Monday, 8 July 2013

एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप: थापा ने भारत को दिलाया स्वर्ण

नई दिल्ली। युवा भारतीय मुक्के
बाज शिव थापा (56 किग्रा) ने जॉर्डन के अम्मान में खत्म हुई एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही थापा इस प्रतियोगिता में सोना झटकने वाले सबसे युवा मुक्केबाज भी बन गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ के झंडे तले खेल रहे भारत ने इस चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीता।
भारत के लिए एल देवेंद्रो सिंह (49 किग्रा) और मंदीप जांगड़ा (69 किग्रा) ने रजत पदक जीता, जबकि मनोज कुमार (46 किग्रा) ने कांस्य पदक अपने नाम किया। लंदन ओलंपिक के बाद अपना दूसरा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेल रहे असम के 19 वर्षीय मुक्केबाज थापा ने सोमवार को फाइनल बाउट में स्थानीय दावेदार ओबाडा अलकाबेथ को 2-1 से हराया। थापा इस चैंपियनशिप में सुरंजय सिंह (2009) और राजकुमार सांगवान (1994) के बाद स्वर्ण पदक जीतने वाले तीसरे भारतीय मुक्केबाज हैं। भारतीय टीम के मुख्य कोच गुरबक्श सिंह संधू ने थापा की जीत के बाद कहा कि शिवा ने शानदार बाउट लड़ी। उसने अपने दिमाग का इस्तेमाल कर तीनों राउंड में दबदबा बनाए रखा। दोनों मुक्केबाजों के बीच वह साफतौर पर बेहतर था।
वहीं, एल देवेंद्रो सिंह को फाइनल में कजाखिस्तान के तेमेरतास जुसुपोव के हाथों हार झेलनी पड़ी, जबकि मंदीप को कजाखिस्तान के 2010 एशियाई खेलों के स्वर्ण पदकधारी दानियार येलेयुसिनोव से शिकस्त झेलनी पड़ी। इन दोनों मुक्कबाजों के प्रदर्शन पर संधू ने कहा कि देवेंद्रो की बाउट काफी नजदीकी रही। मैं उसके प्रदर्शन से संतुष्ट हूं। मेरे लिए वह बेहतर मुक्केबाज के तौर पर उभर रहा है। वहीं मंदीप युवा है और उसे ज्यादा अनुभव नहीं है। फिर भी उसने अच्छा मुकाबला किया।
इससे पहले राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदकधारी मनोज कुमार (64) को लाइट वेल्टरवेट वर्ग के सेमीफाइनल में निराशा हाथ लगी। उन्होंने ओलंपिक कांस्य पदकधारी उरानचिमेगिन को चुनौती दी लेकिन मंगोलियाई मुक्केबाज ने उन्हें शिकस्त दी जिससे इस भारतीय को टूर्नामेंट में कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

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