खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने बताया कि उनकी पढ़ने की आदत आखिरी दिन तक बनी रही। उन्हें सांस लेने में थोड़ी परेशानी हो रही थी। कुछ सप्ताह से वह काफी ज्यादा सोते थे। उन्होंने बहुत ही जिंदादिली के साथ जीवन बिताया। जो दिल में आता था वह कह देते थे। देश विभाजन का उन्हें गहरा दुख था। वह अंतिम समय तक यही चाहते थे कि अधिक से अधिक पाकिस्तान के लोग भारत आएं और भारत के लोग पाकिस्तान जाएं। राहुल ने कहा, 'मैं उनके विचारों को आगे ले जाने की कोशिश करूंगा।' भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में लोकप्रिय खुशवंत सिंह बेबाक लेखन और खुशमिजाज व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। उनके निधन पर साहित्यकारों और पत्रकारों ने गहरा दुख जताया है।
Thursday, 20 March 2014
वरिष्ठ पत्रकार खुशवंत सिंह का निधन
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