कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के गेम चैंजर खाद्य सुरक्षा बिल पर बुधवार को संसद
में चर्चा हो सकती है। सरकार की कोशिश विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराने
की है
। कांग्रेस ने अपने सांसदों से पूरी संख्या में मौजूद रहने कहा है।
गौरतलब है कि इस विधेयक को संसद की मंजूरी नहीं मिली है। सरकार के लिए संसद के मानसून सत्र में इसे पारित कराना जरूरी है, नहीं तो यह रद्द हो जाएगा। इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक को लेकर हमला बोलते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विधेयक वर्तमान स्वरूप में देश को कुपोषण की ओर ले जाएगा।
मोदी ने गत सात अगस्त को लिखे पत्र में दावा किया है कि केंद्र की ओर से जारी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश में दोष और खामियां हैं क्योंकि यह गरीबों की कैलोरी और पोषक तत्वों की कमी दूर करने में असफल है। इस अध्यादेश के संसद में खाद्य सुरक्षा विधेयक के रूप में पारित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पोषक तत्वों की जररत को पूरा करने को लेकर चिंतित देश में यह विधेयक एक ऐसा विधेयक है जो देश को कुपोषण की ओर ले जाएगा। प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक गरीबों को भूखा रखेगा और उनसे उनका भोजन भी छीन लेगा। गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले जिन परिवारों को वर्तमान में 35 किलोग्राम अनाज मिलता है उन्हें प्रस्तावित विधेयक के तहत मात्र 25 किलोग्राम अनाज ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आपके नीति निर्माताओं को आम जनता की दशा की जानकारी नहीं है और ना ही उन्हें उनकी जीने की स्थिति की ही जानकारी है। इसी के चलते आपकी सरकार के लोग घोषणा करते हैं कि हमें पांच रुपये में या 12 रपये में खाना मिल सकता है। उन्होंने पत्र में कहा कि यह मानसिकता विधेयक में भी झलकती है। प्रधानमंत्रीजी आप अर्थशास्त्री हैं और आप जितनी जल्दी गरीब व्यक्ति के भोजन का अर्थशास्त्र समक्ष लेंगे उसके भोजन प्राप्त करने की संभावनाएं उतनी ही उज्ज्वल होंगी। मोदी ने कहा कि सबसे अधिक पिछड़ों को आपके विधेयक से लाभ नहीं मिलने वाला। आपके नए खाद्य सुरक्षा विधेयक की बजाय गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों पर बोझ और बढ़ जाएगा। मोदी ने पत्र में कहा है, मैंने यह गहरी चिंता के साथ गौर किया है कि अध्यादेश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मिलने वाले अधिकार को कम करने का प्रस्ताव है। इसमें उन्हें मिलने वाले 35 किलोग्राम अनाज की मात्रा को घटाकर पांच व्यक्ति वाले परिवार को 25 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है। उन्होंने दावा किया कि इस 10 किलोग्राम कमी से गरीबी रेखा के नीचे रहने वाला प्रत्येक परिवार यह मात्रा खुले बाजार से खरीदने को बाध्य होगा और महंगाई के दबाव में ऐसे परिवारों को अतिरिक्त 100 रुपये खर्च करने होंगे। इससे प्रति परिवार पर एक हजार रुपये वार्षिक का वित्तीय बोझ पड़ेगा। मोदी ने प्रति व्यक्ति को प्रति महीने पांच किलोग्राम अनाज की हकदारी की आलोचना करते हुए दावा किया कि यह अध्यादेश किसी भी व्यक्ति को दिन में दो बार भोजन भी सुनिश्चित नहीं करता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पोषण संस्थान की सिफारिशों के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 2500 कैलोरी की जरूरत होती है लेकिन आपकी योजना प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन 165 ग्राम देने का प्रस्ताव है जो कि केवल 350 कैलोरी ही प्रदान करेगा जो कि उसकी दैनिक कैलोरी जरूरतों का मात्र 20 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि मध्याहन भोजना योजना के तहत भी विद्यालय जाने वाले बच्चे एक समय भोजन के तहत 150 ग्राम अनाज और 30 ग्राम दाल प्राप्त करने के हकदार हैं। उन्होंने दावा किया, इसके विपरीत एक वयस्क खाद्य असुरक्षित व्यक्ति को प्रतिदिन दो बार के भोजन के लिए 165 ग्राम देने का प्रस्ताव है। इससे कैलोरी की जरूरत भी पूरी नहीं होगी पोषण सुरक्षा की तो बात ही छोड़ दीजिए जो कि खाद्य सुरक्षा विधेयक का मुख्य उद्देश्य है।
गौरतलब है कि इस विधेयक को संसद की मंजूरी नहीं मिली है। सरकार के लिए संसद के मानसून सत्र में इसे पारित कराना जरूरी है, नहीं तो यह रद्द हो जाएगा। इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक को लेकर हमला बोलते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विधेयक वर्तमान स्वरूप में देश को कुपोषण की ओर ले जाएगा।
मोदी ने गत सात अगस्त को लिखे पत्र में दावा किया है कि केंद्र की ओर से जारी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अध्यादेश में दोष और खामियां हैं क्योंकि यह गरीबों की कैलोरी और पोषक तत्वों की कमी दूर करने में असफल है। इस अध्यादेश के संसद में खाद्य सुरक्षा विधेयक के रूप में पारित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पोषक तत्वों की जररत को पूरा करने को लेकर चिंतित देश में यह विधेयक एक ऐसा विधेयक है जो देश को कुपोषण की ओर ले जाएगा। प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक गरीबों को भूखा रखेगा और उनसे उनका भोजन भी छीन लेगा। गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले जिन परिवारों को वर्तमान में 35 किलोग्राम अनाज मिलता है उन्हें प्रस्तावित विधेयक के तहत मात्र 25 किलोग्राम अनाज ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आपके नीति निर्माताओं को आम जनता की दशा की जानकारी नहीं है और ना ही उन्हें उनकी जीने की स्थिति की ही जानकारी है। इसी के चलते आपकी सरकार के लोग घोषणा करते हैं कि हमें पांच रुपये में या 12 रपये में खाना मिल सकता है। उन्होंने पत्र में कहा कि यह मानसिकता विधेयक में भी झलकती है। प्रधानमंत्रीजी आप अर्थशास्त्री हैं और आप जितनी जल्दी गरीब व्यक्ति के भोजन का अर्थशास्त्र समक्ष लेंगे उसके भोजन प्राप्त करने की संभावनाएं उतनी ही उज्ज्वल होंगी। मोदी ने कहा कि सबसे अधिक पिछड़ों को आपके विधेयक से लाभ नहीं मिलने वाला। आपके नए खाद्य सुरक्षा विधेयक की बजाय गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों पर बोझ और बढ़ जाएगा। मोदी ने पत्र में कहा है, मैंने यह गहरी चिंता के साथ गौर किया है कि अध्यादेश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मिलने वाले अधिकार को कम करने का प्रस्ताव है। इसमें उन्हें मिलने वाले 35 किलोग्राम अनाज की मात्रा को घटाकर पांच व्यक्ति वाले परिवार को 25 किलोग्राम करने का प्रस्ताव है। उन्होंने दावा किया कि इस 10 किलोग्राम कमी से गरीबी रेखा के नीचे रहने वाला प्रत्येक परिवार यह मात्रा खुले बाजार से खरीदने को बाध्य होगा और महंगाई के दबाव में ऐसे परिवारों को अतिरिक्त 100 रुपये खर्च करने होंगे। इससे प्रति परिवार पर एक हजार रुपये वार्षिक का वित्तीय बोझ पड़ेगा। मोदी ने प्रति व्यक्ति को प्रति महीने पांच किलोग्राम अनाज की हकदारी की आलोचना करते हुए दावा किया कि यह अध्यादेश किसी भी व्यक्ति को दिन में दो बार भोजन भी सुनिश्चित नहीं करता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पोषण संस्थान की सिफारिशों के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन 2500 कैलोरी की जरूरत होती है लेकिन आपकी योजना प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन 165 ग्राम देने का प्रस्ताव है जो कि केवल 350 कैलोरी ही प्रदान करेगा जो कि उसकी दैनिक कैलोरी जरूरतों का मात्र 20 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि मध्याहन भोजना योजना के तहत भी विद्यालय जाने वाले बच्चे एक समय भोजन के तहत 150 ग्राम अनाज और 30 ग्राम दाल प्राप्त करने के हकदार हैं। उन्होंने दावा किया, इसके विपरीत एक वयस्क खाद्य असुरक्षित व्यक्ति को प्रतिदिन दो बार के भोजन के लिए 165 ग्राम देने का प्रस्ताव है। इससे कैलोरी की जरूरत भी पूरी नहीं होगी पोषण सुरक्षा की तो बात ही छोड़ दीजिए जो कि खाद्य सुरक्षा विधेयक का मुख्य उद्देश्य है।
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