मुंबई में उच्च सुरक्षा वाले पोतगाह में भारतीय नौसेना की
एक पनडुब्बी में
बुधवार को भारी विस्फोट हुआ और वह आग की लपटों में घिर गई। इसके बाद यह
पनडुब्बी समुद्र में डूब गई। दुर्घटना के साथ ही करीब नौ सैन्यकर्मी समुद्र
में सुरक्षित कूद गए, लेकिन 18 सन्यकर्मी उसमें फंसे रह गए और वे लापता
बताए जा रहे हैं। अग्निशामक और बचाव दलों की अथक कोशिशों के बावजूद
पनडुब्बी को डूबने से नहीं बचाया जा सका।
एक सूत्र ने बताया, ''नौसेना प्रमुख एड़मिरल डी. के. जोशी घटनास्थल का मुआयना करने मुंबई गए हैं। बाद में वह रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी से मुलाकात कर उन्हें घटना का पूरा विवरण देंगे, जिसके बाद एंटनी संसद में घटना पर अपना बयान दे सकते हैं।'' आईएनएस सिंधुरक्षक में मंगलवार देर रात विस्फोट के बाद आग लग गई। रूस ने सिंधुरक्षक को मरम्मत के बाद भारत को सौंपा था। आग लगने के बाद कई नौसैनिक जान बचाने के लिए पानी में कूद गए थे, लेकिन सूत्रों से पता चला है कि अब भी 18 नौसैनिक पनडुब्बी में फंसे हुए हैं। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार तड़के 3.15 बजे जारी बयान में कहा, ''पनडुब्बी के अंदर कुछ नौसैनिकों के फंसे होने की आशंका है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।'' दुर्घटना में घायल आईएनएस सिंधुरक्षक के नौसैनिकों को कोलाबा स्थित नौसेना के अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी में भर्ती कराया गया है। आग बुझाने के लिए मुंबई अग्निशमन और मुंबई पत्तन न्यास के 16 कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया। अग्निशमन अधिकारियों ने बताया कि तड़के तीन बजे के करीब आग पर काबू पाया जा सका और क्षेत्र में अन्य जहाजों पर आग को फैलने से रोका गया। अग्निशमन कार्यालय के उप प्रमुख पी. एस. राहांदले ने सबसे पहले विस्फोट की आवाज सुनी और तुरंत अग्निशमन दल और आपातकालीन सेवाओं को घटना के बारे में सूचित किया। पनडुब्बी में विस्फोट और आग लगने के कारणों तथा नौसेना की संपत्ति के नुकसान के बारे में अभी पता नहीं लगाया जा सका है। रूस की ज्वेदोचका पोत मरम्मत कंपनी ने भारतीय नौसेना के डीजल-इलेक्ट्रिक बेड़े की चार पनडुब्बियों की मरम्मत पहले ही कर चुका है। इसमें सिंधुवीर (एस58), सिंधुरत्न (एस59), सिंधुघोष (एस55) और सिंधुध्वज (एस56) शामिल हैं। आईएनएस सिंधुरक्षक इसकी अगली कड़ी है, जिसे मरम्मत के बाद रूस ने भारत को सौंपा था। समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती ने पूर्व में कहा था कि 877 ईकेएम (नाटो किलो-क्लास) परियोजना वाली पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक (एस63) की मरम्मत और आधुनिकीकरण के लिए जून 2०1० में अनुबंध किया गया था। मरम्मत के दौरान पनडुब्बी में क्लब एस क्रूज मिसाइल और 1० भारतीय एवं विदेश निर्मित प्रणालियां जोड़ी गई थीं। इसके अलावा जहाज की सैन्य क्षमता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए पनडुब्बी को ठंडा रखने वाली प्रणाली को उन्नत किया गया था। रूस ने 1995 में निर्मित पनडुब्बी (आईएनएस सिंधुरक्षक) को दिसंबर 1997 में भारत को सौंपा था। एक साथ 52 नौसैनिकों की वहन क्षमता वाले सिंधुरक्षक में 19 नॉट्स (35 किलोमीटर प्रति घंटा) की रफ्तार और समुद्र में 3०० मीटर की गहराई तक जाने की क्षमता थी। यह दुर्घटना ऐसे समय में घटी है, जब हाल ही में भारत ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित अपने पहले विमान वाहक पोत 'विक्रांत' का जलावतरण किया है। दुर्घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
एक सूत्र ने बताया, ''नौसेना प्रमुख एड़मिरल डी. के. जोशी घटनास्थल का मुआयना करने मुंबई गए हैं। बाद में वह रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी से मुलाकात कर उन्हें घटना का पूरा विवरण देंगे, जिसके बाद एंटनी संसद में घटना पर अपना बयान दे सकते हैं।'' आईएनएस सिंधुरक्षक में मंगलवार देर रात विस्फोट के बाद आग लग गई। रूस ने सिंधुरक्षक को मरम्मत के बाद भारत को सौंपा था। आग लगने के बाद कई नौसैनिक जान बचाने के लिए पानी में कूद गए थे, लेकिन सूत्रों से पता चला है कि अब भी 18 नौसैनिक पनडुब्बी में फंसे हुए हैं। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार तड़के 3.15 बजे जारी बयान में कहा, ''पनडुब्बी के अंदर कुछ नौसैनिकों के फंसे होने की आशंका है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।'' दुर्घटना में घायल आईएनएस सिंधुरक्षक के नौसैनिकों को कोलाबा स्थित नौसेना के अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी में भर्ती कराया गया है। आग बुझाने के लिए मुंबई अग्निशमन और मुंबई पत्तन न्यास के 16 कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया। अग्निशमन अधिकारियों ने बताया कि तड़के तीन बजे के करीब आग पर काबू पाया जा सका और क्षेत्र में अन्य जहाजों पर आग को फैलने से रोका गया। अग्निशमन कार्यालय के उप प्रमुख पी. एस. राहांदले ने सबसे पहले विस्फोट की आवाज सुनी और तुरंत अग्निशमन दल और आपातकालीन सेवाओं को घटना के बारे में सूचित किया। पनडुब्बी में विस्फोट और आग लगने के कारणों तथा नौसेना की संपत्ति के नुकसान के बारे में अभी पता नहीं लगाया जा सका है। रूस की ज्वेदोचका पोत मरम्मत कंपनी ने भारतीय नौसेना के डीजल-इलेक्ट्रिक बेड़े की चार पनडुब्बियों की मरम्मत पहले ही कर चुका है। इसमें सिंधुवीर (एस58), सिंधुरत्न (एस59), सिंधुघोष (एस55) और सिंधुध्वज (एस56) शामिल हैं। आईएनएस सिंधुरक्षक इसकी अगली कड़ी है, जिसे मरम्मत के बाद रूस ने भारत को सौंपा था। समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती ने पूर्व में कहा था कि 877 ईकेएम (नाटो किलो-क्लास) परियोजना वाली पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक (एस63) की मरम्मत और आधुनिकीकरण के लिए जून 2०1० में अनुबंध किया गया था। मरम्मत के दौरान पनडुब्बी में क्लब एस क्रूज मिसाइल और 1० भारतीय एवं विदेश निर्मित प्रणालियां जोड़ी गई थीं। इसके अलावा जहाज की सैन्य क्षमता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए पनडुब्बी को ठंडा रखने वाली प्रणाली को उन्नत किया गया था। रूस ने 1995 में निर्मित पनडुब्बी (आईएनएस सिंधुरक्षक) को दिसंबर 1997 में भारत को सौंपा था। एक साथ 52 नौसैनिकों की वहन क्षमता वाले सिंधुरक्षक में 19 नॉट्स (35 किलोमीटर प्रति घंटा) की रफ्तार और समुद्र में 3०० मीटर की गहराई तक जाने की क्षमता थी। यह दुर्घटना ऐसे समय में घटी है, जब हाल ही में भारत ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित अपने पहले विमान वाहक पोत 'विक्रांत' का जलावतरण किया है। दुर्घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
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