Tuesday, 11 October 2011

30 हजार 'बच्चों' के इस बाप से मिलकर हैरान रह जाएंगे जनाब!


बुंदेलखण्ड में एक शख्स ऐसा भी है जो बेटे की मौत के बाद वृक्षों को ही अपनी औलाद मानकर उनकी सेवा कर रहा है। धरती को हरा-भरा बनाने का संकल्प लेने वाले भैयाराम आज हजारों वृक्षों के 'पिता' हैं।

  
चित्रकूट जिले में 40 वर्षीय भैयाराम पिछले तीन सालों से जिले के पहरा वनक्षेत्र के करीब 30,000 वृक्षों की अपनी संतान की तरह सेवा और देखरेख कर रहे हैं। वन क्षेत्र के अंदर घास-फूस की झोपड़ी बनाकर रह रहे भैयाराम पेड़ों को काटने वाले चोरों से उनकी रक्षा करने से लेकर उनकी निराई-गुड़ाई,कीड़ों से बचाव और सिंचाई तक का पूरा ख्याल रखते हैं।

  
भैयाराम ने कहा, "ये पेड़ ही मेरे बेटे हैं..आज की तारीख में मेरे लिए इनसे बढ़कर कोई नहीं है। मेरे दिन और रात इन्हीं पेड़ों के साथ गुजरता है। मैं इन्हीं के बीच अपनी आखिरी सांस लेना चाहता हूं।"

  
उन्होंने कहा, "मुझ्झे इस बात का गर्व है कि इन हरे-भरे वृक्षों से पर्यावरण संरक्षण में मदद के साथ-साथ लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा मिलेगी। पर्यावरण और मानव जाति का कल्याण मेरा इकलौता पुत्र शायद दुनिया में होकर भी नहीं कर पाता।"

  
तीन साल पहले इकलौते बेटे की मौत के बाद भैयाराम ने इन पेड़ों को अपनी संतान मानकर इनकी सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। वह बताते हैं, "पुत्र के जन्म के समय दस साल पहले मेरी पत्नी की मौत हो गई थी। उसके बाद मैंने अपने बेटे को पाल-पोषकर सात साल का किया। एक दिन अचानक रात को उसे उल्टियां हुईं और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। पत्नी और फिर इकलौते बेटे की मौत के बाद मैं पूरी तरह से टूट गया। बिना किसी मकसद के अकेलेपन में जिंदगी गुजारने लगा।"

  
जुलाई 2008 में राज्य वन विभाग की तरफ से इस इलाके में विशेष पौधरोपण अभियान के तहत 30 हजार शीशम, नीम, चिलवल और सागौन जैसे पेड़ों को लगाया गया था। तब भैयाराम ने श्रमिक के तौर पर पेड़ों को रोपित कराया था। भैयाराम के मुताबिक पेड़ों को लगाने के दौरान उनके मन में ख्याल आया कि क्यों न इन पेड़ों को ही वह अपनी संतान मानकर इनकी देखभाल करें।

  
उन्होंने स्थानीय वन अधिकारियों से अपने दिल की बात कही तो थोड़ी मान मनौवल के बाद वे राजी हो गए। कर्वी रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी नरेंद्र सिंह ने आईएएनएस से कहा, "शुरू में तो हमें थोड़ा संशय था कि भैयाराम इतना बड़ी जिम्मेदारी संभाल पाएगा या नहीं। लेकिन इन सालों में जिस तरह उसने अपनी संतान की तरह वृक्षों की देखभाल की, हम सभी लोग देखकर दंग रह गए।"

  
सिंह ने कहा, "शुरुआत में हमने उससे वृक्षों की देखभाल के लिए मेहनताने की पेशकश की थी लेकिन उसने साफ मना करते हुए कहा था कि 'अगर मैं मजदूरी लूंगा तो फिर मैं इन्हें न तो अपना पुत्र मान पाऊंगा और न ही उस तरह की फिक्रके साथ परवरिश कर सकूंगा'। उन्होंने कहा, "हम सभी भैयाराम के जज्बे को सलाम करते हैं कि पूरे परिवार को खोने के बाद उसने पेड़ों को अपना परिवार बनाया और आज देश-दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है।"

बेटा खोने का दर्द सीने में दबाए रखने से हुई जगजीत सिंह की मौत!

गजल सम्राट जगजीत सिंह का आज चंदनवाड़ी में अंतिम संस्‍कार कर दिया गया। ब्रेन हैमरेज के चलते करीब 15 दिन अस्‍तपाल में रहने के बाद सोमवार (10 अक्‍टूबर) को उनका निधन हो गया था। लेकिन बताया जाता है कि यह उनके निधन का तात्‍कालिक कारण था। असल में उनका निधन उस दर्द के चलते हुआ, जो उन्‍हें जवान बेटे की मौत के बाद मिला था।
मशहूर गायिका आशा भोंसले के मुताबिक जगजीत कभी भी लोगों के साथ अपना दुख नहीं बांटते थे और न ही लोगों के सामने उसे जाहिर होने देते थे। वह याद करती हैं कि जब उनके बेटे के निधन के बाद उन्‍हें सांत्‍वना देने गई थीं, तब उन्‍होंने कहा था कि इस बारे (बेटे की मौत) में बात नहीं करें। बकौल आशा, वह सारा गम अपने सीने में दबा कर रखते थे और शायद इसका उनकी सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ा।

1990 में जगजीत और चित्रा के बेटे विवेक की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उसके बाद जगजीत को जुबां पर गीत लाने में छह महीने लग गए थे और चित्रा की आवाज तो खामोश ही हो गई थी। चित्रा दो साल पहले अपनी बेटी को भी खो चुकी हैं। उनकी पहली शादी से जन्‍मी मोनिका ने बांद्रा के अपने फ्लैट में खुदकुशी कर ली थी।

जगजीत शुरू से ही अंतरमुखी स्‍वभाव के थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि किशोरावस्था में वे एक लड़की पर फिदा हो गए थे। जालंधर में पढ़ाई के दौरान साइकिल पर ही आना-जाना होता था। लड़की के घर के सामने साइकिल की चेन टूटने या हवा निकलने का बहाना कर बैठ जाते और उसे देखा करते थे। बहरहाल, उनका यह प्यार परवान नहीं चढ़ सका था।

जगजीत सिंह के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता है कि कपड़े प्रेस करना उनकी हॉबी थी। उन्हें घुड़दौड़ का भी बहुत शौक था, उन्होंने घोड़े पाले भी थे। बचपन में फिल्मों के शौक के चलते अक्सर सिनेमाहॉल में गेटकीपर को घूस देकर घुसते थे।

चैरिटी के अनेक कार्यों में वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। कई समाजसेवी संस्थाओं के सहायतार्थ गाया। ‘क्राई फॉर क्राई’ एलबम भी निकाला। मेहदी हसन के इलाज के लिए उन्होंने पाकिस्तान जाकर तीन लाख रुपए की मदद की थी। अपने संघर्ष के दिनों को याद कर नए कलाकारों की मदद के लिए तैयार रहते थे।


कहां तुम चले गए...

जन्म 8 फरवरी, 1941 को श्रीगंगानगर (राजस्थान) में। जन्म के समय पिता ने नाम दिया जगमोहन, पर अपने गुरु की सलाह पर बाद में कर दिया जगजीत।

पीडब्ल्यूडी में कार्यरत, पिता अमर सिंह पंजाब में दल्ला गांव के मूल निवासी थे और मां थीं बचन कौर। आर्थिक हालात ये थे कि बकौल जगजीत, ‘पतंग और रेडियो भी लक्जरी हुआ करते थे।’ शुरुआती साल बीकानेर में बीते, फिर श्रीगंगानगर लौटे।

पिता ने पं. छन्नूलाल शर्मा से संगीत की शिक्षा लेने भेजा। फिर छह साल उस्ताद जमाल खान से भी तालीम ली। कॉलेज के दिनों में एक रात चार हजार की भीड़ के सामने गा रहे थे कि बिजली चली गई। साउंड सिस्टम बैटरी के जरिए चालू रहा। जगजीत गाते रहे और क्या मजाल कि अंधेरे के बावजूद कोई उठकर गया हो!

स्नातक शिक्षा के लिए वे डीएवी जालंधर पहुंचे। यहां आकाशवाणी ने उन्हें ‘बी’ वर्ग के कलाकार की मान्यता दी। 1962 में जालंधर में ही उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के लिए स्वागत गीत रचा।

1961 में वे मुंबई पहुंचे। संघर्ष में पैसे खत्म हो गए थे। इसी हालत में ट्रेन के शौचालय में छुपकर बिना टिकट जालंधर गए।

मार्च 1965 में वे दुबारा मुंबई लौटे। सस्ती जगह पर रहते थे। खटमलों के साथ सोते थे। एक रात तो चूहे ने पैर काट खाया।

छोटी-मोटी महफिलों, घरेलू आयोजनों, फिल्मी पार्टियों, विज्ञापन जिंगल्स आदि में गाते थे। इसी बीच एचएमवी ने एक रिकॉर्ड के लिए उनसे दो गजलें गवाईं। इसी के कवर पर छपने वाले चित्र के लिए उन्होंने पहली बार दाढ़ी और पगड़ी हटाई।

एक जिंगल की रिकॉर्डिंग के दौरान अपनी भावी जीवन संगिनी चित्रा दत्ता से मिले। 19६९ में बिना धूम-धड़ाके, रिसेप्शन या उपहार के उनकी शादी हो गई। शादी पर खर्च हुए कुल जमा 30 रुपए।

एक कमरे के मकान में रहते थे। 1971 में पुत्र विवेक का जन्म। आर्थिक मजबूरियां ऐसी कि चित्रा ने 20 दिन के बच्चे को गोद में लेकर माइक पर जिंगल गाया। बावजूद इसके जगजीत महसूस करते थे कि तब वे ‘दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति’ थे।

1975 में एचएमवी से पहला एलपी ‘द अनफॉरगेटबल्स’ आया। इसकी रिकॉर्ड कामयाबी के बाद उन्होंने मुंबई में फ्लैट खरीदा।

1980 में फिल्म ‘साथ-साथ’ और ‘अर्थ’ में स्वर और संगीत दिया। 1987 में उनका ‘बियॉन्ड टाइम’ देश का पहला संपूर्ण डिजिटल सीडी एलबम बना। अगले साल टीवी सीरियल ‘मिर्जा गालिब’ में स्वर और संगीत दिया।

28 जुलाई, 1990 को एकमात्र पुत्र विवेक की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद आध्यात्मिकता और दर्शन की ओर झुकाव बढ़ा। पहला एलबम आया ‘मन जीते जगजीत’ (गुरबानी)।

संगीत के प्रति ऐसी प्रतिबद्धता कि 2001 में मां के अंतिम संस्कार के बाद उसी दोपहर कोलकाता में पूर्व निर्धारित कॉन्सर्ट के लिए पहुंचे।

2003 में पद्मभूषण सम्मान मिला।

नई दिशा (1999) व संवेदना (2002) के लिए प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के गीतों को सुर और संगीत दिया।


10 मई, 2007 को संसद के केंद्रीय कक्ष में प्रस्तुति दी।


लोकप्रिय एलबम
इकोज, द अनफॉरगेटबल्स, माइलस्टोन, कम अलाइव, द लेटेस्ट, बियॉन्ड टाइम, साउंड अफेयर, कहकशां, मिर्जा गालिब (सभी चित्रा सिंह के साथ) फेस टू फेस, लाइव विद जगजीत सिंह, मरासिम, मिराज, इनसाइट, क्राई फॉर क्राई, मां, सांवरा, हे राम।
यादगार गजलें
सरकती जाए है रुख से नकाब.., ये दौलत भी ले लो.., किया है प्यार जिसे.., मेरी जिंदगी किसी और की.., कोई चौदहवीं रात का चांद बनकर.., चराग आफताब गुम.., झूम के जब रिंदों ने पिला दी.., पहले तो अपने दिल की रजा जान जाइए.., मैं नशे में हूं.., अपने होंठों पर सजाना चाहता हूं.., जब किसी से कोई गिला रखना.., सच्ची बात कही थी मैंने.., कोई पास आया सवेरे-सवेरे...।
लोकप्रिय गीत
होंठों से छू लो तुम...(प्रेमगीत), झुकी झुकी सी नजर..(फिल्म अर्थ) तुमको देखा तो...(साथ-साथ), तुम इतना जो मुस्करा रहे हो...(अर्थ), फिर आज मुझे तुमको...(आज), हमसफर बनके हम...(आशियां), चिट्ठी न कोई संदेश...(दुश्मन), होशवालों को खबर क्या...(सरफरोश)।

Monday, 10 October 2011

हरभजन का जलवा: मुंबई चैंपियनों का चैंपियन, बेंगलूर को रौंद कर जीता खिताब

 आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर को रौंदकर चैम्पियंस लीग टी-20 खिताब पर अपना कब्जा जमा लिया। खिताबी भिड़ंत में मुंबई इंडियंस ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर को 31 रन से करारी शिकस्त देकर खिताब पर कब्जा जमाया है।

140 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बेंगलूर की टीम 19.2 ओवर में 108 पर ही ढेर हो गई। मुंबई इंडियंस के गेंदबाजों की कसी गेंदबाजी के सामने बेंगलूर का कोई भी बल्लेबाज टिक नहीं सका। बेंगलूर की तरफ से तिलकरत्ने दिलशान ने सबसे अधिक 27 रन बनाए, जबकि मुंबई इंडियंस की तरफ से हरभजन सिंह को 3 विकेट, अहमद, चहल और मलिंगा को 2-2 विकेट तथा पोलार्ड को 1 विकेट मिला।

इससे पहले मुंबई के लसिथ मलिंगा ने बेंगलूर को पहला झटका दिया। उन्होंने तिलकरत्ने दिलशान को पवेलियन भेजा। दिलशान ने आतिशी 27 रन बनाए। इसके लिए उन्होंने 20 गेंदों का सामना किया और 5 चौके लगाए। इसके बाद क्रिस गेल भी अपनी प्रवृत्ति के अनुकूल नहीं खेल सके और 12 गेंदों में 5 रन बनाकर हरभजन सिंह की गेंद पर पगबाधा आउट हो गए।

इसके बाद मयंक अग्रवाल 14 रन बनाकर आउट हो गए। अग्रवाल के बाद विराट कोहली भी अधिक देर तक टिक नहीं सके और 19 गेंदों में 11 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। फिर अंतिम गेंद पर छक्का मारकर बेंगलूर को जीत दिलाने वाले अरुण कार्तिक आज कमाल नहीं कर सके और बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए।

कार्तिक के बाद मोहम्मद कैफ के रूप में बेंगलूर को छठा झटका लगा। खराब फॉर्म से जूझ रहे कैफ इस मैच में भी कुछ नहीं कर सके और 7 गेंदों में महज 3 रन बनाकर आउट हो गए। कैफ के बाद कप्तान विटोरी 1 रन, सौरव तिवारी 17 रन, श्रीनाथ अरविंद 4 रन और राजू भटकल 6 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।

इससे पहले टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी मुंबई की टीम निर्धारित 20 ओवरों में 139 रन बनाकर ढेर हो गई। मुंबई की तरफ से फ्रैंकलिन ने सबसे अधिक 41 रन बनाए। वहीं, बेंगलूर के राजू भटकल ने सबसे अधिक 3 विकेट लिए। इसके अलावा कप्तान विटोरी ने 2 तथा नैन्स और अरविंद को 1-1 विकेट मिला।

वहीं, मुंबई इंडियंस को आज मैच के दूसरे ओवर में ही पहला झटका लग गया और ब्लीजार्ड महज 3 रन बनाकर रन आउट हो गए। नैन्स की गेंद पर उन्होंने एक शॉट लगाया, जिसपर वे एक रन चुराना चाहते थे। शॉट मारते ही वे दौड़ पड़े, लेकिन कंवर दूसरी साइड पर ही खड़े रहे।

इसके बाद डिर्क नैन्स ने सारुल कंवर को क्लीन बोल्ड कर दिया। कंवर 14 गेंदों में 13 रन ही बना सके। इसके बाद डिर्क नैन्स ने सारुल कंवर को क्लीन बोल्ड कर दिया। कंवर 14 गेंदों में 13 रन ही बना सके। कंवर के बाद रायडू ने पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन वे भी 22 रन बनाकर तीसरे विकेट के रूप में आउट हो गए।

फिर सूर्यकुमार यादव ने मुंबई के लिए तेजी से रन जुटाने की कोशिश की। लेकिन वे भी 24 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उन्होंने 17 गेंदों का सामना किया और 2 चौके तथा 1 छक्का लगाया। यादव के आउट होते ही सेट बैट्समैन फ्रैंकलिन भी 41 रन बनाकर रन आउट हो गए अपने अर्धशतक से चूक गए।

फ्रैंकलिन के बाद आतिशी पारी के लिए मशहूर किरोन पोलार्ड भी कमाल नहीं दिखा सके और महज 2 रन बनाकर छठे विकेट के रूप में आउट हो गए। इसके बाद कप्तान हरभजन सिंह भी महज 2 गेंदों का सामना करने के बाद बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। हरभजन सिंह के बाद सतीश 9 रन, लसिथ मलिंगा 16 रन और चहल 2 रन बनाकर आउट हुए।

आपकी राय
चैम्पिसंय लीग टी-20 का फाइनल जीत कर मुंबई इंडियंस ने खिताब पर अपना कब्जा जमा लिया। मुंबई इंडियंस की यह जीत बहुत धमाकेदार रही। इस जीत पर आपकी क्या राय है?

चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए...


मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह का आज मुंबई में निधन हो गया। जगजीत सिंह को ब्रेन हेमरेज के बाद हाल में मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
करीब 15 दिन पहले अस्‍पताल में भर्ती कराए गए जगजीत सिंह का डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया और उनकी हालत नाजुक बताई। जिस दिन जगजीत सिंह को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया, उस दिन मुंबई में उन्‍हें एक कार्यक्रम देना था।
70 साल के जगजीत सिंह को उस दिन पाकिस्तान के गजल गायक गुलाम अली के साथ एक कंसर्ट में हिस्सा लेना था।जगजीत सिंह ने फिल्म दुश्मन में दिल को छू लेने वाला बेहद भावुक कर देने वाला गाना गाया था।


इस गाने के बोल थे चिट्ठी न कोई संदेश...जाने वो कौन सा देश जहां तुम चले गए...। आज जगजीत जी भी हम सबको हमेशा के लिए छोड़कर उसी जगह चले गए हैं जहां से वह अब अब कभी वापस नहीं आएंगे।याद आएंगे वो और उनकी आवाज़ में गाए हुए सदाबहार नगमे।सुनिए उनकी आवाज़ में यह भाव विभोर कर देने वाला यही गाना...

Tuesday, 4 October 2011

चार लाइन ऐसी जिन्हें बोलने से सब करने लगेंगे आपकी तारीफ

यश, मान-सम्मान या इज्जत के बिना सुखी जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यश या तारीफ के लिए आपका कार्य काफी अधिक महत्व रखता है। यदि कोई व्यक्ति काफी परिश्रम के बाद भी सम्मान प्राप्त नहीं कर पाता है तो उसे हनुमानजी का ध्यान करना चाहिए।अष्टांग योग में बताए गए महत्वपूर्ण चरण ध्यान से जहां हमें स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है वहीं हनुमानजी के स्मरण से धर्म लाभ प्राप्त होता है। शांत एवं स्वच्छ वातावरण वाले स्थान पर किसी भी आसन में बैठ जाएं और प्राणायाम की क्रिया शुरू करें। प्राणायाम यानि सांस का लेना और छोडऩा। सांस लेने की क्रिया सामान्य रखें। मन शांत करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
यदि आप यश, मान-सम्मान प्राप्त करना चाहते हैं तो हनुमान चालीसा की निम्न पंक्तियों का जप करें-

लाय संजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाय।।
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

इन पंक्तियों का अर्थ है कि पवनपुत्र श्री हनुमानजी श्रीराम के भाई लक्ष्मण के लिए संजीवनी बुटी लेकर आए और उनका जीवन बचाया। हनुमानजी के इस उपकार से श्रीराम अति प्रसन्न हुए और उनका गुणगान किया। श्रीराम ने हनुमानजी की तुलना उनके सबसे प्रिय भाई भरत से की है।जिस प्रकार श्रीराम ने हनुमानजी का गुणगान किया है वैसा ही गुणगान या यश-सम्मान बजरंग बली अपने भक्तों को भी प्रदान करते हैं। इन पंक्तियों से जप से हनुमान अति प्रसन्न होते हैं भक्तों के दुख-दर्द, परेशानियों को दूर करते हैं।

जिस घर में होती है ऐसी खिड़की वहां आता है पैसा ही पैसा, क्योंकि...

सभी के घरों में पैसा या धन, गहने आदि कीमती वस्तुएं रखने की अलग और खास जगह होती है। जहां पैसा आदि रखा रहता है उस स्थान का प्रभाव वहां रहने वाले सभी लोगों पर पड़ता है। यदि धन और गहने शुभ स्थान पर रखे होंगे तो सभी सदस्यों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ेगा और यदि अशुभ स्थान पर रखेंगे तो इसका बुरा प्रभाव घर की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

घर में पैसा या अन्य कीमती सामान कहां रखना चाहिए? इस संबंध में वास्तु के अनुसार घर में कई स्थान बताए गए हैं जहां हम पैसा आदि रख सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के घर से बाहर निकलते समय सीधे हाथ की ओर खिड़की हो और जिस कमरे की ये खिड़की है वहां धन, पैसा, ज्वेलरी या अन्य कीमती सामान रखा रहता है तो वहां रहने वाले सभी लोग भाग्यशाली होते हैं। इसके साथ पैसा जहां रखा रहता है उस स्थान पर सूर्य की सीधी किरणें भी आना चाहिए। वास्तु के अनुसार घर में ऐसी स्थिति बहुत शुभ मानी जाती है।

ध्यान से समझें यदि किसी व्यक्ति के घर से आप बाहर आ रहे हैं उस समय आपके सीधे हाथ की ओर कोई खिड़की दिखाई दे और वह खिड़की जिस कमरे की है उस कमरे में धन आदि कीमती सामान रखा रहता है और पैसा जहां रखा रहता है उस स्थान पर सूर्य की सीधी किरणें भी आना चाहिए। वास्तु के अनुसार घर में ऐसी स्थिति बहुत शुभ मानी जाती है। तो वहां रहने वाले सभी लोगों को हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है और वहां सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु के अनुसार वहां रहने वाले किसी एक पुत्र का भाग्य बहुत अच्छा रहता है, वह शिक्षा के क्षेत्र में और आय के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं प्राप्त करता है। कुछ परिवारों में बेटियां के लिए घर में इस प्रकार की व्यवस्था फायदेमंद रहती है।

यदि आपके घर में भी ऐसी खिड़की है तो आप भी वहां धन आदि कीमती सामग्री रख सकते हैं। इससे आपके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। ध्यान रहे घर की अन्य स्थितियों पर भी विचार किया जाना आवश्यक है। यदि घर में अन्य कोई बड़े वास्तु दोष हैं तो उनका भी उचित उपचार किया जाना चाहिए। पैसा ऐसे स्थान पर ही रखा जाना चाहिए जहां चोर आदि से हमारा धन सुरक्षित रहे। 

11 नींबू से आपकी हर परेशानी हो जाएगी गायब, जानिए कैसे?

हर समस्या या संकट का समाधान हो जाता है मां काली की पूजा से। भक्तों से शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवी-देवताओं में से एक हैं मां काली। माता अपने भक्तों के सभी कष्ट और क्लेश पलभर में दूर कर देती हैं। काली माता मां दुर्गा का ही एक रूप है। नवरात्रि के दिनों में देवी मां की आराधना के श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।

नवरात्रि के अंतिम दो दिन शेष है, अत: इन दिनों में आप एक छोटा सा उपाय कर दें, आपको सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा। मां काली अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं, वे सही-गलत जरूरी देखती हैं परंतु जो भी सही मनोकामना होती है वह अवश्य ही पूरी होती है।

प्रात: काल सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होकर मां काली के मंदिर जाएं। देवी मां को सात, ग्यारह या इक्कीस नींबूओं की माला बनाकर अर्पित करें। माला घर से बनाकर ले जा सकते हैं। माला अर्पित करने के बाद मां के मस्तस्क पर गुलाब के फूल चढ़ाएं और लाल गुलाब की माला समर्पित करें। इसके बाद मां काली को गुड के प्रसाद का भोग लगाएं। यह प्रसाद वहां अन्य भक्तों को वितरित कर दें। इसके अतिरिक्त नियमित रूप से मां काली को सप्ताह में या माह में एक बार अवश्य गुड का प्रसाद चढ़ाएं और गरीबों की मदद करें।

इस प्रकार करने से आपके कष्ट जल्दी ही कम होने लगेंगे और आपका जीवन सुखी और समृद्धिशाली बना रहेगा।