Tuesday, 4 October 2011

एकता एक्सप्रेस पर बरसाए पत्थर, श्रद्धालु बाल-बाल बचे

एकता एक्सप्रेस पर कुरुक्षेत्र के समीप असामाजिक तत्वों ने पत्थर बरसाए। इससे काली माता के दर्शन कर कालका से लौट रहे पानीपत के करीब एक दर्जन श्रद्धालु बाल-बाल बच गए। सोमवार देर शाम श्रद्धालुओं ने इसकी सूचना दैनिक भास्कर कार्यालय पहुंचकर दी।

तहसील कैंप के प्रकाश नगर निवासी रूप ठाकुर, विजय, विनय कुमार, काला आदि ने बताया कि शहर के ही करीब एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालुओं के साथ एकता एक्सप्रेस से घर लौट रहे थे।

गाड़ी कुरुक्षेत्र से जैसे ही चली पास में ही मौजूद एक कालोनी के युवकों ने उनके डिब्बे पर मोटे-मोटे पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। इससे डिब्बे में बैठे सभी यात्री भयभीत हो गए। गनीमत ये रही कि इनमें से एक भी पत्थर यात्रियों को नहीं लगा। उन्होंने रेलवे प्रशासन से जल्द ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

Monday, 3 October 2011

5 अक्टूबर को करें यह टोटका, आएगा पैसा ही पैसा

 नवरात्रि टोने-टोटकों के लिए बहुत ही उत्तम समय रहता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार इस दौरान किए गए सभी तंत्र प्रयोग शीघ्र ही फल देते हैं। यदि आप गरीब हैं और धनवान होना चाहते हैं नवरात्रि इसके लिए बहुत ही श्रेष्ठ समय है। नीचे लिखे टोटके को विधि-विधान से करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी।

टोटका

नवरात्रि के अंतिम दिन (5 अक्टूबर, बुधवार) को रात 10 बजे के बाद सभी कार्यों से निवृत्त होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने तेल के 9 दीपक जला लें। ये दीपक साधनाकाल तक जलते रहने चाहिए। दीपक के सामने लाल चावल की एक ढेरी बनाएं फिर उस पर एक श्रीयंत्र रखकर उसका कुंकुम, फूल, धूप, तथा दीप से पूजन करें। उसके बाद एक प्लेट पर स्वस्तिक बनाकर उसे अपने सामने रखकर उसका पूजन करें। श्रीयंत्र को अपने पूजा स्थल पर स्थापित कर लें और शेष सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से धन आने लगेगा।

नौवीं कक्षा के छात्र का यह 'चमत्कार' मरीजों के लिए बनेगा 'वरदान'!


प्रतिभाएं कभी परिचय की मोहताज नहीं होतीं, देर सबेर ही सही उनके हुनर की तारीफ जमाने को करनी ही पड़ती है। ऐसी ही प्रतिभा हैं डीएवी पब्लिक स्कूल थर्मल कक्षा नौवीं के छात्र अर्श शाह दिलबागी।

अर्श ने गत दिनों नोएडा में आयोजित इंडियन रोबोट ओलंपियाड में रोबोट बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया एवं प्रथम स्थान प्राप्त किया। रोबोट बनाने में उनके सहयोगी दो अन्य छात्र भी थे। छठवां रोबोट ओलंपियाड नोएडा में 30 सितंबर से एक अक्टूबर तक आयोजित हुआ। इसमें देशभर के विभिन्न स्कूलों की 45 टीमों ने हिस्सा लिया था।

राष्ट्रपति ने भी किया है सम्मानित

अर्श अपनी उपलब्धियों के लिए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा भी सम्मानित किए जा चुके हैं। अनमैंड ग्राउंड व्हीकल का प्रतिरूप बनाकर नार्थ जोन में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए उन्हें सम्मानित किया गया था। फिलीपींस मनीला में आयोजित की गई रोबोटिक्स कार्यशाला में भी अर्श की टीम भारत का नेतृत्व कर चुकी है। उल्लेखनीय है कि अर्श के पिता अमित दिलबागी पानीपत थर्मल में एक्सईएन के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा उसकी मां रितु डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में प्रिंसिपल हैं।

अर्श का रोबोट मरीजों के हित में

अर्श का रोबोट मरीजों के हित में है। प्री प्रोग्राम्स रोबोटिक्स (रोबोट) की मदद से मरीजों को सुरक्षा के साथ ऊंचे-नीचे स्थानों पर आसानी से ले जाया जा सकेगा। यह कहना है रोबोट निर्माता छात्र अर्श दिलबागी का।

अर्श की तमन्ना :  अर्श ने भास्कर से बातचीत में कहा कि वे चाहते हैं कि रोबोटिक्स के क्षेत्र में बेहतर कार्य करें। साथ ही रोबोट को भारतीय आबादी की सुविधा से जोड़ें। उन्होंने रोबोटिक्स से जुड़ी एक बेवसाइट भी बनाई है, जिसे प्रतिदिन सैकड़ों लोग सर्च करते हैं।

21 केलों का चमत्कार, सभी कार्यों में मिलेगी सफलता...

इन दिनों मां दुर्गा की आराधना का महापर्व नवरात्रि चल रहा है। इस दौरान मां दुर्गा की भक्ति से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पुराने पापों से मुक्ति मिलती है और देवी कृपा प्राप्त होती है।

मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए भक्तों द्वारा कई प्रकार की पूजा-अर्चना की जाती है। यदि आप भी मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो यह छोटा सा उपाय अपनाएं...

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद किसी भी सिद्ध माता के मंदिर जाएं और अपने साथ 21 केले लेकर जाएं। मंदिर पहुंचकर माता को केले अर्पित करें। इसके साथ ही मां दुर्गा के मंत्रों का जप करें या आरती करें। अपने कार्यों के पूर्ण होने की प्रार्थना करें। इसके बाद केले मंदिर में ही अन्य भक्तों में वितरित कर दें।

इस प्रकार यह उपाय नवरात्रि से शुरू करके सप्ताह में एक दिन अवश्य करें। कुछ ही दिनों सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे। देवी-देवता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं लेकिन भक्त की वैसी श्रद्धा और आस्था होना चाहिए।

Sunday, 2 October 2011

नवरात्रि में करें कन्या पूजन: महत्व व विधि

नवरात्रि माता आराधना का सबसे बड़ा पर्व है। इस नौ दिनों में भक्त विभिन्न तरीकों से माता को मनाने का प्रयत्न करते हैं। नवरात्रि के दौरान कुमारी कन्याओं को भोजन कराने का प्रचलन भी है। तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो की पूजा से भोग और मोक्ष, तीन की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम, चार की पूजा से राज्यपद, पांच की पूजा से विद्या, छ: की पूजा से छ: प्रकार की सिद्धि, सात की पूजा से राज्य, आठ की पूजा से संपदा और नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है। कन्या पूजन की विधि इस प्रकार है-
पूजन विधि
कन्या पूजन में तीन से लेकर नौ साल तक की कन्याओं का ही पूजन करना चाहिए इससे कम या ज्यादा उम्र वाली कन्याओं का पूजन वर्जित है। अपने सामथ्र्य के अनुसार नौ दिनों तक अथवा नवरात्रि के अंतिम दिन कन्याओं को भोजन के लिए आमंत्रित करें। कन्याओं को आसन पर एक पंक्ति में बैठाएं। ऊँ कुमार्यै नम: मंत्र से कन्याओं का पंचोपचार पूजन करें। इसके बाद उन्हें रुचि के अनुसार भोजन कराएं। भोजन में मीठा अवश्य हो, इस बात का ध्यान रखें। भोजन के बाद कन्याओं के पैर धुलाकर विधिवत कुंकुम से तिलक करें तथा दक्षिणा देकर हाथ में पुष्प लेकर यह प्रार्थना करें-
मंत्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृणां रूपधारिणीम्।
नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्।।
जगत्पूज्ये जगद्वन्द्ये सर्वशक्तिस्वरुपिणि।
पूजां गृहाण कौमारि जगन्मातर्नमोस्तु ते।।

तब वह पुष्प कुमारी के चरणों में अर्पण कर उन्हें ससम्मान विदा करें।

जब सचिन ने दिखाया था, 'बाप-बाप होता है और बेटा-बेटा'


सचिन तेंडुलकर के खिलाफ शोएब अख्तर के बयान का समर्थन कर शाहिद आफरीदी भी विवादों में घिर चुके हैं। लेकिन वे भूल चुके हैं कि सचिन तेंडुलकर ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने उन्हें भी औकात दिखाई है। 2003 के विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई सचिन की पारी भूली नहीं जा सकती है।

सचिन तेंडुलकर ने अपनी उस पारी में प्रत्येक पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर धुलाई की थी। यहां तक कि शोएब अख्तर की गेंद पर लगाया गया एक शानदार छक्का आज भी क्रिकेट प्रेमियों को याद है। शोएब के खिलाफ लगाया गया वो शॉट क्रिकेट के बेहतरीन शॉट में शामिल हो गया। वीडियो में सचिन के इस तूफान का उठाएं लुत्फ।

अलग प्रकार की थी हृदय की बनावट फिर भी निकाल लिया मौत के मुंह से!


एक निजी अस्पताल में शादुलपुर (चूरू) निवासी 45 वर्षीय धर्मपाल के हृदय की बनावट जन्म से ही अलग प्रकार की थी। डॉक्टरों ने उसे ऑपरेशन के जरिए (स्टेंट डालकर) मौत के मुंह से बचाया है। डॉक्टरों के अनुसार विशेष प्रकार की बनावट के हृदय के कारण मरीज को पांच साल से सांस फूलने एवं थकान की शिकायत थी। ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ है।
विद्याधर नगर के एस.के. सोनी अस्पताल के डॉ. मिलिंद श्रीवास्तव ने शनिवार को मीडिया को बताया कि धर्मपाल की दोनों धमनियां दाईं तरफ से निकल रही थीं तथा 100 प्रतिशत ब्लॉकेज थीं, जो जन्म से पूर्व हृदय के बनने के समय हुआ। अस्पताल में भर्ती होने से पूर्व एक बार दिल का दौरा पड़ चुका है। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार दाईं आर्टरी में स्टंट डालना इतना मुश्किल नहीं होता, जितना बाईं तरफ वाली आर्टरी में होता है। मरीज के हृदय की बनावट विचित्र होने से परेशानी हुई।

जयपुर