झूल रहे थे। पार्क में खासी रौनक थी। पेड़ों पर चिडियां और तोते चहक रहे थे। चीनू के सारे दोस्त मस्ती कर रहे थे। सबने उसे खेलने के लिए बुलाया, पर चीनू बंदर अपनी जगह से हिला भी नहीं। चिक्की खरगोश उसका पक्का दोस्त  था। उसे चीनू का यूं चुपचाप रहना कुछ ठीक नहीं लग रहा था। उसने एक बार फिर आवाज दी, चीनू, क्या हुआ, यहां आओ, देखो इस झूले में कितना मजा आ रहा है। पर चीनू चुप रहा। उसने चिक्की की बात का कोई जवाब नहीं दिया। अब चिक्की खरगोश से नहीं रहा गया। वह कूदकर उस बेंच पर पहुंच गया, जहां चीनू बंदर चुपचाप बैठा था।
चिक्की खरगोश ने पूछा, क्या हुआ चीनू, तुम्हारी तबियत तो ठीक है न। चीनू बंदर ने धीरे से कहा, हां मैं ठीक हूं, लेकिन मेरी मम्मी...। यह कहते ही उसकी आंखों में आंसू आ गए। चिक्की ने घबराते हुए पूछा, क्या हुआ बीना आंटी को। चीनू बोला, मेरी मम्मी फर्श पर गिर पड़ीं, उनका पैर फिसल गया, अब वे अस्पताल में हैं, यह सब मेरी वजह से हुआ, मेरी शरारत की सजा मेरी मम्मी को मिली। चिक्की खरगोश ने उसे समझाते हुए कहा, देखो चीनू, चिंता मत करो, आंटी जी जल्द ठीक हो जाएंगी। पर तुम बताओ यह सब कैसे हुआ। चीनू बंदर ने सुबकते हुए कहा, दरअसल मैं स्कूल से लौटने के बाद हर रोज घर में अपने खिलौने और कॉपी-किताबें फैला देता था। मम्मी मुझे बार-बार मना करतीं, पर मैं उनकी नहीं सुनता। कल भी ऐसा ही हुआ। स्कूल से लौटते ही मैंने सारे खिलौने बिखेर दिए। मम्मी ने मुझे डांटा और समझाया भी। इसके बाद उन्होंने बिखरा हुआ सारा सामान समेटकर रख दिया। फिर मैं फ्रिज से पानी की बोतल निकालकर खेलने लगा। मम्मी ने मुझे मना किया और हिदायत भी दी कि मैं फर्श पर पानी न फैलाऊं। पर मैंने उनकी बात नहीं मानी। मैंने बोतल खोलकर पानी फर्श पर गिरा दिया। बेचारी मम्मी तो किचन में मेरे लिए मेरा मनपसंद हलवा बना रही थीं। जैसे ही वह हलवा लेकर किचन से बाहर निकलीं, उनका पैर फिसल गया और वह गिर पड़ीं। चिक्की ने उत्सुकता से पूछा, फिर क्या हुआ चीनू। चीनू बोला, फर्श पर गिरते ही मम्मी बेहोश हो गईं। मैं मम्मी को उठाता रहा, पर वह कुछ न बोलीं। फिर मैंने पापा को फोन कर बुलाया और तब हम उन्हें लेकर अस्पताल गए। डॉक्टर ने कहा है कि उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया है और वह एक महीने तक चल-फिर नहीं पाएंगी। इतना बताने के बाद चीनू फिर रोने लगा। चिक्की ने कहा, हां यह सब तुम्हारी शरारत की वजह से ही हुआ है, लेकिन अब रोने से कुछ नहीं होगा। अब तुम्हें खुद से वादा करना चाहिए कि तुम ऐसी शरारत दोबारा कभी नहीं करोगे। चीनू बोला, हां, मैं अब मम्मी को कभी तंग नहीं करूंगा। मैं उनका कहना मानूंगा और घर के काम में उनकी भी मदद करूंगा। चिक्की ने कहा, आओ, हम अस्पताल चलते हैं आंटी जी का हालचाल जानने। इसी बीच पिंकी गिलहरी, टीपू डॉगी और मन्नू हाथी भी वहां आ गए। पूरी बात जानने के बाद सबने तय किया वे लोग अस्पताल जाएंगे। चीनू बंदर ने कहा कि उन्हें ऑटो से अस्पताल जाना चाहिए, लेकिन मन्नू हाथी ने सलाह दी कि मेट्रो से चलना ठीक रहेगा, क्योंकि मेट्रो उन्हें जल्द पहुंचा देगी। आखिर सबको समय पर अपने-अपने घर भी पहुंचना होगा। इस पर पिंकी गिलहरी ने सलाह दी, दोस्तो, अस्पताल जाने से पहले हम सबको अपने मम्मी-पापा को जानकरी देनी चाहिए, ताकि वे चिंता न करें। टीपू डॉगी ने कहा, हां यह ठीक रहेगा। सबने अपने-अपने घर पर फोन कर दिया। इसके बाद वे सब अस्पताल की ओर चल पड़े। अस्पताल में चीनू की मम्मी बेड पर लेटी थीं। पिंकी गिलहरी, टीपू डॉगी, चिक्की खरगोश और मन्नू हाथी ने उनसे हालचाल पूछा। पिंकी गिलहरी ने पूछा, आंटी, अब आप कैसी हैं। बताइये हम सब आपकी कैसे मदद कर सकते हैं। चीनू की मम्मी ने कहा, अरे नहीं बच्चो, मुझे कोई खास चोट नहीं लगी है। हां, तुम सब मेरे चीनू का ख्याल रखना। पर यह तो बताओ कि चीनू है कहां? चिक्की खरगोश ने हिचकते हुए कहा, दरअसल आंटी आपको चोट लगने की वजह से वह बहुत दुखी है। उसे अपनी गलती का एहसास है। बेचारा बाहर खड़ा है। उसे आपके समाने आने की हिम्मत ही नहीं हो रही है। चीनू की मम्मी ने कहा, कोई बात नहीं, अब मैं ठीक हूं। कहां है चीनू? उसने आज कुछ खाया या नहीं। चीनू कमरे के बाहर खड़े होकर सारी बातें सुन रहा था। मम्मी की बात सुनते ही वह कमरे में आ गया और उनसे लिपटकर रोने लगा। उसने कहा, सॉरी, मम्मी। आप मेरा कितना ख्याल रखती हैं, लेकिन मैंने...। इतना कहकर वह सुबकने लगा। बीना आंटी ने उसे समझाते हुए कहा, चीनू बेटा, रोना बंद करो। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। चीनू बोला, मम्मी, अब मैं कभी पानी नहीं फैलाऊंगा, कभी सामान नहीं बिखेरूंगा। मैं कभी आपको तंग नहीं करूंगा। तभी डॉक्टर अंकल आ गए। उन्होंने कहा, चीनू मास्टर घबराने की जरूरत नहीं है। मैं कल ही तुम्हारी मम्मी को डिस्चार्ज कर दूंगा। मैंने उनके पैर में प्लास्टर चढ़ा दिया है। अब एक महीने तक वह बेड पर रहेंगी और तुम्हें उनका ख्याल रखना होगा। चीनू बोला, थैंक्यू अंकल, आप चिंता मत कीजिए, मैं मम्मी का खूब ख्याल रखूंगा। यह सुनते ही चीनू की मम्मी ने उसे गले लगा लिया। इसके बाद पिंकी गिलहरी, टीपू डॉगी, चिक्की खरगोश और मन्नू हाथी ने बीना आंटी से कहा, अच्छा आंटी हम अपने घर जाते हैं, आप अपना ख्याल रखिएगा। रास्ते में चिक्की खरगोश ने कहा, दोस्तो, इस घटना ने हम सबको एक सबक दिया है। आज से हम सब अपनी मम्मियों को तंग नहीं करेंगे। सारे दोस्तों ने एक स्वर में कहा, आज से हम सब अपने मम्मी-पापा का कहना मानेंगे। वे हमें कितना प्यार करते हैं। हमें उन्हें यूं दुखी नहीं करना चाहिए।

पेड़ के 50 पैर?

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धीरे-धीरे दोस्तों का आना कम हो गया और तेजू का मन चिडिम्यों की बातें सुनने में, उनके बच्चों को खेलता देखने में रमने लगा। आखिरकार एक दिन पग्गू अपने बच्चों के साथ वहां से उड़ गई। उस दिन तेजू को लगा कि बस यही मौका है यहां से भागने का। उसने अपने जमीन में धंस गए पचास पैर बाहर निकालने की कोशिश की।
वो पेड़ थोड़ा अजीब था। तुम्हारी तरह उसका भी एक नाम था तेजू। उसका यह नाम रखा था उसके दोस्त बिल्लू हाथी ने। तेजू इसलिए, क्योंकि पेड़ बिल्लू हाथी, चारू जिराफ और पिक्की हिरण से तेज दौड़ता था। पेड़ दौड़ता था? बिलकुल, उसके पचास पैर जो थे। तेजू मस्तमौला पेड़ था, हरे-हरे पत्ते वाला। अपने ऊपर कभी  किसी पक्षी को घोंसला बनाने नहीं देता, जैसे ही कोई चिडिया या तोता तेजू के ऊपर बैठने की कोशिश करते, तेजू तेजी से भागने लगता और बेचारे डर कर भाग जाते। चारू, बिल्लू और पिक्की तेजू के पक्के यार थे। अकसर वे चारों सैर पर निकल पड़ते, कभी पहाड़ पर रेस लगाने लगते, तो कभी बीच जंगल में पिकनिक मनाते। चारू, बिल्लू और पिक्की तेजू के घने छायादार पत्तों  के नीचे सो जाते। एक दिन शाम की बात है। तेजू नदी किनारे अपने दोस्तों के साथ गपशप कर रहा था। जब वह चलने को हुआ, तो उसे चींचीं की जोर की आवाज सुनाई दी। तेजू ने गुस्से से पूछा, ‘ये मेरे ऊपर कौन आकर बैठ गया है? क्या तुम्हें पता नहीं है कि मैं एक जगह ठहरने वाला पेड़ नहीं हूं। मेरे पचास पांव हैं और मैं हमेशा चलता रहता हूं।’
चींचीं करने वाली पग्गू चिडिया बोली, ‘देखो पेड़, मैं बहुत दूर से आई हूं। तुम्हारे जंगल में नई हूं। मैंने बस आधे घंटे पहले अंडा दिया है। अगर तुम अभी हिलोगे, तो मेरे अंडे गिर कर टूट जाएंगे।’ पग्गू चिडिया रोने लगी, तो तेजू का दिल पिघल गया, ‘अच्छा रोओ मत। मैं अभी कहीं नहीं जा रहा। पर सुबह होने से पहले अपने अंडे लेकर तुम कहीं दूर निकल जाना।’ पग्गू चिडिया सोच में पड़ गई कि वह सुबह तक अंडों को लेकर कैसे जाएगी? कहां जाएगी? सुबह हुई तो तेजू ने अपने पत्ते हिलाने शुरू किए, चिडिया जाग गई और उड़ कर उसके पास आ गई, ‘पेड़ भैया, प्लीज, मुझे कुछ दिन यहां रहने दो। जैसे ही अंडों से बच्चे बाहर निकलेंगे, मैं यहां से चली जाऊंगी।’ चिडिया की रोनी आवाज सुन तेजू मान गया। कुछ ही दिनों की तो बात है। इसके बाद चिडिया अपने बच्चों के साथ हो जाएगी फुर्र। तेजू से वैसे तो रोज ही बिल्लू, चारू और पिक्की मिलने आते थे, पर एक ही जगह पर बैठे-बैठे सब बोर होने लगे। बिल्लू मनमौजी था, उसे घूमने-फिरने में मजा आता था। अब वे तीनों कभी तेजू के नीचे बैठ कर ताश खेलते, तो कभी कुछ पका कर खाते। धीरे-धीरे पग्गू चिडिया के अलावा भी दूसरी कई चिडिया तेजू पर अपना घोंसला बना कर रहने लगीं। एक दिन तेजू ने रीनू कोयल को कहते सुना, ‘इस जंगल का सबसे घना पेड़ है तेजू। मैं तो यहीं घोंसला बना कर रहूंगी।’ तेजू जोर से चिल्लाया, ‘नहीं, मेरे ऊपर कोई घोंसला नहीं बनाएगा।’ रीनू तुनक कर बोली, ‘जब पग्गू यहां रह सकती है, तो मैं क्यों नहीं?’ तेजू चुप रह गया। पर उसने तय कर लिया था कि जिस दिन पग्गू के चूजे अंडे से बाहर आएंगे और उड़ने लगेंगे, वह अपनी डालियां झटक कर दूसरे घोंसलों को गिरा देगा। पग्गू के बच्चे बड़े होने लगे। दिन भर वे चहचहाते, कभी इस डाल, कभी उस डाल कूदते। फिर धीरे-धीरे वे उड़ने लगे। तेजू के तीनों दोस्त उसका इंतजार करके थक गए। एक दिन चारू ने कह ही दिया, ‘तेजू, देख मुझे नहीं लगता कि अब कभी तू हमारी तरह दौड़ पाएगा। तेरे ऊपर तो घोंसलों की भरमार है। तेरे पैर भी अब जमीन के अंदर धंसने लगे हैं।’ तेजू ने लाचारी से उसकी तरफ देख कर कहा, ‘बस कुछ दिन और मेरे दोस्त।’ धीरे-धीरे दोस्तों का आना कम हो गया और तेजू का मन चिडियों की बातें सुनने में, उनके बच्चों को खेलता देखने में रमने लगा। आखिरकार एक दिन पग्गू अपने बच्चों के साथ वहां से उड़ गई। उस दिन तेजू को लगा कि बस यही मौका है यहां से भागने का। उसने अपने जमीन में धंस गए पचास पैर बाहर निकालने की कोशिश की। पर यह क्या? उसके पैर तो जमीन से निकले ही नहीं। वे सभी जमीन के अंदर जा कर जड़ बन गए थे। तेजू उदास हो गया कि अब वह कभी पहले की तरह दौड़ नहीं पाएगा, खेल नहीं पाएगा। शाम को जब सब चिडियां और दूसरे पक्षी थक-हार कर घर लौटे और उनके बच्चे हंसने-खेलने लगे तो तेजू की सब शिकायतें दूर हो गईं। अब यही तो उसका परिवार है, और कितना मजा आता है सबके साथ रहने में और सबको सहारा देने में। उस दिन से तेजू राम वहीं जम गए। अब तो उसे तेजू कोई बुलाता भी नहीं है। उसके नए दोस्तों को उसका यह नाम नहीं पता ना। तुम कभी जंगल जाओ, तो सबको बता देना कि कभी उसका नाम तेजू था और उसके पचास-पचास पैर थे और सबसे बड़ी बात... वह हिरण से तेज दौड़ता था।

2 अक्तूबर

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नाटक को सबने खूब पसंद किया। खासतौर पर धीरज के महात्मा गांधी के निभाए किरदार की सबने दिल खोलकर तारीफ की। इसके लिए उसे प्रिंसिपल सर से इनाम भी मिला। इनाम मिलने के पश्चात् धीरज यह सोच रहा था कि जब उसके द्वारा एक अच्छे इनसान के निभाए रो ल से सब इतना खुश हैं तो अगर वह खुद भी अच्छा बन जाए तो लोगों को कितनी खुशी होगी।
आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला धीरज अपनी कक्षा का सबसे शरारती लड़का था। नाम भले ही उसका धीरज था, लेकिन उसमें नाममात्र का भी धीरज नहीं था। उसे हर काम की जल्दी रहती थी। अपनी इसी जल्दबाजी की आदत के कारण वह अकसर गलती करता और पकड़े जाने पर अपना दोष दूसरों के सिर मढ़ देता। अपनी इस आदत की वजह से उसे कई बार डांट भी खानी पड़ती थी। लेकिन इसके बावजूद उसमें कोई सुधार नहीं हुआ। दरअसल, धीरज अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके माता-पिता दोनों नौकरी करते थे। इकलौता बेटा होने के कारण उसकी हर इच्छा कहते ही पूरी हो जाती थी। इसी वजह से धीरे-धीरे उसकी आदतें बिगड़ रही थीं। ऐसा नहीं है कि उसकी इन आदतों से उसके माता-पिता अनजान थे। उन्होंने उसे कई बार प्यार से और कई बार डांट कर भी समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ। यही हाल उसका स्कूल में था। टीचरों के अलावा उसके दोस्त भी उसे समझाते, लेकिन उसने तो जैसे न सुधरने की ठान ली थी। चूंकि वह पढ़ने-लिखने में ठीक-ठाक था और स्कूल की सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था, इसलिए उसके टीचर और दोस्त उसकी इस कमी के बावजूद उसे माफ कर दिया करते थे। लेकिन वे सब अंदर ही अंदर उससे दुखी थे। वे चाहते थे कि वह शरारतें करना बंद कर एक अच्छे विद्यार्थी की तरह रहे। आज इतिहास का पीरियड खत्म होने के बाद मास्टरजी ने सब बच्चों को रोक लिया। उन्होंने कहा, ‘तुम सब बच्चों को एक जरूरी बात बतानी है।’ ‘क्या बात, मास्टरजी,’ सब बच्चों ने एक साथ कहा। ‘तुम्हें याद है, आज से सातवें दिन कौन सी तारीख है?’ मास्टरजी ने बच्चों से पूछा। सब बच्चों ने एक साथ कहा, ‘दो अक्तूबर, यानी हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दिवस।’ ‘ठीक कहा बच्चो! एक बात और, हर साल की तरह इस बार भी स्कूल में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में एक नाटक भी खेला जाएगा, जिसका शीर्षक है— दो अक्तूबर। जो बच्चे इस नाटक में हिस्सा लेना चाहते हैं, वे अपना नाम मुझे लिखवा दें, क्योंकि कल से ही इसकी रिहर्सल शुरू होनी है। समय कम है।’ धीरज ने भी अपना नाम लिखवा दिया। अगले दिन क्लास के बाद नाटक में हिस्सा लेने वाले छात्र इतिहास के शिक्षक शर्मा जी के पास पहुंच गए। शर्मा जी ने सब बच्चों को उनका रोल समझा दिया। धीरज को इस नाटक में महात्मा गांधी का रोल मिला था। सबको उनका रोल समझा दिया गया। रिहर्सल शुरू हो गई। मास्टर जी छात्रों की रिहर्सल से खुश थे, बस चिंता उन्हें धीरज को लेकर थी, क्योंकि नाटक के मुख्य किरदार गांधी जी का अभिनय वह ठीक से नहीं कर पा रहा था। उन्होंने अपनी चिंता उसे बता दी। धीरज भी समझ नहीं पा रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है। उसने मास्टर जी को भरोसा दिलाया कि वह इस रोल को अच्छी तरह से निभाएगा। इसी तरह रिहर्सल करते हुए दो दिन बीत गए, लेकिन धीरज की समस्या वहीं की वहीं बनी हुई थी। रिहर्सल के बाद मास्टर जी ने उसे अपने पास बुलाया और कहा, ‘जानते हो, तुम्हारी क्या समस्या है? तुम क्यों नहीं यह रोल ढंग से कर पा रहे हो?’ ‘नहीं मास्टर जी, मैं तो पूरी कोशिश कर रहा हूं, लेकिन फिर भी पता नहीं मुझे क्यों परेशानी हो रही है, धीरज ने कहा।’ मास्टर जी ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, ‘मैं बताता हूं कि असल परेशानी क्या है।’ धीरज आश्चर्य से उनकी ओर देखने लगा। मास्टर जी ने कहा, ‘तुम कुछ दिन अपनी शरारतें और झूठ बोलने की आदत छोड़ दो और गांधी जी जैसा सच्चा और ईमानदार बनने की कोशिश करो। सब ठीक हो जाएगा। तुम्हारे लिए यह मुश्किल है, लेकिन कोशिश करके देखने में कोई बुराई नहीं हैं।’ धीरज को भी लगा कि अगर इससे उसे अपना रोल अच्छी तरह से करने में मदद मिलती है तो मास्टर जी की बात मान लेने में कोई बुराई नहीं है। यह सोच कर वह रिहर्सल की तैयारी में लग गया। आखिर दो अक्तूबर का दिन भी आ गया। स्कूल के हॉल में सब इकट्ठा थे। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रिंसिपल सर ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्र पर माला पहनाई और उनके भाषण के बाद रंगारंग कार्यक्रम शुरू हुए। कार्यक्रम के अंत में उनके नाटक की बारी आई। शर्मा जी ने मंच से कहा, ‘अब आपके सामने एक नाटक प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका शीर्षक है— दो अक्तूबर।’ पर्दा उठते ही नाटक शुरू हो गया। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों ने हमारे देश को विदेशी शासकों के चंगुल से आजाद करवाया। हमें भी इस आजादी के महत्त्व को समझना चाहिए और इस आजादी का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। नाटक खत्म होने के बाद हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नाटक को सबने खूब पसंद किया। खासतौर पर धीरज के महात्मा गांधी के निभाए किरदार की सबने तारीफ की। इसके लिए उसे प्रिंसिपल सर से इनाम भी मिला। इनाम मिलने के पश्चात् धीरज यह सोच रहा था कि जब उसके द्वारा एक अच्छे इनसान के निभाए रोल से सब इतना खुश हैं तो अगर वह खुद भी अच्छा बन जाए तो लोगों को कितनी खुशी होगी। आज उसे सारी बातें समझ में आ रही थीं कि क्यों उसके माता-पिता, टीचर्स और दोस्त उसे अच्छा बनने की सलाह देते थे। यह सोचते-सोचते उसने निश्चय किया कि आज से वह सबको अच्छा इनसान बनकर दिखाएगा। सिर्फ दूसरों की नजर में ही नहीं, बल्कि खुद की नजर में भी।

बेगमों को परहेज बिकिनी से

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इधर बॉलीवुड में एक नई परम्परा चल पड़ी है। जिन हीरोइनों को शादी से पहले ‘कहानी की मांग पर’ कि सी भी तरह के सीन देने से परहेज नहीं था, शादी के बाद अचानक से वे बिकिनी पहन कर शूट करने में ना-नुकुर करने लगी हैं। यानी वही कहावत है न- नौ सौ चूहे खा बिल्ली हज को चली।
बॉलीवुड की शादी-शुदा हीरोइनों और हॉलीवुड की मैरिड हॉट हीरोइनों में क्या फर्क है? हेल बेरी, जूलिया रॉबर्ट्स, जेनिफर एनिस्टन, कैट विंस्लेट ने शादी के बाद भी जम कर हॉट सीन्स दिए, टू पीस बिकिनी में नजर आईं और गर्मागर्म रोमांटिक दृश्यों को उतनी ही गर्मजोशी से करती नजर आईं। और हमारे यहां? तिग्मांशु धूलिया अपनी अगली फिल्म बेगम समरू के लिए करीना, रानी या ऐश्वर्या में से किसी को लेना चाहते थे। यों तो ये सभी नायिकाएं साहब बीवी और गैंगस्टर बनाने वाले तिग्मांशु के साथ काम करने को तैयार थीं, पर जैसे ही पता चला कि इस फिल्म में बेगम समरू को कुछ हॉट दृश्य देने हैं, कम कपड़ों में दिखना है, सबने एक के बाद कन्नी काट ली। करीना कुछ दिन पहले अपने परिवार के साथ विदेश में छुट्टी मनाने गई थीं। वहां अपनी सास शर्मिला के सामने बिकिनी में आ गईं। इस बात पर हमारे यहां हंगामा मच गया। लौट कर आने के बाद करीना ने सफाई दी कि वह एक मॉडर्न ख्यालात की युवती है और उसकी सास को इस बात से फर्क नहीं पड़ता। अपने जमाने में वे खुद भी बिकिनी पहनती थीं। उसी करीना को जब बेगम समरू की स्क्रिप्ट सुनाई गई, उसने यह कह कर मना कर दिया कि वह कम कपड़ों में अपने आपको सहज महसूस नहीं करती। हार कर तिग्मांशु रानी के पास गए। रानी तो अब लगभग सारे काम अपने होने वाले पति आदित्य चोपड़ा से पूछ कर ही करती हैं। आदित्य वैसे भी पिछले साल रानी के ‘ड्रीमम वेकपम..’ गाने के एक्सपोज से आहत थे। उन्होंने एकदम से मना कर दिया। रानी ने भी करीना की तरह दलील दी कि वह बोल्ड सीन नहीं कर पाएगी। ऐश्वर्या तो वैसे भी अब पहले की तरह छरहरी नहीं रहीं, लेकिन धूम 2 की तरह वह वजन घटा कर कभी भी हॉट सीन कर सकती हैं। ऐश्वर्या को स्क्रिप्ट पसंद आई, पर वह इसमें कुछ रद्दोबदल चाहती थीं। तिग्मांशु बॉलीवुड की हीरोइनों के डबल स्टैंडर्ड से परेशान हैं। वे यह नहीं चाहते कि उन पर फिल्म से बोल्ड सीन्स कम करने का दबाव डाला जाए। बॉलीवुड की शादीशुदा नायिकाओं के पास यों तो काम की कमी नहीं, लेकिन अब वे अपनी शर्तों पर काम करना चाहती हैं। महेश भट्ट कहते हैं कि अगर शादीशुदा हीरोइन प्रोफेशनल है तो उसे किसी भी किस्म के रोल से परहेज नहीं होना चाहिए। चाहे सैफ अली खान हों या आदित्य चोपड़ा या अभिषेक बच्चन, ये सब चाहते हैं कि उनकी बीवियां लाइम लाइट में तो रहें, पर साथ ही उनके परिवार की इज्जत भी बनी रहे। इस मामले में विद्या बालन थोड़ी अलग हैं। शादी से पहले उन्होंने डर्टी पिक्चर की और शादी के बाद घनचक्कर में इमरान हाशमी के साथ गर्मागर्म सीन दिये। अब माना जा रहा है कि तिग्मांशु अपनी फिल्म के लिए हॉलीवुड की किसी हीरोइन को साइन करने जा रहे हैं।

कैट को चाहिए रणबीर के साथ हृतिक

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इस साल कैटरीना अलग-अलग वजहों से चर्चा में रही हैं। एक तरफ तो कैट कहती हैं कि इस समय उनका पूरा ध्यान फिल्मों में है, दूसरी तरफ वो रणबीर कपूर और हृतिक रोशन को अपना एक जै सा दोस्त बताती हैं।
हृतिक के साथ ‘बैंग-बैंग’ को लेकर वह गजब की उत्साहित हैं, तो रणबीर कपूर के साथ आने वाली ‘जग्गा जासूस’ में वह गर्मागर्म दृश्य देने को तैयार हैं। कैटरीना से एक ताजातरीन मुलाकात
कैटरीना कैफ इन दिनों बहुत कम फिल्में कर रही हैं। ‘जब तक है जान’ के बाद उनकी कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई है, पर यह बात वह मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है, ‘ऐसा तो नही है। आमिर खान के साथ ‘धूम 3’ की है, जो क्रिसमस पर रिलीज होने वाली है। इसमें मेरे काफी एक्शन सीन हैं। इसमें कई स्टंट सीन मैंने खुद किए हैं। इसके अलावा मैं हृतिक रोशन संग एक्शन फिल्म ‘बैंग बैंग’ में आलिया मार्टिन का किरदार निभा रही हूं, जो टॉम क्रूज-कैमरून डियोस की फिल्म ‘नाइट एंड डे’ का भारतीय संस्करण है। इसके निर्देशक सिद्धार्थ आनंद हैं। मैंने एक्शन सीन के लिए काफी मेहनत की है और कुछ ट्रेनिंग भी हासिल की है। मैं चुनिंदा और बेहतरीन काम करने में यकीन रखती हूं। मैं कभी किसी रेस का हिस्सा नहीं बनी।’ कैट को लगता है कि यह वक्त करियर बनाने का है, शादी करने का नहीं। कैटरीना, रणबीर कपूर को एक बेहद सुलझा हुआ व्यक्ति मानती हैं। बस, इससे ज्यादा कुछ नहीं कहतीं। अंदर की खबर है कि कैटरीना फिलहाल रणबीर के बजाय हृतिक से सलाह-मशविरा करती दिख रही हैं। उनके दोस्तों का मानना है कि रणबीर की वजह से कैटरीना अच्छी-खासी एक्सपोज हो गई हैं। हृतिक की कैट से बढ़ती दोस्ती न रणबीर के गले उतर रही है और न हृतिक की पत्नी सुजैन के। हालांकि रणबीर उनको लेकर काफी सीरियस नजर आ रहे हैं। खबर है कि ‘बेशरम’ में वे कैट को ही चाहते थे, लेकिन फिल्म के निर्देशक अभिनव कश्यप के सामने उनकी एक न चली। फिल्म ‘कृष 3’ में राकेश रोशन कैटरीना कैफ को लेना चाहते थे, पर उनके इनकार के बाद ‘कृष 3’ में कंगना आ गईं। हालांकि कैट का कुछ और कहना है, ‘ऐसा कुछ नहीं है। जिस तरह से मीडिया सोचता है, वैसा हमेशा नहीं होता। राकेश रोशन ने शुरू से ही ‘कृष 3’ के लिए कंगना के ही नाम पर विचार किया था। वह दूसरी फिल्मों में व्यस्त थीं, तब उन्होंने मुझसे संपर्क किया था। बॉलीवुड में तकदीर बहुत निराले खेल करती रहती है। मेरी तकदीर ने ही मुङो सफल बनाया है।’ सलमान हैं गाइड
बॉलीवुड में हमेशा यह चर्चा होती रहती है कि कैटरीना कैफ सलमान खान की सलाह लिए बगैर काम नहीं करतीं। इस पर वह कहती हैं, ‘क्या किसी से सलाह लेना गुनाह है? जब मैं बॉलीवुड से जुड़ी तो उन्होंने मुझे एक सही राह दिखाई। उन्होंने मुझे हमेशा सही सलाह दी। फिर अब हम एक-दूसरे को कई वर्षों से जानते हैं।’
इन दिनों बॉलीवुड में हर कोई अंतरराष्ट्रीय फिल्में करने के लिए बेताब नजर आता है, लेकिन कैटरीना बॉलीवुड में ही खुश हैं। वह कहती हैं, ‘बॉलीवुड के अलावा दूसरी जगह फिल्में करने के पीछे कोई खास वजह होनी चाहिए। मुंबई मेरा घर है। यहां मुझे जो प्यार, जो पहचान मिली है, उससे मैं बहुत उत्साहित हूं। वैसे मुझे हॉलीवुड सिनेमा काफी पसंद है। जब मुझे समय मिलेगा तो मैं हॉलीवुड सिनेमा भी करना चाहूंगी।’ ‘सीता और गीता’ की रीमेक फिल्म में काम करने की तमन्ना रखने वाली कैट हर तरह का काम करना चाहती हैं। वह कहती हैं, ‘मुझे हर जॉनर की फिल्म में काम करने में मजा आता है। मैं कॉमेडी, एक्शन, इमोशनल, संजीदा, हर किस्म के किरदारों को निभाते हुए उन्हें एंज्वॉय करती हूं।’ कैट फिर करेंगी किस
कैट ने पहला जबरदस्त किस हृतिक रोशन को ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ में किया था। अब वह रणबीर कपूर को निर्देशक अनुराग बसु की ‘जग्गा जासूस’ में गर्मागर्म किस करेंगी। हालांकि वह न तो इस बात से इनकार कर रही हैं और न ही स्वीकार। इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि रणबीर कैटरीना के प्यार में डूबे हैं, पर कैट हैं कि हृतिक की तारीफ किए जा रही हैं।

भुखमरी की कगार पर अंतरराष्ट्रीय एथलीट,दी आत्महत्या की चेतावनी

Image Loadingदेश में खिलाड़ियों पर सुविधाओं और इनामों की बारिश की तमाम घोषणाओं के बीच एक स्याह सच यह है कि एशियाई खेलों समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मुल्क का सिर ऊंचा करने वाली भारोत्तोलक मीनाक्षी रानी गौड़ और उनका परिवार भुखमरी के कगार पर है।
    
भारोत्तोलन के मंच पर अनेक बार कामयाबी की इबारत लिख चुकी मीनाक्षी ने बातचीत में बताया कि मुझसे किस्मत ऐसी रूठ गयी है कि अंधेरे भरी जिंदगी के अंदेशे में मुझे विधानभवन के सामने मजबूरन धरना देना पड़ रहा है।
    
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर 10 दिन के अंदर सरकार ने आश्वासन के मुताबिक नौकरी नहीं दी तो मैं अपने दोनों बच्चों को साथ लेकर आत्महत्या कर लूंगी।
    
उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली मीनाक्षी का यह हताशापूर्ण ऐलान राज्य में खिलाड़ियों की स्थिति का एक और उदाहरण माना जा सकता है।
    
मीनाक्षी ने अप्रैल 1999 में दिल्ली में हुई एशियाई जूनियर एवं सीनियर भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा वर्ष 1995 में हुई राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में रजत, 1996 में हुई राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में ओवरऑल स्वर्ण पदक तथा 1998 में मध्य प्रदेश में हुई राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में रजत पदक हासिल किया था।
उस वक्त उन्हें सिर आंखों पर बैठाया गया था लेकिन समय का पहिया घूमा और उनके सितारे गर्दिश में चले गये।  
उत्तर प्रदेश के बरेली की मूल निवासी मीनाक्षी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2007 से 20 11 तक फिरोजाबाद में भारोत्तोलन कोच के तौर पर काम किया, लेकिन वर्ष 2011 में हुए एक हादसे में उनके पति दीपक सैनी की मत्यु हो गयी और उसी दुर्घटना में पैर में चोट लगने की वजह से उनकी नौकरी भी छिन गयी। मीनाक्षी ने बताया कि इलाज कराने में उनका घर तक बिक गया। अब उनके सिर पर अपनी छत होना तो दूर, खाने के भी लाले पड़े हैं।
    
एथलीट ने बताया कि उन्होंने नौकरी के लिये खेल मंत्री नारद राय से गत 18 सितम्बर को मुलाकात की थी। इसके अलावा वह खेल सलाहकार रामवक्ष यादव से भी मिली थीं। उन दोनों ने ही उन्हें नौकरी का आश्वासन दिया था लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
    
दस वर्षीय बेटे और पांच साल की बेटी की मां मीनाक्षी ने बताया कि मुफलिसी के आलम में उनके बच्चों का भविष्य भी बरबाद हो रहा है और उन्हें रोजगार तथा दीगर मदद की सख्त जरूरत है।
    
उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2005-06 में राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला से कोचिंग का प्रमाणपत्र हासिल कर चुकी हैं और अगर उन्हें दोबारा कोच की जिम्मेदारी दी जाएगी तो उन्हें संतोष होगा।

आप को अभी तक चंदे में मिले 12 करोड़ रुपये

Image Loading अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने दावा किया है कि उसे एक भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन को लाने और अगला दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए रिक्शा चलाने वालों, कारोबारियों और अप्रवासी भारतीयों की ओर से दस रुपये से लेकर लाखों रुपये तक का चंदा मिला है।
आम आदमी पार्टी ने कहा है कि उसे समाज के विभिन्न तबकों से 12 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिल चुका है और इनमें बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्होंने जिंदगी में पहली बार किसी राजनीतिक दल को चंदा दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 20 करोड़ रुपये जुटाने का दावा करने वाली आप को भारत में लोगों से 6.20 करोड़ रुपये और बाकी रकम अमेरिका, हांगकांग, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यहां तक कि सउदी अरब जैसे देशों में बसे अप्रवासी भारतीयों से चंदे के रूप में मिली है। आप के एक कार्यकर्ता ने कहा कि हमें अपने सभी स्रोतों से प्रतिदिन करीब दस लाख रुपया मिल रहा है और जल्द ही हमें 20 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है। चुनाव से पहले हमारे पास अभी समय है। इसके अलावा हमारा घर घर जाकर चंदा एकत्र करने का कार्यक्रम काफी सफल रहा है। इससे हमें लोगों के साथ संपर्क बनाने का भी मौका मिल रहा है। आप नेता ने बताया कि बाकी धन रेडियो, एसएमएस और इंटरेक्टिव वायस रिस्पोंस (आईवीआर) सिस्टम के जरिए विज्ञापनों पर खर्च किया जाएगा। केजरीवाल ने बताया कि हम प्रकाशित विज्ञापनों के खिलाफ हैं और जब आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, तब हमें केवल पेड होर्डिंग के जरिए ही विज्ञापन करना होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि इस सब पर कुल करीब 10 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। पार्टी ने एक निर्वाचन क्षेत्र को गोद लेने का अनोखा विचार शुरू किया है जिसके तहत लोगों को एक निर्वाचन क्षेत्र का खर्चा उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। नकद चंदे और चेक के अलावा पार्टी ने एक क्रेडिट कार्ड स्वाइपिंग मशीन भी खरीदी है जिससे दानदाताओं को क्रेडिट कार्ड के जरिए दान करने की सुविधा है। हाल ही में राज्यसभा सदस्य और कारोबारी राजीव चंद्रशेखर ने आम आदमी पार्टी को पांच लाख रुपये का चंदा दिया था और कहा था, जो लोग प्रशासन के असली मुद्दों तथा लोगों की सेवा की राजनीति की चिंता करते हैं, उनके लिए दिल्ली चुनाव में आप का प्रदर्शन महत्वपूर्ण है। अब हालात पर मूक दर्शक बनकर या चुप्पी साध कर बैठे रहना ठीक नहीं है। फैसला लीजिए। केजरीवाल ने कहा कि कई ऐसे उदाहरण हैं जब लोगों ने, मौके पर उनकी जेब में जो कुछ था, वह दान दे दिया। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस और भाजपा भारी चंदा हासिल करती हैं। क्या वे दानदाताओं की सूची प्रकाशित कर सकती हैं इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है कि यदि वे अपने आंतरिक फंड के बारे में साफ-सुथरी सामने नहीं आ सकती तो उनसे कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे भ्रष्टाचार को खत्म करेंगी।