Sunday, 23 March 2014

राजस्‍थान से इंडियन मुजाहिदीन के चार आतंकवादी गिरफ्तार, 50 किलो विस्‍फोटक बरामद

लोकसभा चुनाव से पहले राजस्‍थान में इंडियन मुजाहिदीन के मॉड्यूल का भांडाफोड़ हुआ है. दिल्‍ली पुलिस और राजस्‍थान पुलिस के ज्‍वाइंट ऑपरेशन में राज्‍य के जयपुर और जोधपुर से चार आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तारी के बाद पूरे राजस्‍थान में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. जयपुर और जोधपुर में आतंकवादियों की तलाश के लिए ज्‍वाइंट ऑपरेशन अब भी जारी है. आतंकवादियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि ये बीजेपी के पीएम उम्‍मीदवार नरेंद्र मोदी पर हमले की साजिश रच रहे थे. केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने 'आज तक' से बातचीत में आतंकवादियों की गिरफ्तारी को बड़ी कामयाबी बताया है. हालांकि, उन्‍होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से नरेंद्र मोदी को डरने की जरूरत नहीं. शिंदे ने कहा कि जिन नेताओं को खतरा है, उन्‍हें पर्याप्‍त सुरक्षा दी गई है.
दिल्‍ली पुलिस की स्‍पेशल सेल और राजस्‍थान पुलिस के इस ऑपरेशन में गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों में से वकास उर्फ अहमद भी है. यह मुंबई और पुणे में हुए बम धमाकों का वांटेड है. एनआईए ने इसकी गिरफ्तारी पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. इसका असली नाम अहमद जावेद है जो पाकिस्‍तान का रहने वाला है. भारत में आतंकवादियों को ट्रेनिंग देता था. यह आईईडी बनाने का एक्‍सपर्ट बताया जा रहा है. यह आतंकी यासीन भटकल का दाहिना हाथ है.
आतंकवादियों के खिलाफ खुफिया एजेंसियों और पुलिस का यह ऑपरेशन पिछले पांच दिनों से चल रहा है. गिरफ्तार किए गए अन्‍य आतंकवादियों में एक शाकिब जोधपुर से जबकि वकार को जयपुर से गिरफ्तार किया गया है. इनके कब्‍जे से करीब 50 किलो विस्फोटक भी बरामद किए गए हैं. सूत्र बता रहे हैं कि एक आतंकवादी भाग निकला है जिसकी तलाश की जा रही है. सूत्रों का कहना है कि ये आतंकवादी चुनावी सभाओं के दौरान विस्‍फोट करने की योजना बना रहे थे.
 
आईबी की सूचना मिलने के बाद दिल्‍ली पुलिस और राजस्‍थान पुलिस ने सफलतापूर्वक इस ऑपरेशन को अंजाम दियाः आतंकवादियों की गिरफ्तारी से साबित हो गया है कि आतंकवादी आम चुनाव के दौरान किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं. आशंका है कि आतंकवादी किसी राजनेता का अपहरण कर सकते हैं या बम धमाके कर चुनाव के दौरान गड़बड़ी फैला सकते हैं.

दूसरी सदी का यह कस्बा है विश्व धरोहर

दूसरी सदी का यह कस्बा है विश्व धरोहरलीबिया के नेलुत जिले में है यह ऐतिहासिक कस्बा घडामेस। दूसरी सदी के यह घर बनाने में मिट्टी, चूना पत्थर और ताड़ के पेड़ के तने का उपयोग किया गया था, ताकि गर्मियों में ज्यादा न तपे। इनमें ग्राउंड फ्लोर सामान रखने के लिए और फर्स्ट फ्लोर परिवार के लिए होता था। 1986 में विश्व धरोहर की सूची में शामिल इस जगह को ‘दि पर्ल ऑफ दि डेजर्ट’ भी कहा जाता है। 

Saturday, 22 March 2014

पार्टी इंज्वॉय करें लेकिन संभलकर

नए साल के आगाज की मस्ती का लुत्फ जमकर उठाएं, लेकिन अपरिचित लोगों से दूरी बनाकर सावधानी के साथ..
नए साल के जश्न की उलटी गिनती शुरू हो गई है। हर कोई जश्न के उन्माद में डूबने को तैयार है। फ्रेंड्स क्लब, फार्म हाउस से लेकर शहर के होटल्स तक में तैयारियां चरम पर है। कानपुर के कई रेस्त्रां और होटल्स ने न्यू ईयर की कपल्स पार्टी ऑर्गनाइज की है। मस्ती के साथ कपल्स पार्टी और डीजे पार्टीज का मजा लीजिए, लेकिन थोड़ा संभलकर। नए साल के जश्न में किसी अपरिचित से कम समय में हुई दोस्ती भारी भी पड़ सकती है।
जज्बातों में न आएं
कई बार ऐसा होता है कि जब कोई बड़ी पार्टी होती है तो लोग बिना पहचान के ही हंसी-मजाक कर नजदीकी बढ़ा लेते है। कई बार ड्रिंक्स और स्नैक्स की पेशकश भी कर दी जाती है, लेकिन हर दिन घट रही घटनाओं को देखते हुए यह कह पाना मुश्किल होता है कि फिर इसके बाद आपको किसी समस्या का सामना न करना पड़े। एक होटल के इवेंट मैनेजर एस.बी. शुक्ला कहते है, ''हमारे यहां की न्यू ईयर कपल पार्टी में अधिकतर लोग ऐसे होते है, जो होटल के मेंबर होते है और हम उनकी सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त करते है। इसके लिए होटल की ओर से मेल-फिमेल सिक्योरिटी उपलब्ध रहती है। फिर भी हमारी सलाह रहती है कि आप अपने कपल के साथ ही जश्न मनाए। किसी दूसरे से नजदीकी बनाने की कोशिश न करे।''
कपल पार्टियों में ही लें एंट्री
बात रेस्त्रां और होटल्स की छोड़ दें तो ज्यादा खतरा फार्महाउस और फ्रेंड्स क्लब्स की पार्टियों में होता है। यहां न ही सुरक्षा का कोई बंदोबस्त होता है और न ही जश्न और उल्लास का कोई पैमाना। ऐसे में किसी अपरिचित की निकटता अनजाने में ही सही दुर्घटना का सबब बनती है। पुलिस ऑफीसर रंजना गुप्ता कहती है, ''कपल पार्टियों में तो फिर भी सुरक्षा की गारंटी होती है, लेकिन छोटे क्लब्स और फार्महाउस की पार्टियों में मर्यादाओं के सारे पैमाने टूट जाते है। ऐसे में ही नशीला पदार्थ खिलाने या अभद्रता वाले मामलों का जन्म होता है। बेहतर रहेगा कि आप नए साल का मजा कपल या परिचितों वाली पार्टी में शामिल होकर लें।''
घर का कोई हो साथ
कई बार ऐसा होता है कि देर रात पार्टी समाप्त होने पर घर छोड़ने के लिए ऐसे कई लोगों के ऑफर मिलते है जो थोड़े समय पहले ही आपको मिले और दोस्त बन गए। ऐसे किसी मित्र या परिचित के बहकावे में न आएं। एडवोकेट सुचित्रा दीक्षित कहती है, ''बेशक नए साल का जश्न मनाएं और पार्टियों में शिरकत करे, लेकिन अगर आप शादी-शुदा नहीं है तो अपने अभिभावक या भाई को साथ लेकर पार्टी इंज्वाय करे। इससे किसी भी तरह की मुसीबत से आप सुरक्षित बनी रहेगी।''

कुछ 2013 नया हो जाएं

 दिन रह गए हैं नया साल आने में। आप भी नए साल में कुछ नया करने का संकल्प जरूर ले रहे होंगे। नई डायरी बना रहे होंगे। नई योजनाएं बनाई होंगी, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि कुछ दिन तो आपके रिजॉल्यूशंस जोर-शोर से पूरे हों और कुछ समय बाद ही वापस अपने पुराने ढर्रे पर आ जाएं। नया करने की बातें करते रहना ही काफी नहीं, इन पर टिके रहना भी जरूरी है। क्या आप तैयार हैं नए साल में खुद से किए गए वायदे पूरे करने के लिए
जैसे ही नया साल करीब आने लगता है ज्यादातर महिलाएं ढेर सारे वायदे करती हैं अपने आपसे, लेकिन अपने रिजॉल्यूशंस को एक सीरियस कमिटमेंट की तरह नहीं लेतीं। कुछ दिन बीतते-बीतते वे इन पर अमल करने के बजाय इन्हें भूलने लगती हैं। इससे उन संकल्पों का कोई मतलब नहीं रह जाता, जो आपने लिए थे। इसके बावजूद आप अगला साल आने पर फिर उत्साह के साथ रिजॉल्यूशन लेती हैं, लेकिन पिछले संकल्पों को न तो याद रखतीं और न ही उससे कोई सबक लेती हैं। जरा सोचें, ऐसे रिजॉल्यूशंस का क्या लाभ, जिसे आप खुद निभा न पाएं। इन्हें निभाना कोई मुश्किल नहीं। हां, इसके लिए थोड़ी दृढ़ता की जरूरत है।
बन नहीं पाई कूल मॉम
'लगता है मैं बच्चों पर कुछ ज्यादा ही सख्ती करती हूं। आने वाले साल में मैं कूल मॉम बनूंगी। बच्चों और पति के मोबाइल फोन भी चेक नहीं करूंगी। इससे उन्हें लगता है कि मैं उन पर विश्वास नहीं करती।' अपने आपसे बुदबुदा रही थीं अंकिता अग्रवाल। उन्हें लग रहा था कि अपनी तांक-झांक और डांट-फटकार की आदत उन्हें छोड़ देनी चाहिए। इसलिए उन्होंने नए साल में यही प्रण ले लिया। जब बच्चे लापरवाही करते तो उनका मन करता चीखने का, लेकिन खुद को समझातीं और आवाज में कोमलता लाकर बच्चों से बात करतीं। अपने टीनएज बच्चों के सेलफोन चेक करने के लिए आगे बढ़तीं, अगले ही पल खुद पर ब्रेक लगा लेतीं। घर में सब हैरान। बच्चों तक को कुछ अजीब सा लग रहा था। बात पति की समझ से भी बाहर थी। आखिर अंकिता को हुआ क्या है? कुछ दिन तक तो यह सिलसिला चला, पर ज्यादा दिन तक सहनशील बने रहने में कामयाब नहीं हो पाई अंकिता। वापस अपने रूप में आ ही गई। आज भी वह कहती हैं, 'बहुत आसान है संकल्प लेना, लेकिन निभाना उतना ही मुश्किल। अपनी आदतों को छोड़ने के लिए बहुत ताकत चाहिए जो सब में नहीं होती।'
वेट लूज करना ही है
'इस साल तो मैं अपना वेट लूज करके ही रहूंगी। चाहे कुछ भी हो जाए सुबह जल्दी उठकर सैर पर जाऊंगी। वर्कआउट में रुकावट नहीं आने दूंगी। योग क्लासेज जॉएन करूंगी। व्यायाम को भी पूरा टाइम दूंगी।' यह नया नहीं हर साल लिया जाने वाला संकल्प है, लेकिन 100 में से 90 महिलाएं तो इसे नया करने के तौर पर ही लेती हैं। हर साल एनर्जी के साथ शुरुआत भी करती हैं, लेकिन जल्दी ही सब फुस्स हो जाता है। न तो डाइट पर कंट्रोल रह पाता है और न ही समय निकल पाता है एक्सरसाइज के लिए। लाइब्रेरियन श्वेता सिंह कहती हैं, 'मुझे देर तक सोने और मॉर्निग वॉक नहीं करने की गंदी आदत है। मैं हर साल ये दोनों रिजॉल्यूशन लेती हूं, पर कभी भी पूरा नहीं कर पाती। जनवरी महीने के पाचवें दिन ही मेरा संकल्प धराशायी हो जाता है। संकल्प पूरा करने के लिए आत्मविश्वास बहुत जरूरी है, जिसका मुझमें अभाव है।'
दोस्त से पूरा हुआ संकल्प
ऐसा नहीं है कि संकल्प हमेशा टूटते ही हैं। अगर आपकी विल पॉवर मजबूत है और दोस्तों का साथ है तो आप अपने कमिटमेंट को पूरा कर सकते हैं। पेशे से होम्योपैथ चिकित्सक मधु रंजन अपने रिजॉल्यूशन को पूरा करने के बारे में कुछ यूं बताती हैं, 'स्टूडेंट लाइफ में नए साल और रिजॉल्यूशन को लेकर मन में गजब का उत्साह रहता था। मुझे आज भी वो दिन अच्छी तरह याद हैं, जब मैं मुजफ्फरपुर यूनिवर्सिटी से बॉटनी में एमएससी कर रही थी। पाच-छह लड़कियों वाला हमारा ग्रुप पूरी यूनिवर्सिटी में बेस्ट था। हम पढ़ाई-लिखाई से लेकर कॉलेज की कई दूसरी एक्टिविटीज में भी आगे रहते। नए साल पर हम लोगों ने एक रिजॉल्यूशन लिया कि हमें यूनिवर्सिटी एग्जाम में अव्वल आना है और हम लोगों ने ऐसा कर दिखाया।' मधु का मानना है, 'अगर आपके ग्रुप के किसी भी एक साथी में नेतृत्व क्षमता है तो आप आगे निकल सकते हैं। हमारे ग्रुप में रितिका बहुत तेज और होशियार थी। वह किसी भी टॉपिक पर बहस कर सकती थी और रिसर्च कर कुछ महत्वपूर्ण निकाल सकती थी। उसी की वजह से हमारा संकल्प पूरा हुआ।'
दोस्तों की मदद कारगर
लंदन में एक रिसर्च से साबित हुआ है कि सत्तर फीसदी से ज्यादा लोग अपने न्यू ईयर रिजॉल्यूशंस सात दिन में भूल जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण उनमें बदलाव की इच्छा का न होना है। साथ ही वे इस बदलाव के लिए अकेले जूझते रहते हैं। अपने दोस्तों की मदद नहीं लेते। अगर करीबियों की मदद लें तो संकल्प पूरे हो सकते हैं।
केवल 10 प्रतिशत रहते हैं कायम
एक सर्वे के आधार पर की गई शोध से पता चलता है कि ज्यादातर लोग न्यू ईयर रिजॉल्यूशंस कुछ ही दिन में भूल जाते हैं। रिसर्च के अनुसार छह महीने के बाद आधे लोग ही संकल्प पूरा करने के लिए मेहनत करते हैं और साल के अंत तक तो मात्र 10 प्रतिशत लोग ही संकल्प पर कायम रह पाते हैं।
क्यों टूटते हैं रिजॉल्यूशंस
-नए साल में नई ऊर्जा भरपूर होती है। हम रिजॉल्यूशंस की लंबी लिस्ट बना लेते हैं, लेकिन इन पर डटे रहना विल पॉवर का खेल है। शुरुआत तो हो जाती है, लेकिन आगे निभाना असंभव सा हो जाता है।
-अति उत्साह में हम ऐसे भारी भरकम संकल्प ले लेते हैं, जिन्हें पूरा करना हमारे लिए मुश्किल हो जाता है।
-नए साल में कुछ नया जोड़ना तो ठीक है, लेकिन बोझ की तरह नया लादना ठीक नहीं। नया करने के चक्कर में ऐसा न हो कि कुछ पुराना पीछे छूट जाए।

आवाज भी आजाद हो

अनामिका, वीरागना, दामिनी या निर्भया। आपको इनमें सबसे अच्छा नाम कौन सा लगा? सभी अच्छे हैं न! अगर मुझसे पूछेंगे तो मैं कहूंगी, अच्छे सब हैं, पर सच्चा कोई नहीं। मेरे हिसाब से भारतीय युवतियों पर ये नाम नहीं जंचते। उनके नाम होने चाहिये - नीरव, नि:शब्द या खामोश।
आज सारा देश उन्माद में है। विद्रोह का कोलाहल है। हर तरफ बलात्कार के खिलाफ नारे लग रहे हैं। मैं फिर भी शात हूं। सोच रही हूं, क्या ये कोलाहल हमारे समाज को कोई दिशा दे सकता है? क्या हमारे पास इस दानवता से निपटने का कोई और तरीका है?
मेरे हिसाब से जो शक्ति नारी के दो शब्दों में है वो हुजूम के नारों में नहीं, पर इस देश में कितनी ऐसी किशोरियां हैं जो पुरुष उत्पीड़न या छेड़छाड़ के खिलाफ आवाज उठाने की शक्ति रखती हैं? हर नारी को कहीं न कहीं, कभी न कभी अपने बचपन या कैशोर्य में पुरुषों के अवाछनीय व्यवहार का सामना करना पड़ा है। कैशोर्य के दहलीज पर खड़ी बच्ची के सीने पर घूमती गिद्ध सी नजरें, दर्जी का वह टेप जो हर उस जगह का नाप लेता है जिसकी सिलाई में कोई आवश्यकता नहीं या वह दिल का बीमार डॉक्टर जो नाड़ी के बदले, बदन का वो हर हिस्सा स्पर्श करना चाहता है जिसका मर्ज से कोई सरोकार नहीं या फिर वो चाचा या मामा जिसमें रिश्ते की निर्मलता नहीं, बल्कि वासना की लौलुपता होती है। हममें से कितनी ऐसी हैं जिन्होंने इसके खिलाफ बचपन में आवाज उठायी है? अगर उठाई होती तो शायद हम आज जंतर-मंतर या इंडिया गेट के हुजूम के कोलाहल के आश्रित न रहते।
आज की लड़कियां, जो जमाने के अनुसार आधुनिक और स्वच्छंद हो चली हैं, उनमें भी इतनी उन्मुक्तता नहीं कि वो पुरुषों के दुराचार के खिलाफ आवाज उठा सकें, वो हमेशा यह दिखाती हैं कि मानो कुछ हुआ ही नहीं हो। मैं खुद ही कितनी ऐसी लड़कियों को जानती हूँ जो हर प्रकार से आधुनिक होने के बावजूद बस में चुपचाप बैठी रहेंगी बावजूद इसके कि बगल का मर्द सोने का बहाना कर उन पर झूल रहा होगा या फिर सीट के नीचे उसकी टांगें अपने पाले को लांघ बिना वजह उनकी जींस को छू रहीं होंगीं। मैं ऐसी युवतियों को भी जानती हूं जो आठ घटे की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बिल्कुल सीट के कोनों में दुबककर बैठी रहेंगी चाहे किनारे की सीट पर सोया हुआ सह यात्री बार-बार ऊंघता हुआ उनके सीने पर सिर मारता रहे।
आखिर लड़कियां क्यों चुप रहती हैं? इसलिये कि उन्हें समाज से डर लगता है या इसलिये कि हो सकता है पास बैठा मर्द मासूम हो! या फिर मां-बाप ने हमेशा ये सिखाया है, जाने दो या फिर इस भय से कि लोग कहेंगें तुम्हीं ने डोरे डाले थे!
आज पुरुष वर्ग में स्त्री निर्बलता चुटकुलों का विषय है। मुझे आज भी याद है जब मेरी मेरी एक सहेली अपनी आपबीती सुना रही थी तो एक पुरुष मित्र ने कहा, अगर मैं होता तो मैं भी यही करता, क्योंकि आप हैं ही इतनी सुंदर।
इस देश में हर वर्ग का स्त्रियों के प्रति एक ही दृष्टिकोण है। कुछ दिनों पहले जब मुंबई में गेटवे पर एक मासूम विदेशी पर्यटक को दु‌र्व्यवहार के बाद निर्ममता से मौत के घाट के उतार दिया गया था तो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के अखबार ने मत रखा था कि लड़की के साथ ऐसा इसलिये हुआ, क्योंकि उसने आमंत्रित करने वाले छोटे-छोटे कपड़े पहन रखे थे। मानो छोटे कपड़े कोई आवरण नहीं, बल्कि आमंत्रण हैं!
मुझे खुशी है कि वक्त बदल रहा है और उसके साथ हमारे देश की लड़कियां भी बदल रही हैं। मेरी एक सहेली ने मुझे बताया कि कैसे उसकी बिटिया ने जब अपने एक रिश्तेदार को उसके साथ बदतमीजी करते हुये देखा तो पूरे परिवार में ढिंढोरा पीट दिया। उसने न सिर्फ अपने मां-बाप को बताया, बल्कि अपने दादा और नाना से भी इसका जिक्र किया, पर इस देश की कितनी ऐसी लड़कियां ऐसा कर सकती हैं? लड़कियों को इस बात का अहसास होना जरूरी है कि आज के समाज में दु:शासनों की संख्या महाभारत के युग से कहीं अधिक है। हमें अपनी बच्चियों को आवाज उठाने की आदत बचपन से डालनी होगी। बदतमीजी चाहे कितनी भी छोटी हो; अपनों की हो या परायों की, लड़कियों को तुरंत आवाज उठानी होगी। चुप्पी साधना इस सामाजिक अपराध को बढ़ावा देना है ।
अनामिका, दामिनी, वीरागना, निर्भया! उतिष्ठ!! जागृत!!

रिश्तों की जमा पूंजी

दांपत्य जीवन में अपने रिश्ते को और बेहतर बनाने की शुरुआत आपको साल के पहले दिन से ही करनी चाहिए। इसके लिए आप मैरिज काउंसलर डॉ. अनु गोयल द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल करने का प्रयास करें:
1. सबसे पहले अपने रिश्ते का मूल्यांकन करें और सचेत रूप से यह जानने की कोशिश करें कि आपके व्यवहार में कौन सी ऐसी बातें हैं, जो आपके लाइफ पार्टनर को नापसंद हैं। खुद से वादा करें कि आप कोई भी ऐसा व्यवहार नहीं करेंगे/करेंगी, जिससे आपके साथी की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
2. दांपत्य जीवन में पति-पत्नी दोनों की पसंद-नापसंद और रुचियां हमेशा एक जैसी नहीं होतीं। फिर एक खास उम्र के बाद किसी भी इंसान के लिए अपने व्यक्तित्व को बदल पाना संभव नहीं होता। इसलिए आपका साथी जैसा भी है, उसे उसी रूप में अपनाने की कोशिश करें।
3. जिन मुद्दों पर आपके विचार नहीं मिलते, उन पर अनावश्यक बहस करने से बचें क्योंकि इससे रिश्ते में बेवजह तनाव बढ़ता है।
4. अपने रिश्ते में क्वॉलिटी टाइम और पर्सनल स्पेस के बीच सही संतुलन बनाए रखें। रोजाना फुर्सत के कुछ ऐसे पल जरूर निकालें, जब आप एक-दूसरे के साथ अपनी भावनाएं बांट सकें। इसके अलावा अपने साथी को कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दें ताकि उसे रिलैक्स होकर अपनी रुचि से जुड़े कार्य करने का मौका मिले।
5. अब तक लोग ऐसा मानते थे कि करीबी रिश्ते में औपचारिकता की कोई जरूरत नहीं होती, पर आप अपने पार्टनर के साथ थोड़ा शिष्टाचार निभाकर देखें। खास मौकों पर एक-दूसरे को उपहार देना, दिन में एक बार ऑफिस से फोन करके एक-दूसरे का हाल पूछना, जहां जरूरत हो वहां सॉरी, थैंक्यू जैसे शब्द बोलना आदि ऐसी छोटी-छोटी बातें हैं, जिससे आपके मन में परस्पर प्यार और सम्मान की भावना पैदा होती है।
मैं होममेकर हूं। इस साल मैंने खुद से वादा किया है कि अपने दांपत्य जीवन को पहले से ज्यादा खुशहाल बनाने की कोशिश करूंगी। मेरे पति अपनी सेहत के प्रति बेहद लापरवाह हैं। मैं उनकी यह आदत सुधारने की कोशिश करूंगी। अपने ज्यादा बोलने की आदत पर नियंत्रण रखूंगी क्योंकि इससे मेरे पतिदेव परेशान हो जाते हैं। मीनाक्षी दत्ता, मोहाली
प्रोफेशनल लाइफ में
किस्तें चुकाने में कोताही न बरतें
आपकी प्रोफशनल लाइफ के लिए भी रिश्ते बहुत मायने रखते हैं क्योंकि आपके करियर की सफलता बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर करती है कि अपने सहकर्मियों के साथ आपका व्यवहार कैसा है। इसलिए करियर में सफलता पाने के लिए नियमित रूप से अच्छे व्यवहार की किस्तें अदा करना न भूलें। इसीलिए यहां मैनेजमेंट गुरू प्रमोद बत्रा आपको दे रहे हैं कुछ उपयोगी सुझाव :
1. करियर में सफलता के लिए सिर्फ आपकी कार्यकुशलता ही काफी नहीं है, बल्कि अपने साथ कार्यरत लोगों के साथ आपका व्यवहार भी शालीन और सहयोगपूर्ण होना चाहिए। 2. सहकर्मियों का सहयोग पाने के लिए यह बहुत जरूरी है कि आप पहले स्वयं आगे बढ़कर उनकी मदद करें।
3. कार्यस्थल पर कई बार प्रोफेशनल मुद्दों को लेकर सहकर्मियों से बहस भी हो जाती है, लेकिन ऐसी बातों को दिल पर न लें और अपना व्यवहार हमेशा संयत रखें।
4. परनिंदा से दूर रहें। इससे कार्यस्थल का माहौल खराब होने के साथ आपके कीमती वक्त की भी बर्बादी होती है।
5. आप अपने फील्ड में कार्यरत कुछ नए लोगों के साथ भी परिचय बढ़ाने की कोशिश करें। कार्यक्षेत्र में आने वाले नवीनतम बदलावों से स्वयं को अपडेट रखें।
नए साल में मैं अपना सारा ध्यान प्रोफेशनल लाइफ पर केंद्रित करूंगी। मैं बीडीएस कंप्लीट कर चुकी हूं और अब आगे मास्टर्स की तैयारी कर रही हूं। इसके लिए मैं कैलिर्फोनिया जाना चाहूंगी क्योंकि वहां डेंटिस्ट्री की पढ़ाई बहुत अच्छी होती है।
डॉ. अंकिता, मुंबई
खुद से भी करें प्यार
अपडेट रखें अपना अकाउंट
यह बात सुनने में थोड़ी अटपटी जरूर लग सकती है, लेकिन सच्चाई यह है कि दूसरों से अच्छा व्यवहार करना तभी संभव है, जब आप खुद से भी प्यार करना सीख लें। इसीलिए मनोवैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अशुम गुप्ता आपको यहां दे रही हैं, कुछ सुझाव :
1. खुद से प्यार करने का मतलब स्वार्थी होना कतई नहीं है, बल्कि आपको अपने 'स्व' से इतना लगाव होना चाहिए कि आप अपने आंतरिक और बाह्य व्यक्तित्व को निखारने के लिए निरंतर प्रयासरत हों।
2. दिनचर्या और संतुलित खानपान अपनाएं।
3. प्रतिदिन कम से कम एक घंटे का समय अपने लिए जरूर निकालें। इस दौरान आप अपनी रुचि से जुड़ा कोई भी ऐसा कार्य करें, जिससे आपको सच्ची खुशी मिलती हो।
4. जीवन में आपकी प्राथमिकताएं हमेशा स्पष्ट होनी चाहिए और प्राथमिकता सूची के अनुसार लक्ष्यों को हासिल करने का प्रयास करें।
5. उम्र से हम चाहे कितने ही बड़े क्यों न हो जाएं पर हर इंसान के भीतर कहीं न कहीं एक बच्चा जरूर छिपा होता है। अपनेभीतर छिपे इस बच्चे की मासूमियत को जिंदा रखें। हमेशा खुश रहें और कभी भी तनाव को अपने आसपास फटकने न दें।
घर-परिवार की जिम्मेदारियों की वजह से अब तक मैं अपने ऊपर ध्यान नहीं दे पाती थी, पर मैंने इस बार यह संकल्प लिया है कि वर्ष 2012 में अपने लिए समय जरूर निकालूंगी। प्रतिदिन सुबह उठकर मॉर्निग वॉक और योगाभ्यास करूंगी। पढ़ना मेरी हॉबी है। अपनी मनपसंद किताबें पढ़ने के लिए रोजाना कम से कम एक घंटे का समय सिर्फअपने लिए सुरक्षित रखूंगी।
अंजू लालगढि़या, श्रीगंगानगर
पारिवारिक और सामाजिक रिश्ते
करें कुछ नए निवेश
हम जिस परिवार और समाज में रहते हैं, उसके साथ भावनात्मक बंधन मजबूत बनाने की कोशिश करनी चाहिए। अपने मौजूदा रिश्तों को बेहतर बनाने के साथ कुछ नए लोगों से भी दोस्ती करनी चाहिए। यहां रिलेशनशिप स्पेशलिस्ट डॉ. विचित्रा डर्गन आनंद आपको दे रही हैं कुछ ऐसे टिप्स जिन्हें अपना कर आप अपने रिश्तों के बैंक बैलेंस में और इजाफा कर सकती हैं :
1. जरा ध्यान से सोचिए क्या अपने टीनएजर बच्चों के साथ आपके संबंध सहज हैं? क्या वे खुलकर आपको अपनी सारी बातें बताते हैं? अगर आपका जवाब नहीं है तो आज से ही अपने बच्चों के साथ संबंध सुधारने की पहल शुरू कर दें। उनके साथ प्यार से पेश आएं और उनकी छोटी-छोटी बातों में दिलचस्पी लें। इससे वे भावनात्मक रूप से आपके करीब आ जाएंगे।
2. अगर आप संयुक्त परिवार में रहती हैं तो पति और बच्चों के अलावा परिवार अन्य सदस्यों, विशेष रूप से बुजुर्गो का पूरा खयाल रखें और उनकी भावनाओं का सम्मान करें।
3. अगर आपकी न्यूक्लियर फेमिली है तो दूर रहने वाले रिश्तेदारों से निरंतर संपर्क बनाए रखें। जहां तक संभव हो छुट्टियों में सपरिवार उनसे मिलने जाएं और कभी-कभी उन्हें भी अपने यहां बुलाएं।
4. सोशल नेटवर्किग की साइट्स पर तो आपने बहुत सारे नए दोस्त बनाए होंगे, पर नए साल में यह संकल्प लें कि आप अपने घर के आसपास रहने वाले लोगों की तरफभी दोस्ती हाथ बढ़ाएंगे/बढ़ाएंगी।
5. जब भी जरूरत हो पड़ोसियों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहें।
6. अगर किसी दोस्त या रिश्तेदार से अनबन हो तो रिश्ते की इस कटुता को और न बढ़ाएं, बल्कि नए साल के पहले दिन उन्हें 'हैप्पी न्यू ईयर' कह कर अपने सारे मतभेद भुला दें।
इस साल मैं सभी रिश्तेदारों, खास तौर पर अपनी सास के साथ बेहतर संबंध बनाने की कोशिश करूंगी। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने गुस्से पर नियंत्रण रखते हुए सभी के साथ संयत व्यवहार करूंगी। इसके अलावा वर्ष 2012 में मैंने अपने आसपास की मलिन बस्ती के बच्चों को शिक्षित बनाने का संकल्प लिया है।

शुभ-मंगल सावधान

रात गई, बारात गई और अब जीवन में होने वाली है नई शुरुआत। क्यों न वैवाहिक जीवन का पहला कदम ही कुछ ऐसे उठाएं.. कि साजन ही नहीं, ससुराल में सभी हमेशा पलकों पर बिठाएं..
आनंद, उत्सव हिस्सा है शादी का। रिश्तेदारों की महफिल सजती है, खूब मस्ती होती है, पर जब विदाई हो जाती है तो खत्म हो जाता है इस उत्सव का दौर। यहीं से शुरू होता है एक दुल्हन का वास्तविक सफर। वैवाहिक खुशियों की तलाश का यह सफर अनजान राहों से भरा होता है। दुल्हन के सामने यह चुनौती होती है कि उसका हर कदम सही दिशा में हो। इसके बाद प्रश्न उठते हैं कि शादी की बुनियाद को मजबूत बनाने के लिए उसकी ओर से क्या प्रयास होने चाहिए? सास-ससुर एवं ससुराल के सदस्यों के साथ सुखमय एवं खूबसूरत घनिष्ठ रिश्ता कायम करने के लिए आपको क्या करना चाहिए?
सामंजस्य के तीन सूत्र
ये सवाल नए नहीं हैं। कई पीढि़यों से दुल्हन को उलझन में डालते आए हैं ये प्रश्न। इनके हल तलाशना आज की ऐसी दुल्हन के लिए और भी चुनौतीभरा है, जो पढ़ी-लिखी, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के साथ ही अपने निजी स्पेस और आजादी में विश्वास करती है। इस तथ्य के साथ एक और हकीकत जुड़ गई है। आजकल विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोगों के बीच विवाह पहले की तुलना में अधिक होने लगे हैं। इन बदलावों के बावजूद आज की दुल्हन अपने नए परिवार के साथ प्रेम व स्नेह का बंधन और पति के साथ खुशियों से सजा जीवनभर का नाता जोड़ना चाहती है।
प्यार से पगा हो पहला प्रभाव
इस बात का ख्याल रखें कि आपका पहला प्रभाव सबसे महत्वपूर्ण है। आपको यह समझना होगा कि आप चाहे किसी भी धर्म या समुदाय से ताल्लुक रखते हों, जब शादी की बात आती है तो सभी भारतीय परिवारों की सोच पारंपरिक रंग में ढली नजर आती है। अगर आप पति के परिवार के साथ अच्छी प्रकार घुलने-मिलने की कोशिश करेंगी तो आपका वैवाहिक जीवन दोगुना सफल होगा। पुरुषों को यह अच्छा लगता है कि उनकी मां व मित्रों के साथ पत्नी का अच्छा संबंध हो।
दूसरा कदम है दिल जीतना
अपने नए घर में जाने से काफी पहले ही यह जानने की कोशिश करें कि ससुराल में शुरुआती दिनों में पहनावे, रीति-रिवाजों और दिनचर्या को लेकर लोगों की आपसे क्या अपेक्षाएं हैं। वहां किन लोगों से आपका मिलना होगा? उनका व्यक्तित्व और तौर-तरीके कैसे हैं? इस संबंध में आपके होने वाले पति महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। उनकी मदद से आप यह जान सकती हैं कि वे कौन से तरीके हैं, जिनकी मदद से ससुराल में सदस्यों का दिल जीता जा सकता है। उनके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी में अपनी ओर से कुछ सौहा‌र्द्रपूर्ण चीजें जोड़ते हुए ससुराल पक्ष के लोगों से खूबसूरत रिश्ता जोड़ने में आपको मदद मिलेगी।
तारीफ है तीसरा मंत्र
औपचारिकताओं से मुक्त माहौल में संभव है कि शादी से पूर्व ही आपको अपने ससुराल में जाने और वहां का माहौल जानने का मौका मिले। अब जबकि आपको ससुराल में स्थाई रूप से प्रवेश करना है तो इस जानकारी का उपयोग आप अपने नए परिवार के साथ रिश्ते जोड़ने के लिए कर सकती हैं। इस सिलसिले में पहला कदम उठाते हुए औपचारिकताएं छोड़ खुद आगे बढ़कर आपको हर प्रकार से यह जताना होगा कि नए परिवार में आकर आप खुश हैं। इस क्रम में उनकी परंपराओं, जैसे आशीर्वाद के लिए बड़ों के चरणस्पर्श करना, विशेष परिधान धारण करना या धार्मिक विधि-विधानों इत्यादि का अनुसरण करें, ताकि नए घर में आपकी शुरुआत हो सही। चेहरे पर मुस्कराहट, समझ-बूझ और परिवार के साथ जुड़ने की स्वाभाविक चाह इस संबंध में आपकी मदद करेगी। आप खाना बनाने में मदद की पेशकश कर सकती हैं या कुछ अच्छा भोजन तैयार करने की इच्छा भी जाहिर कर सकती हैं। दैनिक कार्य के बारे में पूछें और जहां कहीं संभव हो मदद की पेशकश करें, ताकि आपको प्रत्येक सदस्य के साथ समय बिताने और उसे जानने का मौका मिल सके। बड़ों से सम्मानपूर्वक बात करें। बातों ही बातों में शादी के आयोजन की प्रशंसा करते हुए उन्हें बताएं कि उनके दिए उपहार आपको किस कदर पसंद आए हैं। शादी के बाद के पहले सप्ताह में पति के परिवार से घुलने-मिलने का विशेष प्रयत्न करें। कुछ ऐसा करें, जो उन्हें असीम खुशी दे सके। आपका रवैया ऐसा होना चाहिए, जिससे नए परिवार के सदस्यों में उसे लेकर चल रहे हर प्रकार के संदेह दूर हो जाएं; कहती हैं मैरिज काउंसलर रंजन बरार।
रिश्तों के तीन रोड़े
पुराने अनुभव यही सिखाते हैं जिन राहों पर गिरने का डर हो उनसे दूरी बनाने में ही समझदारी होती है। उदाहरण के लिए यदि आप अपने ऑफिस में बॉस हैं तो वही व्यवहार आप अपने नए घर में नहीं दिखा सकतीं।
अपनी मर्जी का जीवन
खाने में भले ही आपका अपना एक टेस्ट है, पर तब तक आपको धैर्य दिखाना होगा जब तक कि नए परिवार में लोग आपको जान नहींजाते और आपकी पसंद को तरजीह नहीं देने लगते। अगर आपको देर तक सोने, टीवी के सामने बैठकर खाना खाने या देर रात तक घूमने-फिरने की आदत है, तो इन सभी पर आपको पुनर्विचार करना होगा। आपको यह देखना होगा कि एक पत्नी और बहू के रूप में क्या उचित रहेगा। यदि आप दूसरे धर्म या समुदाय से ताल्लुक रखती हैं तो पहले ही यह समझ विकसित कर लेनी चाहिए कि रीति-रिवाजों और विश्वासों के कारण आप दोनों अपने संबंधों को प्रभावित नहीं होने देंगे।
पति के परिवार का उपहास
अपनी सामाजिक स्थिति, धन, शादी से पूर्व की जीवनशैली, कॅरियर की सफलता और परंपराओं के प्रति विद्रोही दृष्टिकोण को मुद्दा न बनाएं। आखिर शादी का फैसला आपका है। अपने जीवनसाथी को आपने अपनी मर्जी से चुना है। पति को उसके परिवार से अलग करने की कोई भी कोशिश नाराजगी और आपके प्रति अस्वीकारोक्ति उत्पन्न करेगी। भारत में शादी सिर्फ स्त्री-पुरुष का बंधन नहीं, बल्कि उनका एक-दूसरे के परिवारों से भी रिश्ता जुड़ता है। ऐसे में नए परिवार के साथ घनिष्ठता बढ़ाने से वैवाहिक जीवन में भी मिठास घुलेगी। रंजन बरार कहती हैं, 'नवदंपति यदि परिवार के रूप में मिल-जुलकर साथ रहने की अपनी सांस्कृतिक विरासत को ही भुला देते हैं तो वे असफल कहलाएंगे।
सास-ससुर के प्रति पूर्वाग्रह
दुल्हन को अपने नए घर में सास-ससुर के प्रति पूर्वाग्रह के साथ प्रवेश नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे परिस्थितियां विकट होना सुनिश्चित हो जाता है। विशेषकर यदि वह भिन्न समुदाय या धर्म से ताल्लुक रखती है तो उसे खुले हृदय से आना चाहिए और निर्णायक बने बगैर भिन्न जीवनशैली को स्वीकार करना चाहिए। नए परिवार में उसे अजनबी नहीं बनना चाहिए और न ही उनके बेटे को छीनने की कोशिश करनी चाहिए।'
धीरे-धीरे आपको स्वयं यह समझ आ जाएगा कि अच्छे रिश्ते एकाएक नहीं बनते, बल्कि उनके लिए मेहनत करनी पड़ती है। प्यार, दुलार और सम्मान से उन्हें सींचना पड़ता है, तब जाकर बनता है स्नेह का अटूट रिश्ता।