स्पेन के पॉलिटेक्निका डी मेड्रिड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता प्रौद्योगिकी कंपनी लिया सिस्टम्स एसएल के सहयोग से एक ऐसी प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जो लोगों को उनके शरीर की दुर्गंध से पहचान लेगा। किसी व्यक्ति के शरीर की दरुगध काफी लंबे समय तक एक सी रहती है, जिसकी मदद से उस व्यक्ति की 85 फीसदी तक सफलतापूर्वक पहचान की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे लोगों की पहचान करने में पहचान पत्र या अन्य हस्तक्षेपकारी तकनीकों की अपेक्षा बिना किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप के लोगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। उंगलियों के निशान और आंखों की स्कैनिंग के जरिए कहीं अधिक शुद्ध परिणाम वाले होते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं का दावा है कि चूंकि इन तकनीकों का इस्तेमाल अपराधियों की पहचान से भी जुड़ा है, जिसके कारण लोग इनके इस्तेमाल के अनिच्छुक दिखाई देते हैं। जबकि चेहरे के हाव-भाव वाली तकनीक में काफी अशुद्धता रहती है। विशेषज्ञों ने अपने अध्ययन में आगे कहा है कि, इसीलिए गंध के जरिए पहचान करने वाले सेंसर के जरिए बिना किसी तरह के बाहरी हस्तक्षेप के लोगों की पहचान कहीं अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी, क्योंकि कोई कोई व्यक्ति जैसे ही इस सेंसर से होकर गुजरेगा, सेंसर व्यक्ति के शरीर की गंध के जरिए उसकी पहचान कर लेगा। शोधकर्ताओं को पूरा विश्वास है कि हवाईअड्डों, सीमा चौकियों या ऐसे किसी भी जगह जहां फोटो पहचान पत्र दिखाए जाने की आवश्यकता होती है, इस सेंसर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Monday, 24 February 2014
शरीर की दुर्गंध से भी होगी आपकी पहचान
स्पेन के पॉलिटेक्निका डी मेड्रिड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता प्रौद्योगिकी कंपनी लिया सिस्टम्स एसएल के सहयोग से एक ऐसी प्रणाली विकसित कर रहे हैं, जो लोगों को उनके शरीर की दुर्गंध से पहचान लेगा। किसी व्यक्ति के शरीर की दरुगध काफी लंबे समय तक एक सी रहती है, जिसकी मदद से उस व्यक्ति की 85 फीसदी तक सफलतापूर्वक पहचान की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे लोगों की पहचान करने में पहचान पत्र या अन्य हस्तक्षेपकारी तकनीकों की अपेक्षा बिना किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप के लोगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। उंगलियों के निशान और आंखों की स्कैनिंग के जरिए कहीं अधिक शुद्ध परिणाम वाले होते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं का दावा है कि चूंकि इन तकनीकों का इस्तेमाल अपराधियों की पहचान से भी जुड़ा है, जिसके कारण लोग इनके इस्तेमाल के अनिच्छुक दिखाई देते हैं। जबकि चेहरे के हाव-भाव वाली तकनीक में काफी अशुद्धता रहती है। विशेषज्ञों ने अपने अध्ययन में आगे कहा है कि, इसीलिए गंध के जरिए पहचान करने वाले सेंसर के जरिए बिना किसी तरह के बाहरी हस्तक्षेप के लोगों की पहचान कहीं अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी, क्योंकि कोई कोई व्यक्ति जैसे ही इस सेंसर से होकर गुजरेगा, सेंसर व्यक्ति के शरीर की गंध के जरिए उसकी पहचान कर लेगा। शोधकर्ताओं को पूरा विश्वास है कि हवाईअड्डों, सीमा चौकियों या ऐसे किसी भी जगह जहां फोटो पहचान पत्र दिखाए जाने की आवश्यकता होती है, इस सेंसर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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