मोबाइल ग्राहकों को लुभाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों की तरफ से एक से बढ़कर एक लुभावने ऑफर्स की पेशकश की जा रही है। अब दिल्ली और मुंबई में अपनी सर्विस देने वाली सरकारी टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल, दिल्ली में अपने प्रीपेड जीएसएम ग्राहकों के लिए मात्र 21 रुपए में 60 मिनट के एसटीडी कॉल की सुविधा दे रही है। इसका फायदा उठाने के लिए ग्राहकों को 21 रुपए के स्पेशल रीचार्ज वाउचर से अपना नंबर रिचार्ज करवाना पड़ेगा।
एसटीडी कॉल के साथ ही कंपनी की तरफ से लोकल कॉल्स के लिए भी ऐसी ही पेशकश की गई है। इसके तहत 11 रुपए के स्पेशल वाउचर से रिचार्ज करवाने पर 60 मिनट के लोकल कॉल की सुविधा दी जा रही है। आपको बता दें कि इन दोनों तरह के वाउचर्स के साथ एक दिन की वैलिडिटी दी जा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि ग्राहकों को यह स्कीम बेहद पसंद आएगी।Sunday, 2 October 2011
एक बार गौर से आइना देखें, अपनी तकदीर खुद पढ़ सकतें हैं...
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी तकदीर खुद पढ़ लेते हैं। ऐसे लोग पहले ही जान जाते हैं कि उनकी किस्मत में क्या लिखा है? शरीर ज्योतिष और रेखा विज्ञान के अनुसार शरीर और हाथ पर कुछ ऐसे संकेत होते है जिनसे पता लग जाता है कि व्यक्ति अपनी तकदीर खुद पढ़ सकता है।
ऐसे लोगों के हाथ और सिर पर ऐसी रेखा होती है जो उन्हे अच्छा ज्यातिषी बना देती है। इन रेखा के प्रभाव से व्यक्ति अच्छा ज्योतिषी बन जाता है और उसे भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से पता चल जाता हैं।
हाथ में रहस्यमयी क्रॅस होने से भविष्य के बारे में पहले से ही पता होता है। जिन लोगों के हाथ में बुध पर्वत के निचे अद्र्धगोलाकार रेखा होती है ऐसे लोग अपनी तकदीर खुद पढ़ लेता है।
ऐसे ही अगर सिर पर शनि रेखा हो तो ऐसे लोगों को भी खुद की तकदीर पढऩे का हुनर मिलता है। शनि रेखा हमारे माथे के सबसे ऊपर रहती है। यह रेखा बताती है कि व्यक्ति कितना एकांतप्रिय है या गंभीर है। अच्छी शनि रेखा वाला व्यक्ति रहस्यमयी स्वभाव का होता है। साथ ही वह अहंकारी भी होता है। ऐसा व्यक्ति सफल जादूगर, ज्योतिर्विद व तांत्रिक भी हो सकते हैं।
ऐसे लोगों के हाथ और सिर पर ऐसी रेखा होती है जो उन्हे अच्छा ज्यातिषी बना देती है। इन रेखा के प्रभाव से व्यक्ति अच्छा ज्योतिषी बन जाता है और उसे भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से पता चल जाता हैं।
हाथ में रहस्यमयी क्रॅस होने से भविष्य के बारे में पहले से ही पता होता है। जिन लोगों के हाथ में बुध पर्वत के निचे अद्र्धगोलाकार रेखा होती है ऐसे लोग अपनी तकदीर खुद पढ़ लेता है।
ऐसे ही अगर सिर पर शनि रेखा हो तो ऐसे लोगों को भी खुद की तकदीर पढऩे का हुनर मिलता है। शनि रेखा हमारे माथे के सबसे ऊपर रहती है। यह रेखा बताती है कि व्यक्ति कितना एकांतप्रिय है या गंभीर है। अच्छी शनि रेखा वाला व्यक्ति रहस्यमयी स्वभाव का होता है। साथ ही वह अहंकारी भी होता है। ऐसा व्यक्ति सफल जादूगर, ज्योतिर्विद व तांत्रिक भी हो सकते हैं।
आज इस सरल देवी मंत्र का ध्यान..इरादों में जान फूंक तय करेगा सफलता
मन की शक्ति भी जीवन में किसी भी लक्ष्य को भेदने में कारगर और अहम होती है। इंसानी जीवन की बात करें तो खासतौर पर रिश्तों और संबंधों में विश्वास, भावना और संवेदना की मौजूदगी मनोबल को बढ़ाने वाली होती है। इतना ही नहीं यह विपरीत हालातों में भी कर्म और सफलता के इरादों में जान फूंकती है।
हिन्दू धर्म में शक्ति के इस स्वरूप की महिमा शक्ति पूजा में भी दिखाई देती है। जब नवरात्रि के शक्ति जागरण के विशेष काल में पांचवे दिन दुर्गा की पांचवी शक्ति स्कन्दमाता की पूजा की जाती है।
शास्त्रों के मुताबिक स्कन्दमाता आदिशक्ति का ममतामयी रूप है। गोद में स्कन्द यानी कार्तिकेय स्वामी को लेकर विराजित माता का यह स्वरूप जीवन में प्रेम, स्नेह, संवेदना को बनाए रखने की ही प्रेरणा देता है। यही प्रेरणा शारीरिक, मानसिक और वैचारिक शक्ति के संतुलन में अहम होती है़, जो जीवन में सुख लाकर मन में शांति और प्रेम कायम रखती है।
इस तरह प्रेम, स्नेह व मन की ताकत से सफलता की राह तय करने के लिए शास्त्रों में स्कन्दमाता की पूजा के लिए विशेष मंत्र स्त्रोत और सरल पूजा विधि बताई गई है, जानते हैं यह विधान -
- नवदुर्गा के अन्य स्वरूपों की भांति ही स्कन्दमाता की तस्वीर या मूर्ति की भी पंचोपचार पूजा यानी लाल गंध, अक्षत, फूल, वस्त्र व खासतौर पर केले का प्रसाद चढ़ाएं। पश्चात् स्कन्दमाता के नीचे लिखे विशेष मंत्रों का हाथ में फूल व अक्षत लेकर स्मरण या जप कर धूप व दीप आरती करें -
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
- माता को केले का विशेष प्रसाद जो मानसिक शक्ति बढ़ाने वाला भी माना गया है, आरती के बाद जरूर ग्रहण करें।
हिन्दू धर्म में शक्ति के इस स्वरूप की महिमा शक्ति पूजा में भी दिखाई देती है। जब नवरात्रि के शक्ति जागरण के विशेष काल में पांचवे दिन दुर्गा की पांचवी शक्ति स्कन्दमाता की पूजा की जाती है।
शास्त्रों के मुताबिक स्कन्दमाता आदिशक्ति का ममतामयी रूप है। गोद में स्कन्द यानी कार्तिकेय स्वामी को लेकर विराजित माता का यह स्वरूप जीवन में प्रेम, स्नेह, संवेदना को बनाए रखने की ही प्रेरणा देता है। यही प्रेरणा शारीरिक, मानसिक और वैचारिक शक्ति के संतुलन में अहम होती है़, जो जीवन में सुख लाकर मन में शांति और प्रेम कायम रखती है।
इस तरह प्रेम, स्नेह व मन की ताकत से सफलता की राह तय करने के लिए शास्त्रों में स्कन्दमाता की पूजा के लिए विशेष मंत्र स्त्रोत और सरल पूजा विधि बताई गई है, जानते हैं यह विधान -
- नवदुर्गा के अन्य स्वरूपों की भांति ही स्कन्दमाता की तस्वीर या मूर्ति की भी पंचोपचार पूजा यानी लाल गंध, अक्षत, फूल, वस्त्र व खासतौर पर केले का प्रसाद चढ़ाएं। पश्चात् स्कन्दमाता के नीचे लिखे विशेष मंत्रों का हाथ में फूल व अक्षत लेकर स्मरण या जप कर धूप व दीप आरती करें -
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
- माता को केले का विशेष प्रसाद जो मानसिक शक्ति बढ़ाने वाला भी माना गया है, आरती के बाद जरूर ग्रहण करें।
लक्ष्य तक तेजी से पहुंचा देगा श्री हनुमान का यह एक सूत्र
श्री हनुमान भक्त शिरोमणि यानी ऐसे भक्त जिनकी भक्ति सर्वश्रेष्ठ, विलक्षण और अतुलनीय है। हालांकि युग-युगान्तर से धर्मशास्त्रों में अनेक भक्त और उनकी ईश भक्ति के अनेक रूपों की अपार महिमा बताई गई है। किंतु श्री हनुमान की रामभक्ति की एक खासियत उनको श्रेष्ठ व सर्वोपरि बनाती है। वह है - शरणागति।
शरणागति यानी शरण में चले जाना। हालांकि शरणागति भी अलग-अलग रूपों में देखी जाती है। कमजोरी, भय या स्वार्थ से सबल का आसरा क्षणिक लाभ दे सकता है, किंतु लंबे वक्त के लिए नकारात्मक नतीजे भी देने वाला भी होता है। किंतु यश और सफलता के लिए गुण, शक्ति संपन्न होने पर भी निर्भयता के साथ अपनाई शरणागति ही सार्थक होती है। यह शरण देने वाले और शरणागत दोनों को ही बलवान और सुखी करती है।
शक्तिधर श्रीराम और बल, बुद्धि, विद्या संपन्न श्री हनुमान के भक्त और भगवान के गठजोड़ में भी शरणागति का ऐसा ही आदर्श छुपा है। जिसका संबंध श्री हनुमान द्वारा राम की शरणागति से है, जो व्यावहारिक जीवन में लक्ष्य प्राप्ति का एक बेहतरीन सूत्र सिखाता है।
असल में शरणागति के पीछे समर्पण और निष्ठा के भाव अहम होते हंै। जिससे किया गया हर कार्य स्वार्थसिद्धि या हित की भावना से परे होता है। यहीं नहीं इससे कर्तव्य में अहं का भाव यानी मैं या मेरा का विचार नदारद हो जाता है। नतीजतन दोषरहित बुद्धि व विचार पूरी ऊर्जा के साथ कर्म करने में सहायक बनकर असंभव लक्ष्य को भी पाने की राह आसान कर देते हैं। श्री हनुमान लीला इस बात का प्रमाण भी है।
बस, द्वेष-ईर्ष्या, स्वार्थ से परे, अहंकार रहित, समर्पित, सच्चा व निष्ठावान बनाने वाला शरणागति का यही एक सूत्र अगर परिवार हो या कार्यक्षेत्र, में अपने कर्तव्यों और दायित्वों को पूरा करने के लिये कर्म में उतार लें तो जीवन से जुड़े किसी भी मकसद को जल्द पूरा करना संभव हो जाएगा। अधिक सरल शब्दों में कहें तो श्री हनुमान की भांति हर काम लक्ष्य पर ध्यान टिकाकर, डूबकर और मन लगाकर हो।
शरणागति यानी शरण में चले जाना। हालांकि शरणागति भी अलग-अलग रूपों में देखी जाती है। कमजोरी, भय या स्वार्थ से सबल का आसरा क्षणिक लाभ दे सकता है, किंतु लंबे वक्त के लिए नकारात्मक नतीजे भी देने वाला भी होता है। किंतु यश और सफलता के लिए गुण, शक्ति संपन्न होने पर भी निर्भयता के साथ अपनाई शरणागति ही सार्थक होती है। यह शरण देने वाले और शरणागत दोनों को ही बलवान और सुखी करती है।
शक्तिधर श्रीराम और बल, बुद्धि, विद्या संपन्न श्री हनुमान के भक्त और भगवान के गठजोड़ में भी शरणागति का ऐसा ही आदर्श छुपा है। जिसका संबंध श्री हनुमान द्वारा राम की शरणागति से है, जो व्यावहारिक जीवन में लक्ष्य प्राप्ति का एक बेहतरीन सूत्र सिखाता है।
असल में शरणागति के पीछे समर्पण और निष्ठा के भाव अहम होते हंै। जिससे किया गया हर कार्य स्वार्थसिद्धि या हित की भावना से परे होता है। यहीं नहीं इससे कर्तव्य में अहं का भाव यानी मैं या मेरा का विचार नदारद हो जाता है। नतीजतन दोषरहित बुद्धि व विचार पूरी ऊर्जा के साथ कर्म करने में सहायक बनकर असंभव लक्ष्य को भी पाने की राह आसान कर देते हैं। श्री हनुमान लीला इस बात का प्रमाण भी है।
बस, द्वेष-ईर्ष्या, स्वार्थ से परे, अहंकार रहित, समर्पित, सच्चा व निष्ठावान बनाने वाला शरणागति का यही एक सूत्र अगर परिवार हो या कार्यक्षेत्र, में अपने कर्तव्यों और दायित्वों को पूरा करने के लिये कर्म में उतार लें तो जीवन से जुड़े किसी भी मकसद को जल्द पूरा करना संभव हो जाएगा। अधिक सरल शब्दों में कहें तो श्री हनुमान की भांति हर काम लक्ष्य पर ध्यान टिकाकर, डूबकर और मन लगाकर हो।
आज इस सरल देवी मंत्र का ध्यान..इरादों में जान फूंक तय करेगा सफलता
जब योद्धा की बात हो तो दिमाग में एक छबि भारी-भरकम अस्त्र-शस्त्रों से युद्ध के लिये तैयार वीर पुरुष की बनती है। किंतु जब कोई शस्त्र नहीं बल्कि शास्त्रों में बताई 2 बातों की शक्ति से ही बड़ी फौज को झुकने पर विवश कर दे तो यह किसी विलक्षण या महान आत्मा के लिए ही संभव हो सकता है। जी हां, इस बात के जरिए यहां आज भी करोड़ों दिलों में बसने वाले उस महात्मा का ही स्मरण किया जा रहा है, जिनको सारी दुनिया बापू यानी महात्मा गांधी के रूप में जानती है।
साबरमती के संत के रूप में मशहूर महात्मा गांधी द्वारा जीवन में अपनाई मात्र 2 बातों के आगे सारी दुनिया आज भी नतमस्तक होती है। जिनको आचरण में उतारना धर्मशास्त्रों में भी जीवन की सफलता के लिये अहम माना है। यहीं नहीं हर तरह की अशांति हो या भय का अंत ये 2 बातें आसानी से कर देती हैं।
ये 2 बातें हैं - सत्य और अहिंसा। हालांकि शास्त्रों में इनसे जुड़ी अनेक सीखें दी गई हैं, किंतु अपनाकर सार्थक करना किसी महात्मा के वश में ही है, जिसे गांधीजी ने कर दिखाया। आधुनिक पीढ़ी इसे गांधीगिरी के नाम से जीवन में अपनाने की कोशिशें कर रही हैं।
बहरहाल, जानते हैं बापू की ये 2 बातें कैसे जीवन में शांति और सफलता लाती है -
- सत्य बोलने वाला वास्तविक रूप से सफल होता है। क्योंकि वचन, कर्म, व्यवहार और विचार से सच्चा इंसान हमेशा सरल, शांत और आत्मविश्वास से भरा व प्रेरणादायी होता है।
- इसी तरह अहिंसा का भाव कलह या मानसिक दोषों से दूर और निर्भय रखता है, जिससे बेचैनी और व्यर्थ की उलझनों से बचकर मन लक्ष्य के प्रति स्थिर और एकाग्र रहता है।
- सत्य का प्रभाव परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में छबि विश्वसनीय बनाता है। साफ-सुथरा व्यक्तित्व व छबि होना मान-सम्मान और कद ही नहीं बढ़ाता बल्कि लोगों को आपसे जोड़ता है।
- वहीं अहिंसा में प्रतिशोध की भावना का अभाव होता है, जो व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के साथ पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर प्रेम, विश्वास और मेलजोल बढ़ाता है।
गांधी के सपनों का भारत बनाने की सार्थकता तभी संभव होगी, जब मात्र इन 2 बातों को ही हर इंसान खुद से शुरुआत कर नैतिकता के साथ कर्म, वचन, आचरण और व्यवहार में उतारने का दृढ संकल्प कर लें। न कि मात्र खास अवसरों पर लोगों की भीड़ के साथ बापू की बातों को याद कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री मान ले।
साबरमती के संत के रूप में मशहूर महात्मा गांधी द्वारा जीवन में अपनाई मात्र 2 बातों के आगे सारी दुनिया आज भी नतमस्तक होती है। जिनको आचरण में उतारना धर्मशास्त्रों में भी जीवन की सफलता के लिये अहम माना है। यहीं नहीं हर तरह की अशांति हो या भय का अंत ये 2 बातें आसानी से कर देती हैं।
ये 2 बातें हैं - सत्य और अहिंसा। हालांकि शास्त्रों में इनसे जुड़ी अनेक सीखें दी गई हैं, किंतु अपनाकर सार्थक करना किसी महात्मा के वश में ही है, जिसे गांधीजी ने कर दिखाया। आधुनिक पीढ़ी इसे गांधीगिरी के नाम से जीवन में अपनाने की कोशिशें कर रही हैं।
बहरहाल, जानते हैं बापू की ये 2 बातें कैसे जीवन में शांति और सफलता लाती है -
- सत्य बोलने वाला वास्तविक रूप से सफल होता है। क्योंकि वचन, कर्म, व्यवहार और विचार से सच्चा इंसान हमेशा सरल, शांत और आत्मविश्वास से भरा व प्रेरणादायी होता है।
- इसी तरह अहिंसा का भाव कलह या मानसिक दोषों से दूर और निर्भय रखता है, जिससे बेचैनी और व्यर्थ की उलझनों से बचकर मन लक्ष्य के प्रति स्थिर और एकाग्र रहता है।
- सत्य का प्रभाव परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र में छबि विश्वसनीय बनाता है। साफ-सुथरा व्यक्तित्व व छबि होना मान-सम्मान और कद ही नहीं बढ़ाता बल्कि लोगों को आपसे जोड़ता है।
- वहीं अहिंसा में प्रतिशोध की भावना का अभाव होता है, जो व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के साथ पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर प्रेम, विश्वास और मेलजोल बढ़ाता है।
गांधी के सपनों का भारत बनाने की सार्थकता तभी संभव होगी, जब मात्र इन 2 बातों को ही हर इंसान खुद से शुरुआत कर नैतिकता के साथ कर्म, वचन, आचरण और व्यवहार में उतारने का दृढ संकल्प कर लें। न कि मात्र खास अवसरों पर लोगों की भीड़ के साथ बापू की बातों को याद कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री मान ले।
Saturday, 1 October 2011
मां का चमत्कार: खुदाई करते ही लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं थी!
देवों की नगरी देवरिया में स्थित मां देवरही का इतिहास बहुत प्राचीनतम है और मां देवरही के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है. देवरही देवी के नाम पर जिले का नाम ही देवरिया पडा. देवी मां के दर्शन मात्र से ही एक साथ माता काली, दुर्गा और सरस्वती के दर्शन हो जाते हैं. वैसे तो यहां हर समय भक्तों की भीड जमी रहती है, लेकिन क्वार और चैत्र माह में नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों की भीड काफी बढ जाती है.इतिहासकारों के अनुसार प्राचीन काल में एक स्थान पर खुदाई के दौरान देवी के दो चरण मिले. लोगों के बुलाने पर काशी के विद्वानों ने चरणों की पूजा माता देवरही के रुप में करने को कहा तथा माता के चरणों की विधि पूर्वक पूजा अर्चना करने के बाद उन्हे माता देवरही के रुप में स्थापित किया. तभी से यह धाम भक्तों के आस्था का केन्द्र बन गया.
शहर के विद्वानों के अनुसार जब भगवान भोले नाथ माता सती का शव लेकर मृत्यु लोक में घूम रहे थे कि भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके अंगों को खंडित करते जा रहे थे तथा उनके अंग देश के कई हिस्सों में गिरे. बताया जाता है कि माता सती का चरण देवरण्य में गिरा.
उन्हीं के नाम पर देवरही से देवरिया का नाम पडा. इस मंदिर की देखरेख लगभग 300 वर्ष से पैकेली के धनहारी महराज के निर्देश पर हो रहा है. लगभग दस एकड क्षेत्रफल में फैले इस मंदिर में उन चरणों की श्रद्धालु माता की पूजा अर्चना करते हैं. वहां तीन मुखवाली एक प्रतिमा भी स्थापित है.
अगर आपको रोड पर दिखाई दे सांप तो समझ लें कि...
सांप एक ऐसा जीव है जिसे अपने सामने देखते ही लोगों के पसीने छूट जाते हैं। सांप का भय इतना अधिक रहता है कि काफी लोग सांप के नाम से ही घबराते हैं। शास्त्रों के अनुसार सांप को पूजनीय भी बताया गया है। महादेव नाग को आभूषण की तरह अपने गले में धारण करते हैं। सांपों से जुड़े कई शकुन और अपशकुन हमारे समाज में प्रचलित हैं।
यदि आप कहीं जा रहे हैं और रास्ते में आपको सांप दिखाई दे तो इसके कई प्रकार के संकेत बताए गए हैं। ऐसे समय में सांप का दिखाई देना सामान्यत: अपशकुन की श्रेणी में ही आता है। शास्त्रों के अनुसार शकुन और अपशकुन के संबंध में कई प्रकार की अवधारणाएं प्रचलित हैं। किसी भी कार्य की शुरूआत से पहले कई प्रकार की छोटी-छोटी घटनाएं होती हैं। इनमें से कुछ असामान्य सी भी प्रतीत होती हैं। ऐसी ही घटनाओं को शकुन और अपशकुन से जोड़कर देखा जाता है।
शकुन और अपशकुन की छोटी-छोटी घटनाओं में कई प्रकार के संकेत छिपे होते हैं जिन्हें समझने पर भविष्य में होने वाली संभावित घटनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। आजकल काफी लोग इन मान्यताओं को अंधविश्वास का नाम देते हैं जबकि पुराने समय इनका काफी अधिक महत्व माना जाता था।
जब भी आप किसी शुभ कार्य के लिए जा रहे हैं और रास्ते में कोई सांप दिख जाए तो इस अशुभ संकेत माना जाता है। इसका अर्थ यही है कि आप जिस कार्य के लिए जा रहे हैं उसमें आपको किसी प्रकार की कोई समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अत: जब भी ऐसा हो तो कुछ देर रुककर अपने इष्टदेव का स्मरण करके ही कार्य के लिए निकलने चाहिए। यदि संभव हो तो उस समय वह कार्य टाल दिया जाना चाहिए। जरूरी होने पर भगवान को याद करके कार्य करें।
यदि आप कहीं जा रहे हैं और रास्ते में आपको सांप दिखाई दे तो इसके कई प्रकार के संकेत बताए गए हैं। ऐसे समय में सांप का दिखाई देना सामान्यत: अपशकुन की श्रेणी में ही आता है। शास्त्रों के अनुसार शकुन और अपशकुन के संबंध में कई प्रकार की अवधारणाएं प्रचलित हैं। किसी भी कार्य की शुरूआत से पहले कई प्रकार की छोटी-छोटी घटनाएं होती हैं। इनमें से कुछ असामान्य सी भी प्रतीत होती हैं। ऐसी ही घटनाओं को शकुन और अपशकुन से जोड़कर देखा जाता है।
शकुन और अपशकुन की छोटी-छोटी घटनाओं में कई प्रकार के संकेत छिपे होते हैं जिन्हें समझने पर भविष्य में होने वाली संभावित घटनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। आजकल काफी लोग इन मान्यताओं को अंधविश्वास का नाम देते हैं जबकि पुराने समय इनका काफी अधिक महत्व माना जाता था।
जब भी आप किसी शुभ कार्य के लिए जा रहे हैं और रास्ते में कोई सांप दिख जाए तो इस अशुभ संकेत माना जाता है। इसका अर्थ यही है कि आप जिस कार्य के लिए जा रहे हैं उसमें आपको किसी प्रकार की कोई समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अत: जब भी ऐसा हो तो कुछ देर रुककर अपने इष्टदेव का स्मरण करके ही कार्य के लिए निकलने चाहिए। यदि संभव हो तो उस समय वह कार्य टाल दिया जाना चाहिए। जरूरी होने पर भगवान को याद करके कार्य करें।
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