Tuesday, 2 July 2013

भाग मिल्खा भाग- सोनम कपूर इंटरव्यू

 
Sonam Kapoor
रांझना फिल्म की अपार सफलता के बाद बॉलीवुड की स्टाइल आइकन और बेहतरीन अदाकारा सोनम कपूर की भाग मिल्खा भाग फिल्म जल्द ही रिीज होने वाली है। भाग मिल्खा भाग में सोनम कपूर का किरदार बहुत ही छोटा सा है लेकिन सोनम ने फिल्म सिर्फ इसलिए की क्योंकि वो चाहती थीं कि फरहान अख्तर जैसे बेहतरीन एक्टर के साथ वो काम करें और अपनी आने वाली पीढ़ी को बता सकें कि उन्होंने फरहान के साथ काम किया था। सोनम कपूर ने बताया कि उनके पापा अनिल कपूर आज भी उन्हें एडवाईज देती हैं जिन्हें अक्सर वो फॉलो करती हैं। आइये जानते हैं कि वनइंडिया की रिपोर्टर सोनिका मिश्रा के साथ हुई बातचीत के दौरान सोनम ने और क्या-क्या बताया अपनी फिल्म भाग मिल्खा भाग के बारे में। जैसा कि हमने सुना कि आपने भाग मिल्खा भाग फिल्म इसलिए की क्योंकि आप फरहान के साथ काम करना चाहती थीं। क्या सिर्फ एक यही वजह थी भाग मिल्खा भाग साइन करने के पीछे? भाग मिल्खा भाग मैंने इसलिए साइन क्योंकि मैं फरहान अख्तर की बहुत बड़ी फैन हूं। फरहान अख्तर एक बहुत ही बेहतरीन एक्टर, निर्देशक और निर्माता हैं। मैं चाहती हूं कि भविष्य में मैं अपने बच्चों और उनके बच्चों को ये बताऊं कि मैंने फरहान अख्तर के साथ काम किया था। इसके अलावा राकेश मेहरा एक ऐसे निर्देशक है जिनके साथ मैं बार-बार काम करना चाहूंगी। साथ ही प्रसून जोशी ने ऐसी स्क्रिप्ट लिखी है कि जिसे पढ़कर मैंने डिसाइड कर लिया कि मुझे इस फिल्म में काम करना है भले ही मेरा किरदार छोटा सा ही क्यों ना हो। रांझना फिल्म की सफलता के बाद क्या बदलाव आप महसूस कर रहीं हैं अपनी निजी जिदगी में और अपने करियर में? (हंसते हुए) रांझना की सफलता को इंज्वॉय करने का मुझे वक्त ही नहीं मिल रहा है। रांझना की सफलता से मैं बहुत खुश हूं। मैंने ये सोचकर रांझना फिल्म नहीं की थी कि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट होगी। बल्कि मैंने इसलिए ये फिल्म की क्योंकि रांझना फिल्म मुझे इंडस्ट्री की बेहतरीन फिल्मों में से एक लगी। फिल्म की शूटिगं खत्म करने के बाद मुझे ऐसा लगा कि मेरा लक्ष्य पूरा हुआ क्योंकि ये एक बहुत ही बेहतरीन फिल्म थी और साथ ही आनंद राय जो कि मेरे पंसदीदा निर्देशक हैं जिनके साथ मैं बरा बार काम करना चाहूंगी। रांझना के बाद मैंने भाग मिल्खा भाग की शूटिंग शुरु कर दी थी और अब भाग मिल्खा भाग के बाद मैं आयुष्मान के साथ फिल्म कर रही हूं तो वक्त ही नहीं मिल रहा कि मैं रांझना की सफलता को सेलिब्रेट कर सकूं। लेकिन मैं बहुत खुश हूं। राकेश मेहरा के साथ एक बार फिर से आप काम कर रही हैं। कैसा एक्सपीरिंयस रहा? राकेश मेहरा के साथ काम करने का मेरा एक्सपीरिंयस हमेशा से ही बेहतरीन रहा है। राकेश मेहरा के साथ काम करना ऐसा है जेसे अपने घर में वापस आना। जब मैं सेट पर गयी तो मुझे कुछ भी नया नहीं लगा सिर्फ एक्टर के और फिल्म के। रांझना के बाद भाग मिल्खा भाग में का किरदार निभाना एक बहुत ही अलग तरह का एक्सपीरिंयस था जैसे कि मैं गहरी सांस ले रहूी हूं। क्योंकि जोया का करिदार बहुत ही अलग तरह के रंग और इमोशन्स लिये हुए था जबकि का किरदार बहुत ही प्योर था। जो कि करना मेरे लिए बहुत ही जरुरी था। आपने अधिकतर फिल्में अपनी उम्र के एक्टरों के साथ की हैं जबकि आपके साथ की एक्ट्रेसेस अपने सीनियर एक्टर्स के साथ काम करने में ज्यादा उत्सुक होती हैं। इसके पीछे कोई खास वजह? (हंसते हुए) अब इसमें मेरी क्या गलती है कि मैं सीनियर एक्टर्स के साथ काम नहीं करती। मैं फिल्में एक्टर को देखकर नहीं चूज करती बल्कि मैं फिल्में निर्देशक को देखकर और फिल्म की कहानी को देखकर चुनती हूं। मैं उन लोगों को कमेंट नहीं कर रही जो कि एक्टर देखकर फिल्में चुनती हैं लेकिन मैं नहीं करती। अनिल कपूर जी की पहली फिल्म कन्नड़ में थी। क्या आपका साउथ इंडियन फिल्में करने का कोई प्लान है? मैं हमेशा से कहती रही हूं कि मुझे किसी भाषा से कोई मतलब नहीं है। मुझे अच्छे किरदार मिलने चाहिए तो मैं किसी भी भाषा में फिल्में करुंगी। मुझे साउथ से कई ऑफर्स मिले हैं लेकिन मुझे अभी तक कोई भी फिल्म में किरदार पंसद नहीं आया है। जिस दिन मुझे अपनी पसंद का किरदार मिल जाएगा मैं साउथ की फिल्में भी करुगी। आज भी जब मैं सड़कों पर जाती हूं तो लोग मुझे बिट्टू, आयशा, सकीना, मसकली और जोया कहकर बुलाते हैं। तो जब मुझे ऐसा ही कोई बेहतरीन किरदार मिलेगा तो मैं साउथ की फिल्में करुंगी। आप एक फैशन आइकन मानी जाती हैं। लड़कियां आपको फॉलो करती हैं। कभी मॉडल बनने के बारे में नहीं सोचा? मैं जब छोटी थी तब 90 किलो की थी। मैंने अपना वजन सिर्फ एक्ट्रेस बनने के लिए घटाया था। मॉडल नहीं बनना चाहती थी। सोनम कपूर के इंटरव्यू के कुछ अंश-

दादाजी के साथ प्रशंसकों से मिली आराध्या

Image Loadingअभिनेता अमिताभ बच्चन हर रविवार अपने बंगले जलसा के बाहर अपने प्रशंसकों का अभिवादन करते हैं। लेकिन इस बार निय म में थोड़ा बदलाव था। रविवार को बिग बी की पोती आराध्या भी अपनी मां ऐश्वर्या राय बच्चन और पिता अभिषेक बच्चन के साथ प्रशंसकों के अभिवादन में शामिल हुईं।
बिग बी ने अपने ब्लॉग पर आराध्या के साथ प्रशंसकों का अभिवादन करते हुए तस्वीरें साझा कीं। हालांकि डेढ़ साल की आराध्या ज्यादातर समय अपनी मां की गोद में ही रही। अमिताभ और अभिषेक ने मुस्कराते हुए प्रशंसकों का अभिवादन किया। बिग बी ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘रविवार को आराध्या भी प्रशंसकों के अभिवादन में शामिल हुईं। उसके चेहरे पर हैरानी थी कि आखिर इतना शोर-शराबा क्यों है और क्यों इतने सारे लोग हमें हाथ हिला रहे हैं।’’ इस साल आराध्या नवम्बर में दो साल की हो जाएगी। अमिताभ कई सालों से प्रत्येक रविवार प्रशंसकों के अभिवादन का नियम निभाते आ रहे हैं।

टीम इंडिया में वापसी करना चाहते हैं प्रवीण

Image Loadingएक साल से भी अधिक समय से भारतीय टीम से बाहर तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार की नजरें राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए 2013-14 के घरेलू सत्र पर टिकी हैं।
     
प्रवीण ने मंगलवार को यहां पेट्रोलियम खेल संवर्धन बोर्ड के समारोह के दौरान कहा कि मैं फिट हूं। मैं टेनिस एल्बो की समस्या से पूरी तरह उबर चुका हूं। मैं आजकल अच्छी गेंदबाजी कर रहा हूं। अब मेरी नजरें घरेलू सर्किट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके भारतीय टीम में वापसी पर टिकी हैं।
     
प्रवीण पिछली बार किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में 2012 में एशिया कप में खेले थे। वह इस साल आईपीएल में खेले लेकिन खराब फॉर्म के कारण उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। इस तेज गेंदबाज ने महेंद्र सिंह धौनी की अगुआई में हाल में आईसीसी चैम्पियन्स ट्रॉफी जीतने वाली युवा भारतीय टीम की सराहना भी की।
     
उन्होंने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि युवा भारतीय खिलाड़ी चैम्पियन्स ट्रॉफी में जिम्मेदारी से खेले। यह अच्छा है कि हमने अंतिम बार आयोजित हो रहा यह टूर्नामेंट जीता। प्रवीण ने अपने ही शहर के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की भी तारीफ की जो पिछले कुछ समय से भारतीय टीम के नियमित सदस्य हैं।
     
उन्होंने कहा कि वह चतुर क्रिकेटर है। वह इतना चतुर है कि उसे अपना मजबूत पक्ष पता है। इंग्लैंड के हालात में उसने काफी अच्छी गेंदबाजी की।

कोच को उम्मीद, कप्तानी में भी कमाल करेंगे कोहली

Image Loading
Virat Kohli
विराट कोहली पहली बार भारतीय टीम की कमान संभाल रहे हैं और उनके कोच राजकुमार शर्मा को विश्वास है कि यह युवा बल्लेबाज अपनी इस भूमिका में खरा उतरकर भारतीय क्रिकेट का अगला धौनी साबित होगा।
महेंद्र सिंह धौनी पांव की मांसपेशियों में खिंचाव (हैमस्ट्रिंग) के कारण वेस्टइंडीज में चल रही त्रिकोणीय वनडे सीरीज़ के बाकी मैचों में नहीं खेल पाएंगे। उनके स्थान पर कोहली को कप्तान बनाया गया है जो पहली बार राष्ट्रीय टीम की अगुवाई करेंगे। कोहली को पिछले कुछ समय से देश के भावी कप्तान के रूप में देखा जा रहा है। शर्मा ने कहा कि कोहली में नेतृत्व क्षमता कूट कूटकर भरी है और लंबे समय तक देश के सबसे सफल कप्तान धौनी के साथ खेलने और घरेलू स्तर पर कप्तानी का अनुभव उनके काम आएगा। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि धौनी नहीं खेल रहे हैं। भारत को उनकी कमी खलेगी। वह महान कप्तान है। भारत को अभी धौनी की जरूरत है लेकिन विराट उनसे सीख रहे हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि वह भारत के अगले धौनी बनने में सफल रहेंगे। शर्मा ने कहा कि विराट को उनसे काफी सीखने को मिला है। यह गर्व की बात है कि विराट देश की कप्तानी कर रहा है। यह बहुत बड़ा सम्मान है। मेरे लिए भी यह गर्व की बात है कि जिसे मैंने कोचिंग दी वह देश की कप्तानी कर रहा है। कोहली घरेलू स्तर पर दिल्ली की रणजी टीम और इंडियन प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर की कप्तानी करते रहे हैं। धौनी को जहां कैप्टेन कूल माना जाता है वहीं कोहली आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनके कोच का मानना है कि यही गुण उन्हें सफल कप्तान भी बनाएगा। शर्मा ने कहा कि आक्रामकता विराट का मजबूत पक्ष है। माही बहुत कूल हैं और दबाव में भी उनके चेहरे पर शिकन नहीं आती है। विराट में शुरू से ही नेतृत्व के गुण थे और इसमें उनका आक्रामकता मददगार होती है। उन्हें कप्तानी का अनुभव है और यह जरूर उनके काम आएगा। उन्होंने कहा कि मेरी कल रात उनसे (कोहली) बात हुई लेकिन हमने पिछले मैच (वेस्टइंडीज के खिलाफ) के बारे में ही बात की। उस मैच में उन्होंने अच्छी कप्तानी की। भारत ने नौ विकेट निकाल लिए थे और वह जीत के करीब था। धौनी वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच में बल्लेबाजी के दौरान चोटिल हो गए थे और वह क्षेत्ररक्षण के लिए मैदान पर नहीं उतरे। उनके स्थान पर कोहली ने टीम की कमान संभाली। वेस्टइंडीज ने यह मैच एक विकेट के करीबी अंतर से जीता। कोहली इससे पहले तीन प्रथम श्रेणी मैचों में कप्तानी कर चुके हैं जिनमें से उनकी टीम ने दो में जीत दर्ज की जबकि एक मैच ड्रा रहा। उनकी अगुवाई में दिल्ली की रणजी टीम ने 2009 में महाराष्ट्र और सौराष्ट्र को हराया था। वह दलीप ट्रॉफी के एक मैच में उत्तर क्षेत्र की कमान भी संभाल चुके हैं। लिस्ट-ए में कोहली ने अब तक सात मैचों में दिल्ली और उत्तर क्षेत्र की कप्तानी की हैं। इनमें से पांच मैच में उनकी टीम ने जीत दर्ज की जबकि दो में उसे हार मिली। कोहली आईपीएल में आरसीबी के कप्तान हैं। उन्होंने टी20 में 26 मैचों में कप्तानी की जिनमें उनकी टीम 14 मैच में विजयी रही जबकि नौ मैच उसने गंवाये। कोहली हालांकि कप्तान के रूप में अभी तक शतक नहीं लगा पाये हैं। उन्होंने कप्तान के तौर पर टी20 में 26 मैच की 25 पारियों में 43.55 की औसत से 871 रन बनाए हैं जिसमें सात अर्धशतक शामिल हैं। लिस्ट-ए में कप्तान के रूप में उनके नाम पर सात मैचों में 46.28 की औसत से 324 रन दर्ज हैं। उन्होंने इस प्रारूप में तीन अर्धशतक भी लगाए हैं। कोहली ने जिन तीन प्रथम श्रेणी मैचों में कप्तानी की है उनमें उन्होंने 84.66 की औसत से 154 रन बनाए हैं जिसमें तीन अर्धशतक शामिल हैं।

अब कबाड़ का कमाल करेगा दुनिया में धमाल

Image Loadingकुदरत ने इंसान को जो सबसे हसीन तोहफा दिया है, वह है रचनात्मकता। इसका सही इस्तेमाल मन में संतुष्टि और चेहरे पर खुशी लाता है, तो कुछ बेहतर कर कला जगत में नई दिशाएं भी खोल देता है।
       
इंदौर के एक युवा कलाकार वाजिद खान ने कुछ ऐसा ही करने की ठानी और जल्द ही उसकी क्रिएटिविटी रंग ले आयी और सात समंदर पार अमेरिका में भी उसकी कला की चर्चा होने लगी।
       
नेल आर्ट से मशहूर हुए वाजिद ने गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद नई क्रिएटिविटी के तौर पर पेश किया है, 'चंपा को' ..दरअसल चंपा एक घोडी का नाम है, जिसे कलाकार ने मोटर गाडियों के पुराने पार्टस से बनाया है। इसमें दो पहियों के साथ ही बुलेट मर्सिडीज एवं बीएमडब्ल्यु जैसी मंहगी कारों के पुर्जे भी जोड़े गए हैं।
करीब पांच लाख रुपये में तैयार की गई घोड़ी की इस आकृति को बनाने में वाजिद को आठ महीने से अधिक वक्त लगा। घोडी के साथ एक जॉकी घुडसवार को भी जोशीले अंदाल में दिखाया गया है।      
नेल आर्टिस्ट वाजिद खान ने कहा कि पुरानी मोटर गाड़ियों के पार्टस एकत्रित करने के लिए वह कबाडियों की दुकानों पर भटकता रहा और उपयोगी पार्ट्स खरीदें। इस दौरान कुछ लोगों ने उसे शंका भरी नजरों से देखा और पुलिस को भी शिकायत की। पुलिस पूछताछ करने उसके घर भी पहुंची, लेकिन कुछ नया करने की धुन में वह अपने कार्य में मशगूल रहा। वाजिद के अनुसार जब उसने अपनी आवश्यकता के अनुसार पुरानी गाड़ियों के पुर्जे जुटा लिए तो एक सफेद दीवार पर नटबोल्ट से कसना शुरु कर दिया। कलाकार ने सभी पुरजे को एक-एक कर इतनी बखूबी और डिजाइन से कसा कि चंद महीनों में घोड़ी ने आकार ले लिया, तो उसका प्यारा सा नाम रखा चंपा।
       
उन्होंने बताया कि घोड़ी और जॉकी को फास्ट मूवमेंट में दिखाना बड़ी चुनौती थी, इसके लिए पहले ऑटो पार्टस को ब्लैक कोटेड किया फिर सफेद दीवार का केनवास की तरह इस्तेमाल किया, तो कलाकृति में जिंदगी के रंग निकल आए तथा घोड़ी और जॉकी की भाव भंगिमाऐं आकर्षक अंदाज में झलकने लगी। इस सारे कार्य पर पांच लाख रुपये खर्च हुए।
       
वाजिद ने बताया कि इस कलाकृति को दर्शकों के लिए फिलहाल इंदौर में प्रगति विहार कॉलोनी में बायपास पर एक बंगले की दीवार पर लगाया गया है, लेकिन इसका एक कद्रदान मिल गया है जिसने दस लाख रुपये में खरीदने की इच्छा जताई है। खरीददार अल्तमश खान के अनुसार वह इसे मुबंई भेजेगा और वहां से यह नायाब कलाकृति अमेरिका भेजी जायेगी। जहां एक प्रदर्शनी में रखी जायेगी, फिर इसकी बिक्री होगी या किसी आर्ट गैलरी में स्थापित की जायेगी। मूल रुप से मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के एक छोटे से ग्रामसोनगरी के निवासी वाजिद ने बताया कि उसके पास किसी शैक्षणिक संस्थान से कला की कोई डिग्री नहीं है और न ही परिवार में कला के प्रति विशेष रुझान है। पिता मंदसौर में एक होटल चलाते हैं, लेकिन उसके दिमाग में कुछ नया करने का जुनून सवार हो गया और विभिन्न कलात्मक वस्तुओं एवं पेंटिंग देखने के बाद उसने कीलों से फोटो बनाने का कार्य वर्ष 2004 से शुरु किया।
   
इस दौरान उसने कुछ नेल आर्ट बनाये तो परिजनो ने तारीफ के बजाय उसे पागल कहा और गांव के लोगों से भी बेवकूफ की उपाधि मिली, लेकिन वह इसे अपना क्रियेशन मानता रहा। उसने कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी का भी इसी पद्धति से फोटों बनाया और उन्हें भेंट किया जो आज भी दिल्ली में युवक कांग्रेस के कार्यालय में लगा है । 
  
उन्होंने बताया कि इसी प्रकार साइट्व बाबा का भी फोटो बनाया है। मित्रों ने तारीफ की लेकिन घर वालों से उपेक्षा ही मिलती रही तो वह इंदौर आ गया और नेल आर्ट से महात्मा गांधी का चित्र शिद्दत से बनाया। इस चित्र की चर्चा होने पर मुम्बई से गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड का विशेषज्ञों का एक दल इंदौर पहुंचा तथा बारीकी से उसकी कला का अध्ययन करने के उपरांत उसे वर्ष 2012 में गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वालों में शामिल कर प्रमाण पत्र देकर नवाजा गया साथ ही 28 हज़ार रुपये की राशि भी भेंट की तब नेल आर्ट कलाकार वाजिद खान का ड्रीम प्रोजेक्ट बन गया जिसकी परिणिति चम्पा घोडी के रुप में सामने आई। वाजिद ने बताया कि अब उसका एक नया सपना है कि रोशनी के माध्यम से आकाश में गांधी जी का चित्र बनाना है। उन्होंने बताया कि इसके लिये 12 से 15 हजार सी.एफ.एल.लाइट की जरुरत पड़ेगी जिसे इंदौर में बिजली के खंबो अथवा अन्य खंबों पर फिट कर उसका मुंह आकाश की ओर करना होगा। इन लाइटों पर रंगबिरंगी पन्नियां लगाई जायेंगी। रात्रि में वायुयान से या हेलीकाप्टर से देखने पर दर्शकों को आकाश में गांधी जी दिखाई देंगें। उन्होंने कहा कि इसके लिये वह विद्युत विभाग एवं नगर निगम से सहयोग हासिल करने का प्रयास कर रहा है।

केंद्र सरकार ने की साइबर सुरक्षा नीति 2013 की घोषणा

Image Loadingसाइबर अपराध की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने आज साइबर सुरक्षा नीति 2013 की घोषणा की। साइबर सुरक्षा नीति के तहत राष्ट्रीय सुरक् षा परिषद सचिवालय इसकी नोडल एजेंसी होगी, जो देश में साइबर सुरक्षा से जुडे तमाम मामलों की निगरानी करने के अलावा लोगों की भूमिका और दायित्व को भी स्पष्ट करेगी।
       
एनएससीएस के अलावा नेशनल क्रिटिकल इंफार्मेशनइंफ्रास्ट्रकचर प्रोटेकशन सेंटर (एनसीआईआईपीसी) भी सूचना स्रोतों का डिजाइन तैयार करने, संकलन, विकास, इस्तेमाल एवं संचालन पर निगरानी करेगा। यह चौबीस घंटे देश की संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित रखेगा।
       
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि साइबर सुरक्षा नीति 2013 देश एवं विश्व समुदाय की साइबर सुरक्षा से जुडी चिंताओं को समाप्त करेगी। उन्होंने कहा कि आंतरिक एवं बाह्य स्तर के चुनौतीपूर्ण माहौल में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति का कार्यक्षेत्र कापकी व्यापक होगा।
       
साइबर सुरक्षा के लिए अगले पांच वर्षों में क्षमता निर्माण, दक्षता विकास और प्रशिक्षण के द्वारा करीब पांच लाख कुशल पेशवरों का कार्यबल तैयार किया जाएगा।

अमेरिका की GPS प्रणाली का विकल्प होगा नौवहन उपग्रह

Planet
अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया दौर शुरू करते हुए भारत ने पीएसएलवी के जरिये नौवहन को समर्पित अपना पहला उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है, जो देश को अमेरिका की जीपीएस प्रणाली का एक विकल्प मुहैया कराएगा।
   
इस उपलब्धि के साथ ही भारत चुनिंदा देशों में शामिल हो गया। बीती रात ठीक 11 बजकर 41 मिनट पर कुल 44 मीटर लंबे पीएसएलवी-सी22 ने यहां स

तीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आईआरएनएसएस-1ए उपग्रह के साथ उड़ान भरी और आसमान के स्याह कैनवस पर गहरे सुनहरे रंग की ज्वाला का चित्र सा बन गया।
   
प्रक्षेपण के करीब 20 मिनट बाद यानी आधी रात से कुछ समय पश्चात रॉकेट ने आईआरएनएसएस-1ए को उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया। तकनीकी तौर पर मंगलवार को कक्षा में स्थापित हुआ आईआरएनएसएस-1ए उन सात उपग्रहों की श्रृंखला में से पहला उपग्रह है, जिन्हें भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (इंडियन रीजनल नैविगेशन सैटेलाइट सिस्टम-आईआरएनएसएस) के लिए छोड़ा जाना है।
आईआरएनएसएस स्पेस सेगमेंट का उद्देश्य देश तथा देश की सीमा से 1500 किलोमीटर की दूरी तक के हिस्से में इसके उपयोगकर्ता को सटीक स्थिति की सूचना देना है। यह इसका प्राथमिक सेवा क्षेत्र है।
   
आईआरएनएसएस-1ए के सफल प्रक्षेपण से उत्साहित इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने बताया कि 1,425 किग्रा वजन वाला यह उपग्रह अपने प्रक्षेपण के 20 मिनट बाद निर्धारित कक्षा में सटीक तरीके से प्रविष्ट हो गया। यह इस दुर्लभ नौवहन प्रणाली का प्रथम चरण है। उन्होंने बताया कि आईआरएनएसएस-1ए के प्रक्षेपण पर 125 करोड़ रुपये की लागत आई।
   
प्रक्षेपण के बाद राधाकृष्णन ने कहा इससे साबित होता है कि पीएसएलवी एक अत्यंत भरोसेमंद प्रक्षेपक वाहन है और इस उड़ान के साथ हम देश में अंतरिक्ष अनुप्रयोग के एक नये युग में प्रवेश कर रहे हैं, जो उपग्रह नौवहन कार्यक्रम की शुरुआत है।
   
इसरो के वैज्ञानिकों ने अपनी इस सफलता का जश्न मनाया और राधाकृष्णन ने कहा यह घोषणा करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है कि हमारे पीएसएलवी वाहन की यह एक और शानदार उड़ान थी। यह पीएसएलवी की लगातार 23वीं सफल उड़ान तथा पीएसएलवी के उन्नत संस्करण की चौथी सफल उड़ान थी।
   
आईआरएनएसएस अमेरिका के ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) , रूस के ग्लोबल ऑर्बिटिंग नैविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएलओएनएएसएस), यूरोपियन यूनियन्स गैलीलियो (जीएनएसएस), चीन के बेइदोउ सैटेलाइट नैविगेशन सिस्टम और जापान के कासी-जेनिथ सैटेलाइट सिस्टम जैसा ही होगा।
   
नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस के अनुप्रयोगों में नक्शा तैयार करना, जियोडेटिक आंकड़े जुटाना, समय का बिल्कुल सही पता लगाना, चालकों के लिए दृश्य और ध्वनि के जरिये नौवहन की जानकारी, मोबाइल फोनों के साथ एकीकरण, भूभागीय हवाई तथा समुद्री नौवहन तथा यात्रियों तथा लंबी यात्रा करने वालों को भूभागीय नौवहन की जानकारी देना आदि शामिल हैं।
   
आईआरएनएसएस के सात उपग्रहों की यह श्रंखला स्पेस सेगमेंट और ग्राउंड सेगमेंट दोनों के लिए है। आईआरएनएसएस के तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षा (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) के लिए और चार उपग्रह भूस्थैतिक कक्षा (जियोसिन्क्रोनस ऑर्बिट) के लिए हैं। यह श्रृंखला वर्ष 2015 से पहले पूरी होनी है।
   
आईआरएनएसएस के इस मिशन की मियाद 10 साल की है। इस श्रृंखला का अगला उपग्रह आईआरएनएसएस 1बी वर्ष 2014 के शुरू में प्रक्षेपित किया जाएगा। समझा जाता है कि सातों उपग्रह वर्ष 2015 तक कक्षा में स्थापित कर दिए जाएंगे और तब आईआरएनएसएस प्रणाली शुरू हो जाएगी।
   
राधाकृष्णन ने बताया कि 300 करोड़ रुपये ग्राउंड सेगमेंट के लिए अलग रखे गए हैं। लगभग हर उपग्रह पर 125 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह उपग्रह उप भूस्थैतिक स्थानांतरण कक्षा (सब-जियोसिन्क्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट) में 284 किमी दूर प्रक्षेपित किया गया, जो पृथ्वी का सबसे निकटतम स्थान है। इसका उच्चतम लक्ष्य 20,650 किमी (पृथ्वी का सबसे दूरस्थ स्थान) के आसपास रखा गया था और इसने उसे 20,625 किमी तक लक्ष्य प्राप्त कर लिया।
   
देर रात को यह इसरो का अब तक का पहला प्रक्षेपण था। इस बारे में संस्थान के एक अधिकारी ने बताया कक्षा के मानकों के आधार पर प्रक्षेपण का समय तय किया गया। आईआरएनएसएस-1ए के लिए आधी रात को प्रक्षेपण की जरूरत थी।
   
पूर्व में पीएसएलवी-सी22 के दूसरे चरण में इलेक्ट्रोहाइड्रोलिक कंट्रोल एक्चुएटर्स में से एक में खराबी आने की वजह से इसरो ने 12 जून को नियत आईआरएनएसएस-1ए का प्रक्षेपण एक पखवाड़े के लिए टाल दिया था। खामी दूर करने के बाद प्रक्षेपण की नयी तारीख एक जुलाई तय की गई थी।